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Jalandhar News: भ्रष्टाचार मामले में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई न करने वाले फाजिल्का के एसएसपी बराड़ निलंबित
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-पीड़ित परिवार ने पुलिस को दी थी शिकायत, इसके बावजूद नहीं हुई थी कार्रवाई
-विजिलेंस टीम ने साइबर सेल के एसएचओ सहित चार लोगों को किया था गिरफ्तार
-साइबर क्राइम में फंसे नाबालिग के परिवार से मांगे थे एक लाख रुपये
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संवाद न्यूज एजेंसी
फाजिल्का। पंजाब सरकार ने फाजिल्का के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वरिंदर सिंह बराड़ को निलंबित कर दिया है। बराड़ पर आरोप है कि उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार चार पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की। इनमें साइबर सेल के एसएचओ भी शामिल हैं।
इस पूरे मामले की जानकारी मंगलवार को वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दी थी। उन्होंने बताया था कि पीड़ित परिवार का 17 साल का लड़का साइबर क्राइम में शामिल हो गया था। उसने गलती से पोर्न वीडियो पर क्लिक कर दिया था। पुलिसकर्मियों ने इस चीज का फायदा उठाया। इन लोगों ने लड़के के परिजनों को डरा-धमका कर पैसे मांगे। पुलिस ने लड़के का मोबाइल फोन जब्त कर लिया था और मामला सुलझाने के लिए एक लाख रुपये की मांग की थी।
जब चारों पुलिसकर्मियों ने नाबालिग पर केस दर्ज करने की धमकी दी तो परिजनों ने एसएसपी वरिंदर बराड़ को इसकी शिकायत दी थी। सरकार का कहना है कि तब एसएसपी ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। इंसाफ न मिलता देख पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से शिकायत की, जिसके बाद विजिलेंस ब्यूरो ने रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपियों में एसएचओ मनजीत सिंह, वरिष्ठ कांस्टेबल राजपाल, वरिष्ठ कांस्टेबल शिंदरपाल सिंह और वरिष्ठ कांस्टेबल सुमित कुमार शामिल हैं। इस पूरे मामले की जांच मोहाली विजिलेंस टीम ने की। आरोपियों को सबूतों के आधार पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
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-विजिलेंस टीम ने साइबर सेल के एसएचओ सहित चार लोगों को किया था गिरफ्तार
-साइबर क्राइम में फंसे नाबालिग के परिवार से मांगे थे एक लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
फाजिल्का। पंजाब सरकार ने फाजिल्का के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वरिंदर सिंह बराड़ को निलंबित कर दिया है। बराड़ पर आरोप है कि उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार चार पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की। इनमें साइबर सेल के एसएचओ भी शामिल हैं।
इस पूरे मामले की जानकारी मंगलवार को वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दी थी। उन्होंने बताया था कि पीड़ित परिवार का 17 साल का लड़का साइबर क्राइम में शामिल हो गया था। उसने गलती से पोर्न वीडियो पर क्लिक कर दिया था। पुलिसकर्मियों ने इस चीज का फायदा उठाया। इन लोगों ने लड़के के परिजनों को डरा-धमका कर पैसे मांगे। पुलिस ने लड़के का मोबाइल फोन जब्त कर लिया था और मामला सुलझाने के लिए एक लाख रुपये की मांग की थी।
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जब चारों पुलिसकर्मियों ने नाबालिग पर केस दर्ज करने की धमकी दी तो परिजनों ने एसएसपी वरिंदर बराड़ को इसकी शिकायत दी थी। सरकार का कहना है कि तब एसएसपी ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। इंसाफ न मिलता देख पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से शिकायत की, जिसके बाद विजिलेंस ब्यूरो ने रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपियों में एसएचओ मनजीत सिंह, वरिष्ठ कांस्टेबल राजपाल, वरिष्ठ कांस्टेबल शिंदरपाल सिंह और वरिष्ठ कांस्टेबल सुमित कुमार शामिल हैं। इस पूरे मामले की जांच मोहाली विजिलेंस टीम ने की। आरोपियों को सबूतों के आधार पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।