जालंधर: प्रियंका गांधी तक पहुंची दिव्यांग खिलाड़ी मल्लिका हांडा की गुहार, चन्नी सरकार ने दी नौकरी और 21 लाख रुपये
एआईसीसी की महासचिव प्रियंका गांधी ने अलका लांबा की ड्यूटी लगाकर पंजाब भेजा। उन्होंने मल्लिका हांडा के परिवार वालों की मुलाकात सीएम चरणजीत चन्नी से करवाई।
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ट्विटर पर वीडियो शेयर कर पंजाब सरकार पर नौकरी नहीं देने का आरोप लगाने वाली पंजाब की दिव्यांग खिलाड़ी मल्लिका हांडा को न्याय मिल गया है। प्रियंका गांधी के पास मामला पहुंचते ही चन्नी सरकार सक्रिय हुई और चुनाव आचार संहिता से पहले मल्लिका को नौकरी और 21 लाख रुपये की आर्थिक मदद का आदेश जारी हो गया।
दो जनवरी की सुबह मल्लिका ने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर परगट सिंह पर नौकरी नहीं देने के आरोप लगाए थे। जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। मल्लिका के प्रति सहानुभूति पैदा होने लगी। मल्लिका ने कहा कि सरकार ने उसे बेवकूफ बनाया और उसके कई साल खराब कर दिए। इसके बाद पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, शिअद प्रधान सुखबीर बादल और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने उसका समर्थन किया था।
अलका लांबा ने करवाई थी सीएम से मुलाकात
मामला एआईसीसी की महासचिव प्रियंका गांधी के पास पहुंचा तो उन्होंने अलका लांबा की ड्यूटी लगाकर पंजाब भेजा। उन्होंने मल्लिका हांडा के परिवार वालों की मुलाकात सीएम चरणजीत चन्नी से करवाई। सीएम चन्नी ने मल्लिका को कोच की नौकरी के साथ 21 लाख रुपये देने के आदेश लिखित तौर पर जारी कर दिए हैं। मल्लिका की मां रेणु ने बताया कि उनकी मुलाकात अलका लांबा से हुई जिन्होंने मल्लिका को प्रोत्साहित किया। इस दौरान सीएम चन्नी और डायरेक्टर स्पोर्ट्स मौजूद रहे। उन्हें आश्वासन दिया गया कि मल्लिका को कोच की नौकरी दी जाएगी जिससे मूक बधिर बच्चों को ट्रेनिंग दी जा सके।
अवॉर्ड के रूप में 21 लाख रुपये देगी पंजाब सरकार
रेणु हांडा ने बताया कि पूर्व खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी व मौजूदा मंत्री परगट सिंह के आश्वासन के बाद भी उनकी बेटी को नकद पुरस्कार या नौकरी नहीं दी गई। मीडिया के माध्यम से प्रियंका गांधी को मल्लिका के बारे में पता चला तो उन्होंने अलका लांबा को परिवार से संपर्क करने के लिए कहा। उसके बाद डायरेक्टर स्पोर्ट्स ने उन्हें चंडीगढ़ बुलाया।
अलका लांबा ने मुख्यमंत्री चन्नी से उनकी मुलाकात करवाई और नकद पुरस्कार व नौकरी देने के पत्र पर हस्ताक्षर करवाए। मल्लिका हांडा ने कहा कि वह छह करोड़ का पुरस्कार पाने की हकदार हैं पर पंजाब सरकार ने उन्हें मात्र 21 लाख रुपये देने की घोषणा की है।