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Jalandhar News: 2014 में जालंधर पहुंचे स्वराज पॉल ने कहा था- मैं अब 83 का हो चुका हूं, शायद दोबारा न आ सकूं
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-जालंधर से निकले स्वराज पॉल ने यूके में स्थापित किया था 12 हजार करोड़ का कारोबार, निधन से शोक
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सुरिंदर पाल
जालंधर। मेरी उम्र 83 साल हो चुकी है। पता नहीं दोबारा अपने देश आ भी सकूं या नहीं, इसलिए अपने परिवार खासकर पोते-पोती आर्ची और अमाल्या को उनकी जड़ें दिखाने लाया हूं। 11 साल पहले जब यह अल्फाज लॉर्ड स्वराज पाॅल ने जालंधर में कहे थे तो उनकी आंखें नम थीं। फिर अपनी नई पीढ़ी को वह घर दिखाया जहां उन्होंने जन्म लिया था और जहां शिक्षा ग्रहण की थी।
यूके में सबसे बड़े फैमिली-रन-बिजनेस के चीफ लॉर्ड स्वराज पॉल के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे कि वे जवाहरलाल नेहरू के प्रशंसक रहे हैं। इंदिरा गांधी की उन्होंने जीवनी लिखी है। जालंधर में जन्मे स्वराज पॉल ने 1949 से 53 तक एमआईटी बोस्टन में पढ़ाई की। फिर तेरह साल देश में एपीजे ग्रुप को बढ़ाने में भाइयों के साथ काम किया। 1966 में दो साल की बेटी अंबिका को ब्लड कैंसर हुआ। बाकी बच्चों को कोलकाता में छोड़कर अंबिका को स्वराज और अरुणा लंदन ले गए। वहीं दो साल के इलाज के बाद अंबिका की मौत हो गई। यूके में वह बस गए, बिजनेस साम्राज्य खड़ा किया।
पीटीयू में जब लॉर्ड पॉल ने बेटी अंबिका के बुत का अनावरण किया तो उन्होंने पोता-पोती को बुआ अंबिका के आगे हाथ जोड़ने को कहा। वह बच्चों को अंबिका के स्मृति पट्ट पर लेकर गए और उन्हें पढ़ने के लिए कहा। बेटे अंगद, बेटी अंजलि और बहू मिशेल से भी ज्यादा वे अपने पोते-पोती को खुद से जुड़ी हर जगह दिखाने को उत्सुक दिखाई दिए थे।
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उद्योगपति, समाजसेवी और राजनीतिज्ञ
पॉल दिग्गज ब्रिटिशर उद्योगपति, समाजसेवी और राजनीतिज्ञ थे। 1996 में वे लाइफ पीयर बने और सिटी ऑफ वेस्टमिनिस्टर में बैरन पॉल की उपाधि के साथ मालेबन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठे। 2008 में उन्हें लॉर्ड्स का उप प्रवक्ता नियुक्त किया गया। लाॅर्ड पाॅल दोआबा कॉलेज से 1949 में ग्रेजुएट हुए थे। वे जालंधर में अपने काॅलेज व क्लासरूम को देखने पहुंचे तो उन्होंने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। उनका भाषण आज भी कॉलेज में गूंजता है कि ग्रेजुएट होने पर चेहरे पर जो मुस्कान आती है वो ताउम्र कायम रहती है। उन्होंने भाई को याद करते हुए कहा था कि डॉ. सत्या पॉल मेरे बड़े भाई ही नहीं माता-पिता भी थे। मैं 7 साल का था तो मां चली गईं, जब 13 को हुआ तो पिता। उन्होंने ही मुझे बेटे की तरह पाला। भाई की बेटी सुषमा बरलिया आज भी एपीजे ग्रुप की डायरेक्टर हैं।
पद्म भूषण से सम्मानित
स्वराज पॉल को यूके, यूएसए, भारत, रूस और स्विट्जरलैंड विश्वविद्यालयों से 15 मानद डिग्री सहित कई बार सम्मानित किया गया था। 1983 में, भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा, भारतीय मर्चेंट चैंबर ने उन्हें भारत गौरव से सम्मानित किया। ब्लैक कंट्री एशियन बिजनेस एसोसिएशन की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया था। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कहा कि हम सभी आज की दुनिया में ब्रांडों के महत्व को जानते हैं और एक व्यक्ति जिसने वास्तव में ब्रांड इंडिया में बदलाव किया है, वह पीएम मोदी हैं। मोदी ने हमारे देश की छवि को ऊंचा किया है।
भूकंप पीड़ितों
के लिए दान किए थे बीस लाख
लॉर्ड पॉल ब्रिटेन के 38वें सबसे अमीर व्यक्ति थे। हालांकि वे लंदन में आम लोगों की तरह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते थे। मध्य लंदन के पोर्टलैंड प्लेस में उनके एक दर्जन फ्लैट हैं। अक्तूबर 2005 में जम्मू और कश्मीर के भूकंप पीड़ितों के लिए बीस लाख रुपये भी दान किए थे। पॉल ने ग्लोबल इंडियन एक्सीलेंस समिट से भारत-यूके शैक्षिक संबंधों को भी बढ़ावा दिया। 1978 में, उन्हें ब्रिटिश महारानी से नाइटहुड की उपाधि मिली। 1998 से 2010 तक उन्हें सरकार द्वारा ब्रिटिश व्यापार के लिए राजदूत नियुक्त किया गया था। 2000 से 2005 तक भारत-ब्रिटिश गोलमेज सम्मेलन के सह-अध्यक्ष भी रहे।
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सुरिंदर पाल
जालंधर। मेरी उम्र 83 साल हो चुकी है। पता नहीं दोबारा अपने देश आ भी सकूं या नहीं, इसलिए अपने परिवार खासकर पोते-पोती आर्ची और अमाल्या को उनकी जड़ें दिखाने लाया हूं। 11 साल पहले जब यह अल्फाज लॉर्ड स्वराज पाॅल ने जालंधर में कहे थे तो उनकी आंखें नम थीं। फिर अपनी नई पीढ़ी को वह घर दिखाया जहां उन्होंने जन्म लिया था और जहां शिक्षा ग्रहण की थी।
यूके में सबसे बड़े फैमिली-रन-बिजनेस के चीफ लॉर्ड स्वराज पॉल के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे कि वे जवाहरलाल नेहरू के प्रशंसक रहे हैं। इंदिरा गांधी की उन्होंने जीवनी लिखी है। जालंधर में जन्मे स्वराज पॉल ने 1949 से 53 तक एमआईटी बोस्टन में पढ़ाई की। फिर तेरह साल देश में एपीजे ग्रुप को बढ़ाने में भाइयों के साथ काम किया। 1966 में दो साल की बेटी अंबिका को ब्लड कैंसर हुआ। बाकी बच्चों को कोलकाता में छोड़कर अंबिका को स्वराज और अरुणा लंदन ले गए। वहीं दो साल के इलाज के बाद अंबिका की मौत हो गई। यूके में वह बस गए, बिजनेस साम्राज्य खड़ा किया।
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पीटीयू में जब लॉर्ड पॉल ने बेटी अंबिका के बुत का अनावरण किया तो उन्होंने पोता-पोती को बुआ अंबिका के आगे हाथ जोड़ने को कहा। वह बच्चों को अंबिका के स्मृति पट्ट पर लेकर गए और उन्हें पढ़ने के लिए कहा। बेटे अंगद, बेटी अंजलि और बहू मिशेल से भी ज्यादा वे अपने पोते-पोती को खुद से जुड़ी हर जगह दिखाने को उत्सुक दिखाई दिए थे।
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उद्योगपति, समाजसेवी और राजनीतिज्ञ
पॉल दिग्गज ब्रिटिशर उद्योगपति, समाजसेवी और राजनीतिज्ञ थे। 1996 में वे लाइफ पीयर बने और सिटी ऑफ वेस्टमिनिस्टर में बैरन पॉल की उपाधि के साथ मालेबन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठे। 2008 में उन्हें लॉर्ड्स का उप प्रवक्ता नियुक्त किया गया। लाॅर्ड पाॅल दोआबा कॉलेज से 1949 में ग्रेजुएट हुए थे। वे जालंधर में अपने काॅलेज व क्लासरूम को देखने पहुंचे तो उन्होंने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। उनका भाषण आज भी कॉलेज में गूंजता है कि ग्रेजुएट होने पर चेहरे पर जो मुस्कान आती है वो ताउम्र कायम रहती है। उन्होंने भाई को याद करते हुए कहा था कि डॉ. सत्या पॉल मेरे बड़े भाई ही नहीं माता-पिता भी थे। मैं 7 साल का था तो मां चली गईं, जब 13 को हुआ तो पिता। उन्होंने ही मुझे बेटे की तरह पाला। भाई की बेटी सुषमा बरलिया आज भी एपीजे ग्रुप की डायरेक्टर हैं।
पद्म भूषण से सम्मानित
स्वराज पॉल को यूके, यूएसए, भारत, रूस और स्विट्जरलैंड विश्वविद्यालयों से 15 मानद डिग्री सहित कई बार सम्मानित किया गया था। 1983 में, भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा, भारतीय मर्चेंट चैंबर ने उन्हें भारत गौरव से सम्मानित किया। ब्लैक कंट्री एशियन बिजनेस एसोसिएशन की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया था। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कहा कि हम सभी आज की दुनिया में ब्रांडों के महत्व को जानते हैं और एक व्यक्ति जिसने वास्तव में ब्रांड इंडिया में बदलाव किया है, वह पीएम मोदी हैं। मोदी ने हमारे देश की छवि को ऊंचा किया है।
भूकंप पीड़ितों
के लिए दान किए थे बीस लाख
लॉर्ड पॉल ब्रिटेन के 38वें सबसे अमीर व्यक्ति थे। हालांकि वे लंदन में आम लोगों की तरह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते थे। मध्य लंदन के पोर्टलैंड प्लेस में उनके एक दर्जन फ्लैट हैं। अक्तूबर 2005 में जम्मू और कश्मीर के भूकंप पीड़ितों के लिए बीस लाख रुपये भी दान किए थे। पॉल ने ग्लोबल इंडियन एक्सीलेंस समिट से भारत-यूके शैक्षिक संबंधों को भी बढ़ावा दिया। 1978 में, उन्हें ब्रिटिश महारानी से नाइटहुड की उपाधि मिली। 1998 से 2010 तक उन्हें सरकार द्वारा ब्रिटिश व्यापार के लिए राजदूत नियुक्त किया गया था। 2000 से 2005 तक भारत-ब्रिटिश गोलमेज सम्मेलन के सह-अध्यक्ष भी रहे।