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सफाई कर्मियों के समर्थन में एक घंटे चक्का जाम
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
Updated Wed, 11 May 2016 07:15 PM IST
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चक्का जाम
- फोटो : demo
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बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी व गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल से 80 अस्थायी सफाई कर्मियों को नौकरी से निकालने के खिलाफ पेट्रोल की बोतलें लेकर सिविल अस्पताल की टंकी पर चढ़े तीनों सफाई कर्मियों मंगलवार को लगातार पांचवें दिन भी डटे रहे।
मंगलवार को उनकी मांग को हल करवाने के लिए जिला प्रशासन ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ मीटिंग करवाने का भरोसा दिया था, लेकिन प्रशासन मीटिंग करवाने में विफल रहा जिसके विरोध में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने शहर में रोष मार्च निकाला और करीब एक घंटे तक बस स्टैंड के बाहर चक्का जाम रखा।
इस मौके पर मुलाजिम संघर्ष कमेटी के सरपरस्त अवतार सिंह गिल, प्रधान सतपाल पोल, पंजाब सबार्डिनेट सर्विसेस फेडरेशन के जिला प्रधान बलजीत सिंह बराड़, उपाध्यक्ष जतिंदर कुमार ने कहा कि बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी व मेडिकल अस्पताल में पिछले 8 साल से कार्यरत 189 सफाई कर्मियों में से 80 कर्मियों को चार माह पहले नौकरी से निकाल दिया गया था।
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उसी समय से यह कर्मी लगातार रोष धरना दे रहे हैं, लेकिन न तो यूनिवर्सिटी प्रशासन कोई सुनवाई कर रहा है और न ही जिला प्रशासन रोजी रोटी को मोहताज हो चुके परिवारों की सुध लेने को तैयार है। टंकी पर चढ़ने के पांच दिन बीतने पर भी प्रशासनिक व यूनिवर्सिटी अधिकारी उन्हें झूठे आश्वासन दे रहे हैं। दो दिन पहले एसडीएम ने कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत करते हुए मंगलवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन से मीटिंग करवाने का भरोसा दिया था लेकिन मीटिंग नहीं करवाई गई।
उधर टंकी पर चढ़े तीनों सफाई कर्मियों ने स्व घोषणा पत्र के माध्यम से एलान किया है कि यदि उनका कोई जानी नुकसान होता है तो इसके लिए यूनिवर्सिटी अधिकारी जिम्मेवार होंगे। चक्का जाम के दौरान पीआरटीसी कर्मचारी यूनियन ने भी बसों का आवागमन रोके रखा। अब इस मामले को लेकर जिला प्रशासन ने 11 मई को सुबह 11 बजे यूनिवर्सिटी प्रशासन व कर्मचारी संगठनों की संयुक्त मीटिंग बुलाई है जिसमें इन कर्मियों का मसला हल करवाने का प्रयास किया जाएगा।
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मंगलवार को उनकी मांग को हल करवाने के लिए जिला प्रशासन ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ मीटिंग करवाने का भरोसा दिया था, लेकिन प्रशासन मीटिंग करवाने में विफल रहा जिसके विरोध में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने शहर में रोष मार्च निकाला और करीब एक घंटे तक बस स्टैंड के बाहर चक्का जाम रखा।
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इस मौके पर मुलाजिम संघर्ष कमेटी के सरपरस्त अवतार सिंह गिल, प्रधान सतपाल पोल, पंजाब सबार्डिनेट सर्विसेस फेडरेशन के जिला प्रधान बलजीत सिंह बराड़, उपाध्यक्ष जतिंदर कुमार ने कहा कि बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी व मेडिकल अस्पताल में पिछले 8 साल से कार्यरत 189 सफाई कर्मियों में से 80 कर्मियों को चार माह पहले नौकरी से निकाल दिया गया था।
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उसी समय से यह कर्मी लगातार रोष धरना दे रहे हैं, लेकिन न तो यूनिवर्सिटी प्रशासन कोई सुनवाई कर रहा है और न ही जिला प्रशासन रोजी रोटी को मोहताज हो चुके परिवारों की सुध लेने को तैयार है। टंकी पर चढ़ने के पांच दिन बीतने पर भी प्रशासनिक व यूनिवर्सिटी अधिकारी उन्हें झूठे आश्वासन दे रहे हैं। दो दिन पहले एसडीएम ने कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत करते हुए मंगलवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन से मीटिंग करवाने का भरोसा दिया था लेकिन मीटिंग नहीं करवाई गई।
उधर टंकी पर चढ़े तीनों सफाई कर्मियों ने स्व घोषणा पत्र के माध्यम से एलान किया है कि यदि उनका कोई जानी नुकसान होता है तो इसके लिए यूनिवर्सिटी अधिकारी जिम्मेवार होंगे। चक्का जाम के दौरान पीआरटीसी कर्मचारी यूनियन ने भी बसों का आवागमन रोके रखा। अब इस मामले को लेकर जिला प्रशासन ने 11 मई को सुबह 11 बजे यूनिवर्सिटी प्रशासन व कर्मचारी संगठनों की संयुक्त मीटिंग बुलाई है जिसमें इन कर्मियों का मसला हल करवाने का प्रयास किया जाएगा।