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Jalandhar News: दहेज उत्पीड़न मामले में सास-ससुर बरी, आठ साल बाद मिली राहत
Sun, 23 Aug 2026 05:07 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
Updated Sun, 23 Aug 2026 05:07 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बठिंडा। दहेज उत्पीड़न और अमानत में खयानत के करीब आठ साल पुराने मामले में जिला अदालत ने आरोपी सास-ससुर पवन कुमार गोयल और वीनू गोयल को बरी कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रभजोत भट्टी की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
यह मामला शहर निवासी रूपाली गुप्ता की शिकायत पर दर्ज हुआ था। रूपाली ने 28 सितंबर 2017 को कनाडा में रह रहे त्रिलोचन गोयल से शादी की थी। उसने अपने सास-ससुर पर दहेज मांगने, प्रताड़ित करने और स्त्रीधन अपने कब्जे में रखने का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर 21 मार्च 2018 को प्राथमिकी संख्या नौ दर्ज की गई थी। पुलिस ने सास-ससुर को गिरफ्तार किया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील सूर्यकांत सिंगला ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों पर सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि दहेज मांग और प्रताड़ना की घटनाओं के संबंध में शिकायतकर्ता की गवाही में स्पष्ट तारीख, समय और स्थान का अभाव था। अदालत ने यह भी गौर किया कि 17 अक्तूबर 2017 को रूपाली अपने पति के साथ बठिंडा के डीसी कार्यालय में शादी के पंजीकरण के लिए गई थी, लेकिन उस समय उसने कोई शिकायत नहीं की।
साक्ष्यों की कमी बनी बरी होने का आधार
अदालत ने शादी में 40 लाख रुपये खर्च और 8 लाख रुपये नकद देने के दावे को दस्तावेजी साक्ष्य से साबित नहीं पाया। पेश किए गए कुछ बिलों में विसंगतियां थीं, जिनमें एक बिल शादी से 10 साल पहले का था। बैंक रिकॉर्ड में बड़ी नकद निकासी का कोई प्रमाण नहीं मिला। स्काइप पर बातचीत और शादी की तस्वीरों जैसे डिजिटल साक्ष्य के लिए आवश्यक 65बी प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया। धारा 406 के तहत स्त्रीधन सौंपने का आरोप भी साबित नहीं हो सका।
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बठिंडा। दहेज उत्पीड़न और अमानत में खयानत के करीब आठ साल पुराने मामले में जिला अदालत ने आरोपी सास-ससुर पवन कुमार गोयल और वीनू गोयल को बरी कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रभजोत भट्टी की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
यह मामला शहर निवासी रूपाली गुप्ता की शिकायत पर दर्ज हुआ था। रूपाली ने 28 सितंबर 2017 को कनाडा में रह रहे त्रिलोचन गोयल से शादी की थी। उसने अपने सास-ससुर पर दहेज मांगने, प्रताड़ित करने और स्त्रीधन अपने कब्जे में रखने का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर 21 मार्च 2018 को प्राथमिकी संख्या नौ दर्ज की गई थी। पुलिस ने सास-ससुर को गिरफ्तार किया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील सूर्यकांत सिंगला ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों पर सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि दहेज मांग और प्रताड़ना की घटनाओं के संबंध में शिकायतकर्ता की गवाही में स्पष्ट तारीख, समय और स्थान का अभाव था। अदालत ने यह भी गौर किया कि 17 अक्तूबर 2017 को रूपाली अपने पति के साथ बठिंडा के डीसी कार्यालय में शादी के पंजीकरण के लिए गई थी, लेकिन उस समय उसने कोई शिकायत नहीं की।
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साक्ष्यों की कमी बनी बरी होने का आधार
अदालत ने शादी में 40 लाख रुपये खर्च और 8 लाख रुपये नकद देने के दावे को दस्तावेजी साक्ष्य से साबित नहीं पाया। पेश किए गए कुछ बिलों में विसंगतियां थीं, जिनमें एक बिल शादी से 10 साल पहले का था। बैंक रिकॉर्ड में बड़ी नकद निकासी का कोई प्रमाण नहीं मिला। स्काइप पर बातचीत और शादी की तस्वीरों जैसे डिजिटल साक्ष्य के लिए आवश्यक 65बी प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया। धारा 406 के तहत स्त्रीधन सौंपने का आरोप भी साबित नहीं हो सका।
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