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चर्चा में जालंधर का मिट्ठापुर: पदक विजेता हॉकी टीम के तीन सितारे इसी गांव से, कप्तान मनप्रीत का भी यहीं से नाता
Thu, 05 Aug 2021 09:18 PM IST
ajay kumar
सौरभ खन्ना, संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
सौरभ खन्ना, संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 05 Aug 2021 09:18 PM IST
सार
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में पदक पर कब्जा कर इतिहास रच दिया। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया। टीम ने जर्मनी को 5-4 से मात देकर पूरे देश को खुशी से झूमने का मौका दिया। जालंधर के गांव मिट्ठापुर के तीन खिलाड़ी पदक विजेता इस टीम का हिस्सा है। खास बात यह है कि कप्तान मनप्रीत भी इसी गांव के रहने वाले हैं।
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जीत का जश्न मनाते हॉकी कप्तान मनप्रीत के परिवार वाले।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
41 साल बाद भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीता। टीम की इस जीत में पंजाब के खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा। खास बात यह है कि इस विजेता टीम का हिस्सा जालंधर के एक गांव के तीन खिलाड़ी बने। यह गांव है मिट्ठापुर। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह भी इसी गांव के रहने वाले हैं। हॉकी खिलाड़ी मनदीप सिंह और वरुण कुमार का भी इसी गांव से ताल्लुक है।
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खिलाड़ियों के पारिवारिक सदस्यों ने भंगड़ा डालकर और लड्डू बांट कर जीत का जश्न मनाया। पारिवारिक सदस्यों को तमाम लोगों ने घर आकर बधाई दी तो दूर बैठे लोगों का लगातार फोन पर बधाई देने का सिलसिला चलता रहा। गांव मिट्ठापुर के इन तीनों खिलाड़ियों के अलावा हार्दिक सिंह भी जालंधर के गांव खुसरोपुर के रहने वाले हैं। इन खिलाड़ियों के घरों पर जीत का जश्न बड़े जोश के साथ मनाया गया। टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह के घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
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कप्तान मनप्रीत सिंह की दादी तो सभी लोगों के बधाई संदेश लेते वक्त भावुक हो गईं और खुशी भरे मन से कहा कि सभी लड़कों ने कमाल कर दिखाया है। मनप्रीत सिंह की मां मनजीत कौर ने कहा कि मेरी अरदास कबूल हो गई। हम बहुत खुश हैं कि मेरे बेटे ने देश का नाम रोशन किया है।
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उन्होंने कहा कि अब हम खिलाड़ियों का एयरपोर्ट पर स्वागत करने जाएंगे। मनदीप सिंह और वरुण कुमार के घर पर भी जश्न का माहौल रहा। वरुण कुमार के पिता ब्रह्मानंद ने कहा कि हमें अपने खिलाड़ियों पर नाज है। वहीं सुरजीत हॉकी सोसाइटी के सचिव इकबाल सिंह संधू ने बताया कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम में जालंधर की सुरजीत हॉकी अकादमी के आठ खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें से चार खिलाड़ी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह, हार्दिक सिंह और वरुण कुमार जालंधर के हैं।
परगट सिंह की आंखों में आंसू छलक उठे
भारतीय पुरुष हॉकी टीम की इस जीत के बाद ओलंपियन परगट सिंह की आंखों में आंसू छलक उठे। बहुत ही खुशी भरे मन के साथ वह बोले कि वर्ष 1980 में भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में गोल्ड जीता था। इसके 41 साल बाद भारत को फिर ओलंपिक का मेडल मिला है। परगट सिंह ने कहा कि यह बहुत खुशी व भावुक पल है। उधर, भाजपा स्पोर्ट्स सेल के अध्यक्ष सुधीर ठुकराल आशु के नेतृत्व में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कांस्य पदक जीतने का जश्न लड्डू बांटकर मनाया गया।
टोक्यो ओलंपिक में पंजाबी शेरों ने दिलाई जीत
भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी को टोक्यो ओलंपिक में नई पहचान दिलवाने में पंजाबी शेरों का अमूल्य योगदान रहा है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ओलंपिक में कांस्य पदक अपने नाम किया है। तीसरे-चौथे स्थान के लिए खेले गए मैच में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कड़े संघर्ष के बाद जर्मनी को 5-4 से हराया।
गर्व की बात यह है कि इस मैच के दौरान पांचों गोल पंजाबी शेरों ने किए। सिमरनजीत सिंह ने 17वें एवं 34वें मिनट में दो गोल, रुपिंदर पाल सिंह ने 31वें, हार्दिक सिंह ने 27वें तथा हरमनप्रीत सिंह ने 29वें मिनट में 1-1 गोल दागे।
सिमरनजीत सिंह और हार्दिक सिंह जालंधर की सुरजीत हॉकी अकादमी का हिस्सा रहे हैं। रुपिंदर पाल सिंह चंडीगढ़ हॉकी अकादमी से खेलते रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पंजाब राज्य शुरू से ही हॉकी खिलाड़ियों की नर्सरी रहा है। सुरजीत हॉकी सोसायटी के सचिव इकबाल सिंह संधू ने बताया कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम में अकादमी के आठ खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें चार खिलाड़ी जालंधर के हैं। उनमें टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह, हार्दिक सिंह और वरुण कुमार शामिल हैं। ये सभी खिलाड़ी कभी सुरजीत हॉकी अकादमी से प्रशिक्षण लेते रहे हैं।
खिलाड़ियों ने किया कमाल
खिलाड़ियों ने ओलंपिक में कमाल करके दिखाया है। भारतीय टीम के मिडफील्डर सिमरनजीत सिंह जालंधर की प्रसिद्ध सुरजीत हॉकी अकादमी से करीब 5 साल तक प्रशिक्षण ले चुका है और यहीं से प्रोफेशनल हॉकी खेलना शुरू किया। सिमरनजीत सिंह के चचेरे भाई गुरजंत सिंह भी टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा है। फरीदकोट के बाबा फरीद एवेन्यू के रहने वाले भारतीय हॉकी टीम के अनुभवी ड्रैग फ्लिकर रुपिंदर पाल सिंह ने करीब 6 साल की उम्र में फिरोजपुर में संचालित शेरशाह वली हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। रुपिंदर इंडियन ओवरसीज बैंक में नौकरी करते हैं और उनके लिए खेलते हैं। रुपिंदर ने अपने हॉकी करियर की शुरुआत मई 2010 में सुल्तान अजलान शाह कप के दौरान की थी।
पिता से गुरुमंत्र लेते हैं हार्दिक
जिला जालंधर के गांव खुसरोपुर का रहना वाला भारतीय हॉकी टीम का स्टार मिडफील्डर हार्दिक सिंह हर मैच से पहले अपने पिता वरिंदरप्रीत सिंह से गुरुमंत्र लेते हैं। भारतीय हॉकी टीम के उप कप्तान हरमनप्रीत सिंह पंजाब के जिला अमृतसर के कस्बा जंडियाला गुरु के गांव तीमोवाल के रहने वाले हैं। प्रतिभाशाली डिफेंडर और ड्रैग फ्लकर हरमनप्रीत सिंह को बचपन से ही हॉकी में गहरी दिलचस्पी रही है।
गर्व की बात यह है कि इस मैच के दौरान पांचों गोल पंजाबी शेरों ने किए। सिमरनजीत सिंह ने 17वें एवं 34वें मिनट में दो गोल, रुपिंदर पाल सिंह ने 31वें, हार्दिक सिंह ने 27वें तथा हरमनप्रीत सिंह ने 29वें मिनट में 1-1 गोल दागे।
सिमरनजीत सिंह और हार्दिक सिंह जालंधर की सुरजीत हॉकी अकादमी का हिस्सा रहे हैं। रुपिंदर पाल सिंह चंडीगढ़ हॉकी अकादमी से खेलते रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पंजाब राज्य शुरू से ही हॉकी खिलाड़ियों की नर्सरी रहा है। सुरजीत हॉकी सोसायटी के सचिव इकबाल सिंह संधू ने बताया कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम में अकादमी के आठ खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें चार खिलाड़ी जालंधर के हैं। उनमें टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह, हार्दिक सिंह और वरुण कुमार शामिल हैं। ये सभी खिलाड़ी कभी सुरजीत हॉकी अकादमी से प्रशिक्षण लेते रहे हैं।
खिलाड़ियों ने किया कमाल
खिलाड़ियों ने ओलंपिक में कमाल करके दिखाया है। भारतीय टीम के मिडफील्डर सिमरनजीत सिंह जालंधर की प्रसिद्ध सुरजीत हॉकी अकादमी से करीब 5 साल तक प्रशिक्षण ले चुका है और यहीं से प्रोफेशनल हॉकी खेलना शुरू किया। सिमरनजीत सिंह के चचेरे भाई गुरजंत सिंह भी टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा है। फरीदकोट के बाबा फरीद एवेन्यू के रहने वाले भारतीय हॉकी टीम के अनुभवी ड्रैग फ्लिकर रुपिंदर पाल सिंह ने करीब 6 साल की उम्र में फिरोजपुर में संचालित शेरशाह वली हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। रुपिंदर इंडियन ओवरसीज बैंक में नौकरी करते हैं और उनके लिए खेलते हैं। रुपिंदर ने अपने हॉकी करियर की शुरुआत मई 2010 में सुल्तान अजलान शाह कप के दौरान की थी।
पिता से गुरुमंत्र लेते हैं हार्दिक
जिला जालंधर के गांव खुसरोपुर का रहना वाला भारतीय हॉकी टीम का स्टार मिडफील्डर हार्दिक सिंह हर मैच से पहले अपने पिता वरिंदरप्रीत सिंह से गुरुमंत्र लेते हैं। भारतीय हॉकी टीम के उप कप्तान हरमनप्रीत सिंह पंजाब के जिला अमृतसर के कस्बा जंडियाला गुरु के गांव तीमोवाल के रहने वाले हैं। प्रतिभाशाली डिफेंडर और ड्रैग फ्लकर हरमनप्रीत सिंह को बचपन से ही हॉकी में गहरी दिलचस्पी रही है।