फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Local people are leaving no stone unturned to take advantage of the helplessness of the devotees

अमरनाथ यात्रियों ने सुनाई दास्तां : श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठाने में कसर नहीं छोड़ रहे स्थानीय लोग

Tue, 12 Jul 2022 10:51 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Tue, 12 Jul 2022 10:51 PM IST
विज्ञापन
Local people are leaving no stone unturned to take advantage of the helplessness of the devotees
पठानकोट। बाबा अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने के बाद की त्रासदी को याद कर आज भी रूह कांप जाती है। वहीं, स्थानीय निवासी श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। जम्मू-कश्मीर प्रशासन का प्रबंधन वहां फेल साबित हो रहा है, लेकिन सेना और एनडीआरएफ ने सैकड़ों लोगों की जान बचाई हैं। यह कहना है अमरनाथ यात्रा से पठानकोट पहुंचे श्रद्धालुओं का।
विज्ञापन

पठानकोट-जालंधर नेशनल हाइवे पर भंडारे में भोजन के लिए रुके यात्रियों ने अमरनाथ त्रासदी के डरावने मंजर को बयां किया। लुधियाना से बालटाल में लंगर लगाने गए नीलकंठ सेवा समिति का सारा सामान त्रासदी में तहस नहस हो गया। बाकी बचा सामान लेकर वह वापस लुधियाना लौट रहे थे। पठानकोट पहुंचने पर उनका शिवसेवक वेलफेयर सोसायटी चेयरमैन सतीश महाजन ने स्वागत किया और जत्थे के सकुशल वापस लौटने पर खुशी जताई।
विज्ञापन

पवित्र गुफा के पास वाला भंडारा हुआ तहस नहस : नीरज
नीलकंठ सेवा समिति सदस्य नीरज वशिष्ठ ने बताया कि वह लुधियाना से 3 बसों का काफिला लेकर निकले थे। एक भंडारा बालटाल और दूसरा पवित्र गुफा के नजदीक लगाया गया था। नीरज ने बताया कि त्रासदी वाले दिन काफी यात्री बालटाल कैंप में वापस आ चुके थे। लेकिन, हादसे के बाद 50 के करीब यात्री गुफा के पास थे। बादल फटने के बाद 40 के करीब यात्री गुम हो गए। किसी से संपर्क नहीं हो पा रहा था, संपर्क साधन ठप थे। अगली सुबह 14 को छोड़ बाकी यात्री मिल गए। दोपहर होने तक 2 के अलावा बाकी मिल गए। नीरज ने बताया कि किसी अनहोनी की आशंका के बाद उन्होंने मेडिकल सेंटरों में पड़े शवों और घायलों में उन्हें ढूंढा। नहीं मिलने पर एनडीआरएफ को सूचना दी गई। अगली सुबह दोनों मां-बेटा उन्हें मिले और उन्हें बालटाल लाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

जोड़ा घर में जूते लेने गईं तो फट पड़ा आसमान : श्रद्धालु
24 घंटे तक साथियों से बिछड़ी रही महिला श्रद्धालु ने बताया कि वह अपने बेटे के साथ गुफा में दर्शन कर जोड़ा घर में जूते लेने गई तो तेज बरसात शुरू हुई। उसके बाद तो मानों आसमान फट पड़ा। बेटे जय को चोट आई थी तो पट्टी करवाने गुफा के पास ही मेडिकल कैंप में चले गए। वहां जो देखा वह कभी भूल नहीं पाएंगे। बादल फटने से मलबा नीचे आ रहा था। सेना ने उन्हें किसी तरह शेल्टर में पहुंचाया, जिसके बाद वह अगले दिन जत्थे से मिल पाईं।

यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठा रहे स्थानीय निवासी
एक अन्य यात्री ने बताया कि अभी भी मलबे में कई यात्री दबे हैं। हालात बदतर हैं। स्थानीय निवासी श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। पानी की एक बोतल 120 रुपये में मिल रही है। 3 हजार के बजाय घोड़े वाले 8-10 हजार ले रहे हैं। हर चीज का भाव दोगुना या तिगुना कर दिया गया है। एनडीआरएफ और सेना की बदौलत सैकड़ों लोगों की जान बच पाई है। प्रशासन का काम सिर्फ सरकारी पर्चियां काटने तक सीमित है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed