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डीसीपी लुधियाना का रीडर बनकर 20 रिश्वत लेता फर्जी एएसआई विजिलेंस ने दबोचा
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लुधियाना के डीसीपी का रीडर बनकर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते फर्जी एएसआई को विजिलेंस ब्यूरो जालंधर की टीम ने रंगे हाथ दबोचा है। तीन आरोपियों के खिलाफ थाना विजिलेंस ब्यूरो जालंधर में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। दो फर्जी एएसआई फरार हैं।
एसएसपी विजिलेंस ब्यूरो जालंधर दलजिंदर सिंह ढिल्लों ने बताया कि जसवंत सिंह गांव गोपीपुर फत्तूढींगा ट्रेवल एजेंट है। उसने लुधियाना निवासी महिला कुलविंदर कौर को कनाडा भेजने को लेकर कागजात अप्लाई करने के लिए तीन लाख रुपये में बात तय की थी। कुलविंदर कौर ने शिकायतकर्ता को एक लाख एडवांस चेक के जरिए दिए। बाकी बचे दो लाख कनाडा जाकर देने थे। कुलविंदर कौर ने कनाडा जाने के लिए अप्लाई करने के लिए पूरे दस्तावेज नहीं दिए थे। इस कारण उसने उसका आवेदन नहीं किया। एक महीने बाद जसवंत सिंह ने कुलविंदर कौर का पासपोर्ट लौटा दिया लेकिन एक लाख की रकम नहीं लौटाई।
20-25 दिन बाद कुलविंदर कौर ने जसवंत को फोन करके कहा कि उसने पैसे नहीं लौटाए हैं। उसने पुलिस को शिकायत दे दी है। पुलिस अब उससे पैसे वापस लेगी। जसवंत को किसी व्यक्ति का फोन आया जो खुद को डीएसपी लुधियाना का रीडर एएसआई अमनदीप बता रहा था। जब उसने उक्त एएसआई से पूछा कि वह किस अधिकारी का रीडर है तो वह गाली-गलौच करने लगा। थोड़ी देर बाद दोबारा फिर से नकली एएसआई कहने लगा कि तू ट्रेवल एजेंट का काम करता है और तूने कुलविंदर कौर से ढाई लाख रुपये कनाडा भेजने के लिए एडवांस लिए हैं। तूने न तो उसे कनाडा भेजा न ही पैसे वापस किए। तुम पर केस दर्ज करके तेरे परिवार को उठाकर जेल में बंद किया जाएगा। फिर उसने उसे लुधियाना शिमलापुरी थाने में आकर मिलने के लिए कहा। आठ फरवरी को लुधियाना पहुंचे जसवंत सिंह ने अमनदीप को फोन किया तो उसने कहा कि वह शिमलापुरी के पास रेखा स्वीट्स शॉप में आ जाए। वहां उक्त एएसआई अपने तीन साथियों व महिला कुलविंदर कौर के साथ मौजूद था। उसने उन लोगों की पहचान बतौर एएसआई भूपिंदर उर्फ भिंदा, एएसआई विक्की व बबलू दसावर प्रधान शिमलापुरी लुधियाना के तौर पर कराई।
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नकली एएसआई अमनदीप उसे कहने लगा कि कुलविंदर कौर के ढाई लाख रुपये अभी वापस कर दे, तो शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने कुलविंदर कौर से ढाई लाख नहीं, बल्कि 1 लाख रुपये लिए है। अभी उसके पास एक लाख नहीं है। किस्तों में कुलविंदर कौर को लौटा देगा। तभी बबलू दसावर प्रधान कहने लगा कि यह सभी पुलिस विभाग के आदमी हैं। उसने ही इन्हें सिविल वर्दी में बुलाया है। यह जैसा कहते है वैसा ही कर। तभी नकली एएसआई अमनदीप उसे धमकाने लगा।
इस पर वह 25-25 हजार के चार चेक देने को राजी हो गया। उसने एएसआई अमनदीप से कहा कि वह कुलविंदर कौर को चेक दे देता है लेकिन पुलिस उसे दोबारा परेशान न करे। तभी अमनदीप ने कहा कि उसकी पुलिस के बड़े अधिकारियों से अच्छी जान पहचान है, वह खुद ही सब कुछ ठीक करवा देगा। अमनदीप ने राजीनामा लिखकर उसके हस्ताक्षर करवा लिए और कहने लगा कि इस राजीनामा लिखने के एवज में एक लाख और बतौर रिश्वत हमें देनी होगी। उसके काफी गिड़गिड़ाने के बाद नकली एएसआई ने कहा कि वह 30 हजार रुपये ही उसे दे दे। उस समय उसके पास 10 हजार रुपये थे, जोकि उसने उसी समय उसने ले लिए। बाकी 20 हजार 10 फरवरी को देने के लिए कहा था। शिकायतकर्ता किसी निजी काम को लेकर 10 फरवरी को यमुनानगर चला गया। 13 फरवरी को नकली एएसआई अमनदीप, एएसआई भूपिंदर उर्फ भिंदा व एएसआई विक्की ने रात को करीब 9 बजे शिकायतकर्ता के घर गांव गोपीपुर फत्तूढींगा जिला कपूरथला में रेड की।
उस समय शिकायतकर्ता अपने घर में मौजूद नहीं था। उन सभी ने शिकायतकर्ता के पारिवारिक सदस्यों से गाली गलौज किया और धमकियां दी कि यदि जसवंत सिंह ने पैसे न दिए तो वह पूरे परिवार को उठाकर थाने ले जाएंगे। 15 फरवरी को शिकायतकर्ता ने एएसआई अमनदीप से बात की तो उसने कहा कि कहा कि वह आज ही 20 हजार रुपये लेकर रामा मंडी चौक जालंधर में मिले। तभी उसने इसकी शिकायत विजिलेंस को कर दी। डीएसपी विजिलेंस ब्यूरो जालंधर यूनिट ने ट्रैप लगाकर आरोपी नकली एएसआई अमनदीप को रंगेहाथ 20 हजार रिश्वत लेते हुए काबू कर लिया। जबकि उसके दो साथी नकली एएसआई भूपिंदर उर्फ भिंदा व एएसआई विक्की स्विफ्ट कार में सवार होकर कुछ दूरी पर खड़े थे, जोकि अमनदीप के पकड़े जाने के बाद भाग निकले।
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एसएसपी विजिलेंस ब्यूरो जालंधर दलजिंदर सिंह ढिल्लों ने बताया कि जसवंत सिंह गांव गोपीपुर फत्तूढींगा ट्रेवल एजेंट है। उसने लुधियाना निवासी महिला कुलविंदर कौर को कनाडा भेजने को लेकर कागजात अप्लाई करने के लिए तीन लाख रुपये में बात तय की थी। कुलविंदर कौर ने शिकायतकर्ता को एक लाख एडवांस चेक के जरिए दिए। बाकी बचे दो लाख कनाडा जाकर देने थे। कुलविंदर कौर ने कनाडा जाने के लिए अप्लाई करने के लिए पूरे दस्तावेज नहीं दिए थे। इस कारण उसने उसका आवेदन नहीं किया। एक महीने बाद जसवंत सिंह ने कुलविंदर कौर का पासपोर्ट लौटा दिया लेकिन एक लाख की रकम नहीं लौटाई।
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20-25 दिन बाद कुलविंदर कौर ने जसवंत को फोन करके कहा कि उसने पैसे नहीं लौटाए हैं। उसने पुलिस को शिकायत दे दी है। पुलिस अब उससे पैसे वापस लेगी। जसवंत को किसी व्यक्ति का फोन आया जो खुद को डीएसपी लुधियाना का रीडर एएसआई अमनदीप बता रहा था। जब उसने उक्त एएसआई से पूछा कि वह किस अधिकारी का रीडर है तो वह गाली-गलौच करने लगा। थोड़ी देर बाद दोबारा फिर से नकली एएसआई कहने लगा कि तू ट्रेवल एजेंट का काम करता है और तूने कुलविंदर कौर से ढाई लाख रुपये कनाडा भेजने के लिए एडवांस लिए हैं। तूने न तो उसे कनाडा भेजा न ही पैसे वापस किए। तुम पर केस दर्ज करके तेरे परिवार को उठाकर जेल में बंद किया जाएगा। फिर उसने उसे लुधियाना शिमलापुरी थाने में आकर मिलने के लिए कहा। आठ फरवरी को लुधियाना पहुंचे जसवंत सिंह ने अमनदीप को फोन किया तो उसने कहा कि वह शिमलापुरी के पास रेखा स्वीट्स शॉप में आ जाए। वहां उक्त एएसआई अपने तीन साथियों व महिला कुलविंदर कौर के साथ मौजूद था। उसने उन लोगों की पहचान बतौर एएसआई भूपिंदर उर्फ भिंदा, एएसआई विक्की व बबलू दसावर प्रधान शिमलापुरी लुधियाना के तौर पर कराई।
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नकली एएसआई अमनदीप उसे कहने लगा कि कुलविंदर कौर के ढाई लाख रुपये अभी वापस कर दे, तो शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने कुलविंदर कौर से ढाई लाख नहीं, बल्कि 1 लाख रुपये लिए है। अभी उसके पास एक लाख नहीं है। किस्तों में कुलविंदर कौर को लौटा देगा। तभी बबलू दसावर प्रधान कहने लगा कि यह सभी पुलिस विभाग के आदमी हैं। उसने ही इन्हें सिविल वर्दी में बुलाया है। यह जैसा कहते है वैसा ही कर। तभी नकली एएसआई अमनदीप उसे धमकाने लगा।
इस पर वह 25-25 हजार के चार चेक देने को राजी हो गया। उसने एएसआई अमनदीप से कहा कि वह कुलविंदर कौर को चेक दे देता है लेकिन पुलिस उसे दोबारा परेशान न करे। तभी अमनदीप ने कहा कि उसकी पुलिस के बड़े अधिकारियों से अच्छी जान पहचान है, वह खुद ही सब कुछ ठीक करवा देगा। अमनदीप ने राजीनामा लिखकर उसके हस्ताक्षर करवा लिए और कहने लगा कि इस राजीनामा लिखने के एवज में एक लाख और बतौर रिश्वत हमें देनी होगी। उसके काफी गिड़गिड़ाने के बाद नकली एएसआई ने कहा कि वह 30 हजार रुपये ही उसे दे दे। उस समय उसके पास 10 हजार रुपये थे, जोकि उसने उसी समय उसने ले लिए। बाकी 20 हजार 10 फरवरी को देने के लिए कहा था। शिकायतकर्ता किसी निजी काम को लेकर 10 फरवरी को यमुनानगर चला गया। 13 फरवरी को नकली एएसआई अमनदीप, एएसआई भूपिंदर उर्फ भिंदा व एएसआई विक्की ने रात को करीब 9 बजे शिकायतकर्ता के घर गांव गोपीपुर फत्तूढींगा जिला कपूरथला में रेड की।
उस समय शिकायतकर्ता अपने घर में मौजूद नहीं था। उन सभी ने शिकायतकर्ता के पारिवारिक सदस्यों से गाली गलौज किया और धमकियां दी कि यदि जसवंत सिंह ने पैसे न दिए तो वह पूरे परिवार को उठाकर थाने ले जाएंगे। 15 फरवरी को शिकायतकर्ता ने एएसआई अमनदीप से बात की तो उसने कहा कि कहा कि वह आज ही 20 हजार रुपये लेकर रामा मंडी चौक जालंधर में मिले। तभी उसने इसकी शिकायत विजिलेंस को कर दी। डीएसपी विजिलेंस ब्यूरो जालंधर यूनिट ने ट्रैप लगाकर आरोपी नकली एएसआई अमनदीप को रंगेहाथ 20 हजार रिश्वत लेते हुए काबू कर लिया। जबकि उसके दो साथी नकली एएसआई भूपिंदर उर्फ भिंदा व एएसआई विक्की स्विफ्ट कार में सवार होकर कुछ दूरी पर खड़े थे, जोकि अमनदीप के पकड़े जाने के बाद भाग निकले।