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Jalandhar News: सिविल अस्पताल की महिलाकर्मी पर आरोप, धोखे में रख एक लाख में बेची नवजात बच्ची
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-परिवार ने इंसाफ की लगाई गुहार, बेटी वापस दिलाने की रखी मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदकोट
स्थानीय सिविल अस्पताल में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां तैनात एक दर्जा चार महिलाकर्मी ने अभिभावकों को धोखे में रखकर उनकी नवजात बच्ची को एक लाख रुपये में बेच डाला। इस मामले में पीड़ित अभिभावकों ने इंसाफ की गुहार लगाते हुए उनकी बेटी को वापस दिलाने की मांग रखी है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उनके पास अभी तक इस मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं आई है।
फरीदकोट के गांव चहिल की रहने वाली अमृतपाल कौर पत्नी गुरमेल सिंह को डिलीवरी के लिए 27 मई की रात को फरीदकोट के सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। 28 मई की सुबह उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया था। अस्पताल रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल कौर व उसकी नवजन्मी बेटी को 30 मई को डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि मीडिया के सामने आए गुरमेल सिंह व उसकी पत्नी अमृतपाल कौर ने आरोप लगाया कि अस्पताल की महिला कर्मचारी रीतू ने उन्हें धोखे में रखते हुए उनकी बेटी को एक लाख रुपये में किसी को बेच दिया।
इस मामले में गुरमेल सिंह व उसकी पत्नी अमृतपाल कौर ने बताया कि अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाते समय ही रीतू ने उन्हें झांसा दिया कि उनकी बेटी बीमार है। उसे अभी बठिंडा अस्पताल में दाखिल करवाया जाएगा। उन्हें धोखे में रखते हुए बेटी को किसी के साथ भेज दिया और उन्हें जबरन एक लाख रुपये दे दिए। जब उन्हें अपने साथ हुए इस धोखे का आभास हुआ, तो उन्होंने एक लाख की रकम उक्त महिला कर्मचारी को वापस दे दी, लेकिन अभी तक उनकी बेटी को वापस नहीं दिया गया।
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एसएमओ बोले- 30 मई को डिस्चार्ज हो गई थी महिला
इस मामले में सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. परमजीत सिंह बराड़ ने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने अमृतपाल कौर को 30 मई वाले दिन डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बाद उनकी बाहर रास्ते में या घर पर किसी से क्या बातचीत हुई, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। न ही अभी तक उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को किसी तरह की लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है, तो यह बहुत गंभीर विषय है और शिकायत मिलने के बाद वह संबंधित महिला कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यह कर्मचारी करीब 10-12 वर्ष से विभाग में कार्यरत है और उसके खिलाफ पहले कोई शिकायत नहीं आई।
-- - फ़ोटो 05frd2 फरीदकोट के सिविल अस्पताल में जानकारी देते बच्ची के अभिभावक
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संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदकोट
स्थानीय सिविल अस्पताल में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां तैनात एक दर्जा चार महिलाकर्मी ने अभिभावकों को धोखे में रखकर उनकी नवजात बच्ची को एक लाख रुपये में बेच डाला। इस मामले में पीड़ित अभिभावकों ने इंसाफ की गुहार लगाते हुए उनकी बेटी को वापस दिलाने की मांग रखी है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उनके पास अभी तक इस मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं आई है।
फरीदकोट के गांव चहिल की रहने वाली अमृतपाल कौर पत्नी गुरमेल सिंह को डिलीवरी के लिए 27 मई की रात को फरीदकोट के सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। 28 मई की सुबह उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया था। अस्पताल रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल कौर व उसकी नवजन्मी बेटी को 30 मई को डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि मीडिया के सामने आए गुरमेल सिंह व उसकी पत्नी अमृतपाल कौर ने आरोप लगाया कि अस्पताल की महिला कर्मचारी रीतू ने उन्हें धोखे में रखते हुए उनकी बेटी को एक लाख रुपये में किसी को बेच दिया।
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इस मामले में गुरमेल सिंह व उसकी पत्नी अमृतपाल कौर ने बताया कि अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाते समय ही रीतू ने उन्हें झांसा दिया कि उनकी बेटी बीमार है। उसे अभी बठिंडा अस्पताल में दाखिल करवाया जाएगा। उन्हें धोखे में रखते हुए बेटी को किसी के साथ भेज दिया और उन्हें जबरन एक लाख रुपये दे दिए। जब उन्हें अपने साथ हुए इस धोखे का आभास हुआ, तो उन्होंने एक लाख की रकम उक्त महिला कर्मचारी को वापस दे दी, लेकिन अभी तक उनकी बेटी को वापस नहीं दिया गया।
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एसएमओ बोले- 30 मई को डिस्चार्ज हो गई थी महिला
इस मामले में सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. परमजीत सिंह बराड़ ने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने अमृतपाल कौर को 30 मई वाले दिन डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बाद उनकी बाहर रास्ते में या घर पर किसी से क्या बातचीत हुई, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। न ही अभी तक उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को किसी तरह की लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है, तो यह बहुत गंभीर विषय है और शिकायत मिलने के बाद वह संबंधित महिला कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यह कर्मचारी करीब 10-12 वर्ष से विभाग में कार्यरत है और उसके खिलाफ पहले कोई शिकायत नहीं आई।