{"_id":"5cf550c4bdec2207790764e1","slug":"155958086414-jalandhar-news65","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईसीयू में दाखिल है बलात्कार का शिकार हुई","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
आईसीयू में दाखिल है बलात्कार का शिकार हुई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईसीयू में दुष्कर्म पीड़ित बच्ची
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। शहर के रामामंडी में रविवार को 8 साल की मासूम से दुष्कर्म करने के आरोपी को गुस्साई भीड़ ने पीट पीटकर मार डाला था। शहर में हुई वारदात की चर्चा जोरों पर है। बच्ची आईसीयू में है। लोग उसके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि एक सप्ताह में नूरमहल फिर बस्ती दानिशमंदा और अब रामामंडी की वारदात ने आम जनमानस को हिलाकर रख दिया हैं। समाज मे मौजूद चंद वहशी दरिंदों के खिलाफ अब लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। सरकार अगर ऐसे मामलों में दोषियों को फास्ट्रैक कोर्ट के नियमानुसार सजा देने के लिए गंभीर नहीं हुई तो हालात खराब हो जाएंगे। रामामंडी घटनाक्रम से मौजूदा प्रशासन क्या सबक लेता है? यह तो वक्त बतायेगा, लेकिन भीड़ के गुस्से से हुआ फैसला लचर कानून व्यवस्था की पोल खोलता है। प्रशासन के अधिकारी ऐसे मामलों की अनदेखी कर रहे हैं या फिर लापरवाही हो रही है। एक संस्था के संयोजक दिनेश कुमार ने बताया कि सिविल अस्पताल के स्टाफ को हर वक्त विक्टिम बच्चों के साथ रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि जालंधर के सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में बच्चों की सुरक्षा राम भरोसे है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। शहर के रामामंडी में रविवार को 8 साल की मासूम से दुष्कर्म करने के आरोपी को गुस्साई भीड़ ने पीट पीटकर मार डाला था। शहर में हुई वारदात की चर्चा जोरों पर है। बच्ची आईसीयू में है। लोग उसके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि एक सप्ताह में नूरमहल फिर बस्ती दानिशमंदा और अब रामामंडी की वारदात ने आम जनमानस को हिलाकर रख दिया हैं। समाज मे मौजूद चंद वहशी दरिंदों के खिलाफ अब लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। सरकार अगर ऐसे मामलों में दोषियों को फास्ट्रैक कोर्ट के नियमानुसार सजा देने के लिए गंभीर नहीं हुई तो हालात खराब हो जाएंगे। रामामंडी घटनाक्रम से मौजूदा प्रशासन क्या सबक लेता है? यह तो वक्त बतायेगा, लेकिन भीड़ के गुस्से से हुआ फैसला लचर कानून व्यवस्था की पोल खोलता है। प्रशासन के अधिकारी ऐसे मामलों की अनदेखी कर रहे हैं या फिर लापरवाही हो रही है। एक संस्था के संयोजक दिनेश कुमार ने बताया कि सिविल अस्पताल के स्टाफ को हर वक्त विक्टिम बच्चों के साथ रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि जालंधर के सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में बच्चों की सुरक्षा राम भरोसे है।
विज्ञापन