फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Punjabi poet Gurdarshan Badal attacked in Canada by racial slurs black mud balls thrown on his face

नस्लीय हमला: कनाडा में पंजाबी कवि गुरदर्शन बादल पर हमला, काली मिट्टी के गोले चेहरे पर फेंके, गालियां निकली

Wed, 23 Jul 2025 03:42 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 23 Jul 2025 03:42 PM IST
सार

कनाडा के सिख बहुसंख्यक इलाके सरे के एक बड़े पार्क में प्रख्यात पंजाबी कवि गुरदर्शन सिंह बादल के साथ नस्लीय हमले की ऐसी ही एक घटना घटी।

विज्ञापन
Punjabi poet Gurdarshan Badal attacked in Canada by racial slurs black mud balls thrown on his face
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक समय था जब पश्चिमी और विकसित देशों में अश्वेत और रंग-बिरंगे लोगों को अक्सर श्वेत लोगों द्वारा नस्लीय भेदभाव और हमलों का सामना करना पड़ता था, लेकिन समय के साथ अब ऐसी घटनाएं बहुत कम होती हैं और अगर ऐसी कोई घटना होती भी हैं, तो प्रशासन उसका कड़ा संज्ञान लेता है। प्रवासी पंजाबियों की राजधानी कहे जाने वाले कनाडा के बीसी के सरे में ऐसी घटना की कल्पना करना भी मुश्किल है, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर से नस्लीय हमलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 

विज्ञापन


कनाडा के सिख बहुसंख्यक इलाके सरे के एक बड़े पार्क में प्रख्यात पंजाबी कवि गुरदर्शन सिंह बादल के साथ नस्लीय हमले की ऐसी ही एक घटना घटी। प्रख्यात कवि गुरदरशन ने बताया कि वह शाम करीब आठ बजे सरे में अपने घर के पास न्यूटन एथलेटिक्स पार्क में रोजाना की तरह टहल रहे थे। इस दौरान थोड़ी थकान महसूस होने पर वह पास में बनी एक छोटी दीवार पर बैठ गए, जहां दो-तीन अन्य बुजुर्ग भी बैठे थे। अचानक, पांच-छह युवक आए और उनके चेहरे पर कुछ काली मिट्टी के गोले फेंके। उन्होंने अंग्रेजी में गालियां देते हुए ''इस देश को छोड़ दो'' के नारे भी लगाए। 
विज्ञापन


गुरदर्शन इस हमले से स्तब्ध रह गए और मदद के लिए चिल्लाए। जब आस-पास के लोगों को इसकी जानकारी हुई, तो वे लड़के भाग गए। श्वेत लड़कों की इस घिनौनी हरकत से दुखी गुरदर्शन ने अफसोस जताया कि आज भी कनाडा जैसे देश में अप्रवासियों को इस तरह के भेदभाव और नस्लीय घृणा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने याद किया कि लगभग 25 साल पहले, कुछ कनाडा के श्वेत लड़कों ने उनकी पगड़ी पर भद्दी टिप्पणियां की थीं और उन पर पटाखा फेंका था, जिससे उनकी पगड़ी का एक टुकड़ा जल गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इतिहास के नामचीन प्रो. कुणाल का कहना है कि नस्लीय हिंसा की घटनाएं तो 1907 से चल रही हैं। 1907 का बेलिंगहैम रेस दंगा में ज्यादातर सिखों को निशाना बनाया गया। इसका असर कनाडा और प्रशांत उत्तर-पश्चिम में अप्रवासी विरोधी भावनाओं पर भी पड़ा 1914 की कामागाटामारू घटना ने इस भावना को और उजागर किया जब 376 भारतीय यात्रियों, जिनमें ज्यादातर सिख थे, को कनाडा में प्रवेश से वंचित कर दिया गया और उन्हें भारत लौटने के लिए मजबूर किया गया, जहां कई लोगों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। बीच में कुछ घटनाएं कम हो गई, लेकिन अब फिर से बढ़ने लगी है, जो चिंता का विषय है। 2019 में, सांसद और एनडीपी नेता जगमीत सिंह को पीपुल्स पार्टी ऑफ कनाडा (पीपीसी) के उम्मीदवार मार्क फ्राइसन की ओर से एक नस्लवादी ट्वीट में निशाना बनाया गया था। ट्वीट में सिंह की पगड़ी को जलते हुए फ्यूज वाले बम के रूप में दिखाया गया था, जिसकी कनाडा के एंटी-हेट नेटवर्क सहित व्यापक निंदा हुई थी।


राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा कि कनाडा में सिखों के साथ हो रहीं आपराधिक घटनाएं चिंतनीय हैं। वह विदेश मंत्रालय के माध्यम से कनाडा की सरकार से इस मुद्दे को उठाएंगे।
सुरिंदर पाल

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed