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कनाडा में मनेगा जसवंत खालड़ा डे: मानवाधिकारों के लिए जान गंवाई थी, छह सितंबर को मनाया जाएगा

Sat, 06 Sep 2025 04:44 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 06 Sep 2025 04:44 PM IST
सार

ब्रिटिश कोलंबिया की सरकार ने अपने पत्र में कहा है कि जसवंत सिंह खालड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मानवाधिकार रक्षक थे और उनकी स्मृति को सदा जीवित रखना ब्रिटिश कोलंबिया के लोगों के लिए गर्व की बात है। 

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Jaswant Khalra Day will be celebrated in Canada on 6 September
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

सिख नेता जसवंत सिंह खालड़ा की याद में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया की सरकार ने छह सितंबर को आधिकारिक तौर पर जसवंत सिंह खालड़ा डे घोषित किया है। यह घोषणा उनकी गुमशुदगी की 30वीं बरसी पर की गई।
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हाल ही में अमेरिका में सेंट्रल यूनिफाइड ने नए प्राथमिक विद्यालय का नाम पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसंवत खालड़ा के नाम पर रखने की मंजूरी प्रदान कर दी थी। रात को हुई बैठक में बोर्ड ने निर्णय लिया कि शील्ड्स और ब्रॉली में स्थित विद्यालय का नाम अब जसवंत सिंह खालड़ा प्राथमिक विद्यालय रखा जाएगा।
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ब्रिटिश कोलंबिया की सरकार ने अपने पत्र में कहा है कि जसवंत सिंह खालड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मानवाधिकार रक्षक थे और उनकी स्मृति को सदा जीवित रखना ब्रिटिश कोलंबिया के लोगों के लिए गर्व की बात है। प्रांत की लेफ्टिनेंट गवर्नर वेन्डी कोकिया ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर छह सितंबर को जसवंत सिंह खालड़ा डे घोषित किया।
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कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा 

खालिस्तानी मूवमेंट की शुरुआत 1973 में हुई लेकिन 1984 के इंदिरा गांधी हत्याकांड के बाद पंजाब में खालिस्तान मूवमेंट को लोगों का सपोर्ट मिल रहा था। पंजाब पुलिस इसे कुचलने के लिए गिरफ्तारियां करने लगी। जिस पर भी शक होता, उसे गिरफ्तार कर लिया जाता। साल 1992 में प्यारा सिंह नाम के आदमी को पुलिस ने अरेस्ट किया जो अमृतसर के सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक में बतौर डायरेक्टर काम करते थे।

वह अपने किसी रिश्तेदार के पास उत्तरप्रदेश गए हुए थे। पुलिस ने यूपी जाकर उन्हें अरेस्ट किया था। परिवार वाले और उन्हें जानने वाले लोग उनकी तलाश करने लगे। पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था। फिर बैंक में उनके साथी कर्मचारी और डायरेक्टर रहे जसवंत सिंह खालड़ा को पता चलता है कि प्यारा को पुलिस एनकाउंटर में मार दिया गया है। इतना ही नहीं, अमृतसर के दुर्ग्याणा मंदिर शमशान घाट में बिना किसी को बताए उनका अंतिम संस्कार भी हो चुका है।

जसवंत ने शुरुआती रजिस्टरों की जांच में पाया कि साल 1992 में दुर्ग्याणा मंदिर शमशान घाट में 300 से ज्यादा बेनाम लाशों का अंतिम संस्कार किया गया। जनवरी का महीना खत्म होने तक उनके पास तीन शमशान घाट के रिकॉर्ड आ चुके थे। अब उन्हें पब्लिक करने का वक्त था।


जसवंत सिंह खालड़ा का 6 सितम्बर 1995 को अपहरण कर लिया गया और झाबल पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जब वह अपने घर के सामने अपनी कार धो रहे थे। उसके बाद उनका अता पता नहीं चला।1996 में, केंद्रीय जांच ब्यूरो को इस बात के सबूत मिले कि उन्हें तरनतारन के एक पुलिस थाने में रखा गया था। पंजाब के नौ पुलिस अधिकारियों पर हत्या और अपहरण का आरोप लगाने की सिफ़ारिश की। कथित हत्यारों को ग्यारह साल तक बिना किसी आरोप के हिरासत में रखा गया, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह भी संदिग्धों में से एक थे।
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