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‘वारिस पंजाब दे’ पर विवाद, दीप सिद्धू के परिवार ने किया अमृतपाल से किनारा
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अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। किसान आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले अभिनेता संदीप सिंह उर्फ दीप सिद्धू का ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन विवादों में आ गया है। दुबई से लौटे अमृतपाल सिंह को संगठन की कमान सौंपने से शुरू हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है। अमृतपाल सिंह ने सिख युवकों को पंथ और पंजाब की आजादी के लिए लड़ने का आह्वान किया है। जरनैल सिंह भिंडरांवाला की राह पर चलकर खालिस्तान की मांग करने वाले अमृतपाल सिंह के भाषणों को कट्टरवादी करार दिया जा रहा है। कई संगठनों ने इनका विरोध भी जताया है। अब दीप सिद्धू के परिवार ने भी अमृतपाल से किनारा कर लिया है।
विधानसभा चुनाव से पहले पिछले साल सितंबर में चंडीगढ़ में ‘वारिस पंजाब दे’ का गठन करते हुए दीप सिद्धू ने कहा था कि पंजाब के अधिकारों और संस्कृति की रक्षा करने, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे सामाजिक मुद्दों को उठाने और तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाना ही इसका मकसद होगा। सिद्धू पर दिल्ली पुलिस ने पिछले साल गणतंत्र दिवस पर किसानों के विरोध मार्च के दौरान लाल किले पर हिंसा और सिख झंडा फहराने में कथित भूमिका के लिए मामला दर्ज किया था। अब दीप सिद्धू के परिवार ने कहा है कि उनका अमृतपाल से किसी तरह का कोई संबंध नहीं है। वह आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले का अनुयायी होने का दावा करता है।
जनरैल सिंह भिंडरांवाला के गांव में हुए दस्तारबंदी समारोह में अमृतपाल ने कहा था कि दीप सिद्धू सिख समुदाय के शहीद थे। सिद्धू जैसे लोग दुर्घटनाओं में कभी नहीं मर सकते। हम जानते हैं कि उनकी मृत्यु कैसे हुई। उन्हें किसने मारा। अमृतपाल ने कहा कि अतीत में हमारी लड़ाई इस गांव से शुरू हुई थी। भविष्य की लड़ाई भी यहीं से शुरू होगी।
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उसने कहा, हम सब अभी भी गुलाम हैं। हमें आजादी के लिए लड़ना होगा। हमारा पानी लूटा जा रहा है। हमारे गुरु का अपमान किया जा रहा है। पंजाब के पूरे युवाओं को पंथ के लिए अपनी जान देने के लिए तैयार रहना चाहिए। अमृतपाल ने कहा कि बेअदबी करने वालों को न तो कोर्ट भेजा जाएगा और न ही पुलिस के हवाले किया जाएगा। हम उन्हें दंडित करेंगे। जो सिख नशे के आदी हो गए हैं, उन्हें फिर गुरु का अनुयायी बनाकर शास्त्र विद्या दी जाएगी।
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जालंधर। किसान आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले अभिनेता संदीप सिंह उर्फ दीप सिद्धू का ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन विवादों में आ गया है। दुबई से लौटे अमृतपाल सिंह को संगठन की कमान सौंपने से शुरू हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है। अमृतपाल सिंह ने सिख युवकों को पंथ और पंजाब की आजादी के लिए लड़ने का आह्वान किया है। जरनैल सिंह भिंडरांवाला की राह पर चलकर खालिस्तान की मांग करने वाले अमृतपाल सिंह के भाषणों को कट्टरवादी करार दिया जा रहा है। कई संगठनों ने इनका विरोध भी जताया है। अब दीप सिद्धू के परिवार ने भी अमृतपाल से किनारा कर लिया है।
विधानसभा चुनाव से पहले पिछले साल सितंबर में चंडीगढ़ में ‘वारिस पंजाब दे’ का गठन करते हुए दीप सिद्धू ने कहा था कि पंजाब के अधिकारों और संस्कृति की रक्षा करने, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे सामाजिक मुद्दों को उठाने और तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाना ही इसका मकसद होगा। सिद्धू पर दिल्ली पुलिस ने पिछले साल गणतंत्र दिवस पर किसानों के विरोध मार्च के दौरान लाल किले पर हिंसा और सिख झंडा फहराने में कथित भूमिका के लिए मामला दर्ज किया था। अब दीप सिद्धू के परिवार ने कहा है कि उनका अमृतपाल से किसी तरह का कोई संबंध नहीं है। वह आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले का अनुयायी होने का दावा करता है।
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जनरैल सिंह भिंडरांवाला के गांव में हुए दस्तारबंदी समारोह में अमृतपाल ने कहा था कि दीप सिद्धू सिख समुदाय के शहीद थे। सिद्धू जैसे लोग दुर्घटनाओं में कभी नहीं मर सकते। हम जानते हैं कि उनकी मृत्यु कैसे हुई। उन्हें किसने मारा। अमृतपाल ने कहा कि अतीत में हमारी लड़ाई इस गांव से शुरू हुई थी। भविष्य की लड़ाई भी यहीं से शुरू होगी।
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उसने कहा, हम सब अभी भी गुलाम हैं। हमें आजादी के लिए लड़ना होगा। हमारा पानी लूटा जा रहा है। हमारे गुरु का अपमान किया जा रहा है। पंजाब के पूरे युवाओं को पंथ के लिए अपनी जान देने के लिए तैयार रहना चाहिए। अमृतपाल ने कहा कि बेअदबी करने वालों को न तो कोर्ट भेजा जाएगा और न ही पुलिस के हवाले किया जाएगा। हम उन्हें दंडित करेंगे। जो सिख नशे के आदी हो गए हैं, उन्हें फिर गुरु का अनुयायी बनाकर शास्त्र विद्या दी जाएगी।