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कैसे बनेंगे स्मार्ट: शहर की सुंदरता को लगा कूड़ा रूपी ग्रहण
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जालंधर। निगम की लापरवाही और स्मार्ट सिटी की अनदेखी का परिणाम आज शहरवासी भुगत रहे हैं। सुबह-शाम सैर करने वालों को भी अब घर से निकलने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। शहर की सुंदरता को कूड़ा रूपी ग्रहण लग गया है। गर्मी बढ़ने के साथ सेहत के लिए यह और भी हानिकारक होने वाला है। इसका कारण शहर के मुख्य इलाके हों या पार्क, जहां खाली जगह मिली वहां अस्थायी डंप बना दिए गए।
दो चार नहीं बल्कि पूरे 30 अस्थायी डंप हैं, जबकि 4-5 तो ऐसे हैं जिनका कूड़ा रेगुलर नहीं उठाया जाता। शहर में प्रवेश करने वालों का स्वागत कूड़े के साथ होता है। सुबह जब लोग सैर करने के लिए घरों से निकलते हैं तो उन्हें कूड़े के ढेर और बदबू का सामना करना पड़ता है। इन डंपों के लिए निगम खुद को जिम्मेदार नहीं मानता। वह लोगों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहते हैं कि लोगों ने जहां कूड़ा फेंकना शुरू किया वहीं डंप बने। दूसरी ओर स्मार्ट सिटी, वरियाणा में लगे कूड़े के ढेर के लिए 43 करोड़ में बायो प्रोजेक्ट लाए पर शहर में लग रहे कूड़े के अस्थायी डंपों का कोई हल नहीं निकाला। सिर्फ स्मार्ट सिटी के टैग से शहर स्मार्ट नहीं होंगे काम भी स्मार्ट करने होंगे।
सुबह 8 बजकर 35 मिनट पर सेंट सोल्जर कॉलेज जा रही छात्राएं और बुजुर्ग जब कपूरथला-बस्ती रोड के तिराहे पर बने कूड़े के डंप के पास से गुजरी तो उन्हें मुंह पर रुमाल रखना पड़ा। छात्रा प्रिया व रमनप्रीत कौर ने बताया कि वह हर रोज इसी समय पर यहां से गुजरती हैं और प्रतिदिन गंदगी के साथ बदबू का सामना करना पड़ता है।
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फुटबाल चौक के पास स्थित पार्क के साथ निगम ने डंप बना दिया। सुबह साढ़े सात बजे जब बलवंत राय उप्पल फ्रीडम फाइटर मेमोरियल पार्क पहुंचे तो वहां कोई नहीं था। वहां से गुजर रहे गोविंद व इंदरजीत सिंह ने कहा कि प्रशासन को देखना चाहिए कि डंप अगर बनाना है तो किस जगह।
शहर की खूबसूरती और बच्चों के लिए मनोरंजन का जरिया बना प्रताप बाग कूड़े की मार से अछूता नहीं है। सैर करने निकले हरजोत सिंह और अश्वनी शर्मा ने बताया कि इसकी दुर्गंध पार्क तक आती है। जब किसी दिन कूड़ा उठाने में देरी हो जाए तो यह पूरे इलाके को बदबू से भर देता है। यह एक जहर की तरह है नगर निगम व स्मार्ट सिटी को इस ओर ध्यान देना चाहिए। (संवाद)
शहर के 30 के करीब अस्थायी डंपों से निगम रोजाना सुबह कूड़ा उठा लेता है। इस पर हजारों का खर्च आता है। डंप खत्म नहीं किया जा सकता क्योंकि यह डंप लोगों की देन है। लोग अपनी सहूलियत के लिए जहां खाली जगह मिली वहां कूड़ा फेंकने लगते हैं। गर्मियों में कूड़े से उठने वाली बदबू के लिए टीम जरूरी कदम उठा रही है लेकिन जब तक डंप खत्म नहीं होंगे समस्या का समाधान नहीं होगा। स्मार्ट सिटी की ओर से शहर में लग रहे अस्थायी डंपों को बंद करने का कोई प्रोजेक्ट नहीं है। वरियाणा में लगे कूड़े के ढेर को खत्म करने का प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी का है और वही देख रहे हैं।
- श्रीकिशन शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम
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दो चार नहीं बल्कि पूरे 30 अस्थायी डंप हैं, जबकि 4-5 तो ऐसे हैं जिनका कूड़ा रेगुलर नहीं उठाया जाता। शहर में प्रवेश करने वालों का स्वागत कूड़े के साथ होता है। सुबह जब लोग सैर करने के लिए घरों से निकलते हैं तो उन्हें कूड़े के ढेर और बदबू का सामना करना पड़ता है। इन डंपों के लिए निगम खुद को जिम्मेदार नहीं मानता। वह लोगों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहते हैं कि लोगों ने जहां कूड़ा फेंकना शुरू किया वहीं डंप बने। दूसरी ओर स्मार्ट सिटी, वरियाणा में लगे कूड़े के ढेर के लिए 43 करोड़ में बायो प्रोजेक्ट लाए पर शहर में लग रहे कूड़े के अस्थायी डंपों का कोई हल नहीं निकाला। सिर्फ स्मार्ट सिटी के टैग से शहर स्मार्ट नहीं होंगे काम भी स्मार्ट करने होंगे।
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सुबह 8 बजकर 35 मिनट पर सेंट सोल्जर कॉलेज जा रही छात्राएं और बुजुर्ग जब कपूरथला-बस्ती रोड के तिराहे पर बने कूड़े के डंप के पास से गुजरी तो उन्हें मुंह पर रुमाल रखना पड़ा। छात्रा प्रिया व रमनप्रीत कौर ने बताया कि वह हर रोज इसी समय पर यहां से गुजरती हैं और प्रतिदिन गंदगी के साथ बदबू का सामना करना पड़ता है।
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फुटबाल चौक के पास स्थित पार्क के साथ निगम ने डंप बना दिया। सुबह साढ़े सात बजे जब बलवंत राय उप्पल फ्रीडम फाइटर मेमोरियल पार्क पहुंचे तो वहां कोई नहीं था। वहां से गुजर रहे गोविंद व इंदरजीत सिंह ने कहा कि प्रशासन को देखना चाहिए कि डंप अगर बनाना है तो किस जगह।
शहर की खूबसूरती और बच्चों के लिए मनोरंजन का जरिया बना प्रताप बाग कूड़े की मार से अछूता नहीं है। सैर करने निकले हरजोत सिंह और अश्वनी शर्मा ने बताया कि इसकी दुर्गंध पार्क तक आती है। जब किसी दिन कूड़ा उठाने में देरी हो जाए तो यह पूरे इलाके को बदबू से भर देता है। यह एक जहर की तरह है नगर निगम व स्मार्ट सिटी को इस ओर ध्यान देना चाहिए। (संवाद)
शहर के 30 के करीब अस्थायी डंपों से निगम रोजाना सुबह कूड़ा उठा लेता है। इस पर हजारों का खर्च आता है। डंप खत्म नहीं किया जा सकता क्योंकि यह डंप लोगों की देन है। लोग अपनी सहूलियत के लिए जहां खाली जगह मिली वहां कूड़ा फेंकने लगते हैं। गर्मियों में कूड़े से उठने वाली बदबू के लिए टीम जरूरी कदम उठा रही है लेकिन जब तक डंप खत्म नहीं होंगे समस्या का समाधान नहीं होगा। स्मार्ट सिटी की ओर से शहर में लग रहे अस्थायी डंपों को बंद करने का कोई प्रोजेक्ट नहीं है। वरियाणा में लगे कूड़े के ढेर को खत्म करने का प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी का है और वही देख रहे हैं।
- श्रीकिशन शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम