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Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Punjab Assembly Election: Aam Aadmi Party will face tough fight in Majha and Doaba 

पंजाब विधानसभा चुनाव: माझा और दोआबा में आसान नहीं आम आदमी पार्टी की राह, भगवंत मान सिर्फ मालवा में हिट

Thu, 20 Jan 2022 04:32 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 20 Jan 2022 04:32 PM IST
सार

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 24 फीसदी वोट शेयर के साथ पंजाब से चार सांसदों को लोकसभा भेजने वाली आम आदमी पार्टी को वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पंजाब की सत्ता के करीब माना जा रहा था। लेकिन 23.72 फीसदी वोट हासिल करने वाली आप 20 विधायकों के साथ विपक्ष की भूमिका में रह गई।

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Punjab Assembly Election: Aam Aadmi Party will face tough fight in Majha and Doaba 
भगवंत मान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवंत मान को आम आदमी पार्टी ने पंजाब के सीएम का चेहरा घोषित कर दिल्ली टीम का ठप्पा हटाने की कोशिश की है पर मान का गणित मालवा में हिट है। माझा व दोआबा में आम आदमी पार्टी के पास ऐसा सारथी नहीं है जो पार्टी को बहुमत दिला सके। आम आदमी पार्टी के लिए दोआबा व माझा की फतेह के बिना रास्ता आसान नहीं है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को माझा से एक भी सीट नहीं मिली थी जबकि दोआबा से दो सीट पर गुजारा करना पड़ा था, जिसमें सुखपाल खैरा अब कांग्रेस में आ चुके हैं और भुल्लथ से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। 

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दूसरा, दोआबा एनआरआई गढ़ माना जाता है और 2017 के चुनावों में एनआरआई ने आम आदमी पार्टी के लिए पूरी ताकत झोकी थी पर हिंदू वोटरों के खिसकने के कारण आप के सपने चूर हो गए और पार्टी को महज दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। माझा में अकाली दल की तरफ से बिक्रम सिंह मजीठिया, विरसा सिंह वल्टोहा, बह्रमपुरा, अजनाला परिवार के अलावा सुखबीर बादल के जीजा आदेश प्रताप कैरों स्तंभ की तरह खड़े हैं। कांग्रेस के पास डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पीपीसीसी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू, डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त राजिंदर बाजवा, अश्वनी सेखड़ी के अलावा सुखबिंदर सिंह सुखसरकारिया हैं। वहीं भाजपा की तरफ से अश्वनी शर्मा खुद पठानकोट से हैं और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ के अलावा पूर्व प्रधान श्वेत मलिक, सुरजीत सिंह ज्याणी माझा से हैं। 

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माझा में कोई कद्दावर नेता नहीं

आम आदमी पार्टी के पास ऐसा कोई कद्दावर और दिग्गज नेता नहीं है जो आप के ग्राफ व उम्मीदवारों के हक में प्रचार कर सके। माझा में वैसे भी पंथक मुद्दे काफी हावी रहते हैं। प्रो दविंदरपाल सिंह की सजा माफी की अर्जी पर आम आदमी पार्टी पंथक हलकों में बुरी तरह से बैकफुट पर आ चुकी है। यह मामला पंजाब के पंथक हलकों में गर्माता जा रहा है। वहीं दोआबा में 23 विधानसभा सीट हैं। इन सीटों पर दलितों का 42 फीसदी वोट है। अकाली दल जहां बसपा का हाथ पकड़कर साथ साथ चल रहा है। कांग्रेस ने चन्नी को सीएम बनाकर दलित कार्ड खेला है। 

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बड़े दलित नेता की भी दरकार

अकाली दल के पास दलितों की पहली कतार के कई नेता हैं, जिनके सहारे वह दोआबा पर अपना परचम फहराने का ख्वाब सजों कर बैठे हैं। आदमपुर से पवन कुमार टीनू, नवांशहर से सुखविंदर सुक्खी, फिल्लौर से बलदेव खैरा समेत कई नेता हैं। अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल को इस बार बसपा का सहारा है। अकाली दल ने जनरल सीट से वाल्मीकि भाईचारे के तेजतर्रार नेता चंदन ग्रेवाल को टिकट देकर मैदान में उतारा है। वह निगम की सफाई यूनियन के प्रधान भी हैं और वाल्मीकि समाज में उनका खासा जनाधार है। 


भाजपा ने दलित नेता सोमप्रकाश को केंद्रीय राज्यमंत्री बनाया है। जालंधर से संबंधित विजय सांपला को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति का चेयरमैन नियुक्त कर रखा है। पार्टी के पास राजेश बाघा महासचिव हैं, जो रविदासिया बिरादरी के हैं। इसके अलावा जालंधर के रहने वाले सांसद हंसराज हंस वाल्मीकि समाज के नेता हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के पास दोआबा में कोई दलित कद्दावर नेता नहीं हैं, जो तमाम पार्टियों के दिग्गजों को टक्कर दे सके या फिर आप का दोआबा में सारथी बन सके। पार्टी दोआबा में पहले ही वालंटियर का रोष झेल रही हैं और जमीनी स्तर पर काफी विद्रोह चल रहा है। आप के पास दलित नेता हरपाल चीमा हैं, जो नेता प्रतिपक्ष हैं। वह मालवा से हैं और दोआबा में उनका जनाधार नहीं है। पार्टी ने दोआबा में जिन दलित नेताओं को टिकट दी हैं, वह नए चेहरे हैं। जिसमें करतारपुर से पू्र्व पीपीसी अधिकारी बलकार सिंह और चंद दिन पहले भाजपा को अलविदा कहकर आप की टिकट लेने वाले जालंधर वेस्ट से शीतल अंगुराल शामिल हैं। 

दिल्ली की लीडरशिप ने खड़ा नहीं होने दिया किसी को-डॉ. संजीव शर्मा

आम आदमी पार्टी की टिकट पर 2017 में चुनाव लड़ने वाले पार्टी के जालंधर के पूर्व प्रधान डॉ. संजीव शर्मा का कहना है कि यह पंजाब है, दिल्ली नहीं है। यहां लोगों के बीच भाईचारा है सांझ है और दुख दर्द के साझीदार हैं पर केजरीवाल की टीम दिल्ली ने यहां पर सब कुछ बांट दिया है। पार्टी की दूसरी कतार की लीडरशिप को दोआबा व माझा में खड़ा ही नहीं होने दिया है, सब कुछ दिल्ली के लोग अपनी मनमर्जी से चलाते रहे हैं। पार्टी में दमदार नेता थे, सुच्चा सिंह छोटेपुर थे जिन्होंने पार्टी को सींचा था और एक एक ईंट लगाई थी लेकिन उनको दिल्ली वालों ने कैसे निकाला, पंजाबी भूले नहीं है। सुखपाल खैरा पार्टी के दमदार नेता थे, उनके साथ दिल्ली टीम ने क्या किया ?  

2019 में आप का वोट शेयर 7 फीसदी के आसपास आ गया, इसका जिम्मेदार कौन है ? साफ है कि दिल्ली की टीम अपने हर फैसले को पंजाब में थोप रही है। दोआबा व माझा में किसी नेता को आगे ही नहीं आने दिया गया। हमारे पास सुखपाल खैरा दोआबा से नेता था लेकिन खत्म कर दिया गया। ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव शर्मा का कहना है कि मैंने भगवंत मान से कई बार कहा था कि यह दिल्ली के नेता हमें पंजाब में आगे नहीं आने देंगे। सबमें दिल्ली के नेता राघव चड्डा और उनकी टीम मनमर्जी से कर रही है। यह आप को पंजाब में खत्म कर देंगे पर किसी ने नहीं सुनी। इसमें कोई शंका नहीं कि दोआबा व माझा में आप के पास दमदार चेहरे नहीं हैं, जो अन्य पार्टियों का मुकाबला कर सकें। सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी जैसे नेता क्यों चले गए ? टिकट मिलने के बावजूद आप के आशू बंगड़ पार्टी छोड़कर चले गए और कह गए कि दिल्ली के नेता राघव चड्डा उनको प्रताड़ित कर रहे हैं।

2014 में चार सांसद थे, अब केवल एक..  

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 24 फीसदी वोट शेयर के साथ पंजाब से चार सांसदों को लोकसभा भेजने वाली आम आदमी पार्टी को वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पंजाब की सत्ता के करीब माना जा रहा था। लेकिन 23.72 फीसदी वोट हासिल करने वाली आप 20 विधायकों के साथ विपक्ष की भूमिका में रह गई। चुनाव से ठीक पहले भगवंत सिंह मान, सुखपाल खैरा और सुच्चा सिंह छोटेपुर गुट की मुख्यमंत्री पद को लेकर अपनी दावेदारी पेश करना पार्टी को भारी पड़ा। पार्टी से टूटते नेताओं के चलते 2019 के लोकसभा चुनाव में आप का वोट शेयर गिरकर 7.46 फीसदी रह गया और सांसद चार से घटकर एक रह गया। अकेले भगवंत मान ही जीत पाए। लेकिन भगवंत मान ने अपना दायरा मालवा तक ही समेटकर रखा है। 

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