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Jalandhar News: लुधियाना उपचुनाव के कारण रुक गए थे रूपाणी

Thu, 12 Jun 2025 08:41 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Jun 2025 08:41 PM IST
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Rupani had stayed back due to Ludhiana by-election
-पहले 1 जून को जाना था बेटे के पास लंदन, बेटी व पत्नी पहले ही चले गए थे
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-जेपी नड्डा के निर्देश पर करीब दस दिन से पंजाब में ही कार्यकर्ताओं के साथ कर रहे थे बैठकें

-लुधियाना से भाजपा प्रत्याशी जीवन गुप्ता की जीत के लिए चुनावी रथ के सारथी बन लगा रहे थे जोर



-भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजेश गोरा पठेला ने भावुक होकर उनके साथ बिताए पलों को किया याद

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जगदीश जोशी

मुक्तसर। कहते हैं कुदरत के लिखे को कोई नहीं बदल सकता। किस्मत का खेल और मौत की चाल जब चलती है, तो उसे पलटना असंभव होता है। ऐसा ही कुछ हुआ गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के साथ।



अहमदाबाद एयरपोर्ट पर फ्लाइट क्रैश में उनकी मौत हो गई। पहले वे इस फ्लाइट से लंदन नहीं जाने वाले थे। उन्होंने 1 जून को लंदन जाने का प्रोग्राम बनाया था, लेकिन पंजाब प्रभारी होने के चलते और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से लुधियाना उपचुनाव की जिम्मेदारी देने के कारण वे कुछ दिन के लिए पंजाब में ही रुक गए थे। उनकी पत्नी व बेटी कुछ समय पहले ही बेटे के पास लंदन चले गए थे। किसी ने सोचा न था कि वे कभी अपने परिवार से नहीं मिल पाएंगे। अगर वे 1 जून को ही चले जाते तो अहमदाबाद हादसे के पीड़ितों में उनका नाम न होता। यह कहना है कि विजय रूपाणी के बेहद करीबी रहे भाजपा मुक्तसर के जिला अध्यक्ष राजेश गोरा पठेला का। गोरा पठेला पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के साथ बिताए पलों को याद कर भावुक हो उठे।
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उन्होंने अमर उजाला के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने हमेशा से ही परिवार से ज्यादा अपने काम को तवज्जो दी और पार्टी को तरजीह दी। इस कारण वे पिछले दस दिन से पंजाब में ही विभिन्न जगह कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे थे और लुधियाना उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी जीवन गुप्ता की जीत के लिए चुनावी रथ के सारथी बन जोर लगा रहे थे।
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देर रात भी उठा लेते थे फोन



गोरा पठेला ने बताया कि वे बेहद साधारण व्यक्तित्व के मालिक थे। जमीनी स्तर से उठकर वे मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। बिल्कुल डाउन टू अर्थ इंसान थे और हर कार्यकर्ता की बात सुनते थे। हर कार्यकर्ता की छोटी से छोटी आशंका का समाधान करते थे और कार्यकर्ताओं के साथ जुड़े इंसान थे। कई बार तो देर रात को भी उन्हें फोन कर लेते थे, तो भी वे फोन उठाते थे और मजाकिया लहजे में कहते थे कि इतनी रात गए फोन किया है... क्या इमरजेंसी थी।


फोन पर लेते रहे बैठकों का रिव्यू



गोरा पठेला ने बताया कि लुधियाना में अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने मुक्तसर के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी। इसमें करीब डेढ़ घंटा वे उनके साथ थे। उनकी मौत की खबर पर यकीन नहीं हो रहा है। यही नहीं इस बैठक के बाद भी फोन पर उनकी आपस में बात हुई थी, तो उन्होंने फोन पर भी अगले दिन व आने वाली बैठकों का रिव्यू लिया था। गौरतलब है कि गिद्दड़बाहा उप चुनाव 2024 में वह मनप्रीत सिंह बादल के हक में गिद्दड़बाहा चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए भी एक बार मुक्तसर जिले में आए थे। -संवाद
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