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बीएसएफ का दायरा बढ़ाकर केंद्र ने एक और कानून पंजाब पर थोपा: राणा गुरजीत
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होशियारपुर। पंजाब के भूमि व जल संरक्षण, तकनीकी शिक्षा व रोजगार सृजन मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने शुक्रवार को यहां कहा कि बीएसएफ के 15 किलोमीटर दायरे को 50 किलोमीटर कर केंद्र सरकार ने पंजाब पर एक और कानून थोपा है, जिससे प्रदेश की तरक्की व विकास में रुकावट आएगी।
वह यहां भूमि व जल संरक्षण विभाग की ओर से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जमींदोज पाइपों के माध्यम से शोधित पानी सिंचाई के लिए प्रदान करने वाले प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने आए थे। सात गांवों के किसानों को मुहैया करवाने वाले 11.10 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट का नींव पत्थर रखने के बाद राणा गुरजीत ने कहा कि पहले केंद्र सरकार ने किसानों पर तीन कृषि कानून थोपे हैं और अब बीएसएफ को अतिरिक्त शक्तियां देने से एक और कानून पंजाबियों पर थोपा है। केंद्र के इस व्यवहार से न सिर्फ प्रदेश के सर्वपक्षीय विकास को चोट पहुंचेगी बल्कि पंजाब पर कर्जा और बढ़ने के साथ-साथ, उद्योग व व्यापार बुरी तरह प्रभावित होने से परिणामस्वरूप बेरोजगारी और बढ़ जाएगी।
पंजाब सरकार केंद्र के एक तरफा कानून का सख्त विरोध करेगी क्योंकि इस कार्रवाई से लोगों को दहशत के माहौल में रहना पड़ेगा। यदि केंद्र ने जबरदस्ती ऐसे फैसले लेने हैं तो उनकी ओर से 2011 में दिए गए प्रस्ताव के अनुसार जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान व गुजरात के सीमावर्ती जिलों को विशेष पैकेज दिए जाने चाहिए व इन जिलों में कम से कम 10 वर्ष के लिए उद्योगों पर कोई टैक्स नहीं लगना चाहिए।
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पंजाब के किसानों की हालत संबंधी बात करते हुए राणा गुरजीत सिंह ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केंद्र जानबूझ कर देशभर में प्रदर्शन कर रहे किसानों के हकों को नजरंदाज कर रहा है, जबकि देश का किसान पिछले एक वर्ष से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी के नजदीक रोष प्रकट कर रहा है। देश की तरक्की में अथाह योगदान डालने के बावजूद दिल्ली की सीमा पर एक वर्ष से धरना लगाए बैठे किसानों की केंद्र ने सुध नहीं ली। जायज किसानी मांगों की देश दुनिया में बात चल चुकी है पर केंद्र के कान पर जूं तक नहीं सरकी, जो कि दुखदायी है।
परियोजना के बारे में विवरण प्रदान करते हुए संभागीय मृदा संरक्षक अधिकारी नरेश गुप्ता ने कहा कि 30 एमएलडी की क्षमता वाले एमबीबीआर प्रौद्योगिकी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी सात गांवों- पिपलांवाला, पुरहीरां, बस्सी दौलत खान, सिंघड़ीवाला, कुरांगणां, पंडोरी रुकमाण और मड़ूली ब्राह्मणां के किसानों को सिंचाई के लिए आपूर्ति किया जाएगा। इस परियोजना से किसानों को खेतों और फसलों के लिए स्वस्थ पानी की सुविधा होगी और उन्हें पहले की तरह हानिकारक रसायनों से युक्त अनुपचारित पानी का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी।
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वह यहां भूमि व जल संरक्षण विभाग की ओर से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जमींदोज पाइपों के माध्यम से शोधित पानी सिंचाई के लिए प्रदान करने वाले प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने आए थे। सात गांवों के किसानों को मुहैया करवाने वाले 11.10 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट का नींव पत्थर रखने के बाद राणा गुरजीत ने कहा कि पहले केंद्र सरकार ने किसानों पर तीन कृषि कानून थोपे हैं और अब बीएसएफ को अतिरिक्त शक्तियां देने से एक और कानून पंजाबियों पर थोपा है। केंद्र के इस व्यवहार से न सिर्फ प्रदेश के सर्वपक्षीय विकास को चोट पहुंचेगी बल्कि पंजाब पर कर्जा और बढ़ने के साथ-साथ, उद्योग व व्यापार बुरी तरह प्रभावित होने से परिणामस्वरूप बेरोजगारी और बढ़ जाएगी।
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पंजाब सरकार केंद्र के एक तरफा कानून का सख्त विरोध करेगी क्योंकि इस कार्रवाई से लोगों को दहशत के माहौल में रहना पड़ेगा। यदि केंद्र ने जबरदस्ती ऐसे फैसले लेने हैं तो उनकी ओर से 2011 में दिए गए प्रस्ताव के अनुसार जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान व गुजरात के सीमावर्ती जिलों को विशेष पैकेज दिए जाने चाहिए व इन जिलों में कम से कम 10 वर्ष के लिए उद्योगों पर कोई टैक्स नहीं लगना चाहिए।
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पंजाब के किसानों की हालत संबंधी बात करते हुए राणा गुरजीत सिंह ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केंद्र जानबूझ कर देशभर में प्रदर्शन कर रहे किसानों के हकों को नजरंदाज कर रहा है, जबकि देश का किसान पिछले एक वर्ष से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी के नजदीक रोष प्रकट कर रहा है। देश की तरक्की में अथाह योगदान डालने के बावजूद दिल्ली की सीमा पर एक वर्ष से धरना लगाए बैठे किसानों की केंद्र ने सुध नहीं ली। जायज किसानी मांगों की देश दुनिया में बात चल चुकी है पर केंद्र के कान पर जूं तक नहीं सरकी, जो कि दुखदायी है।
परियोजना के बारे में विवरण प्रदान करते हुए संभागीय मृदा संरक्षक अधिकारी नरेश गुप्ता ने कहा कि 30 एमएलडी की क्षमता वाले एमबीबीआर प्रौद्योगिकी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी सात गांवों- पिपलांवाला, पुरहीरां, बस्सी दौलत खान, सिंघड़ीवाला, कुरांगणां, पंडोरी रुकमाण और मड़ूली ब्राह्मणां के किसानों को सिंचाई के लिए आपूर्ति किया जाएगा। इस परियोजना से किसानों को खेतों और फसलों के लिए स्वस्थ पानी की सुविधा होगी और उन्हें पहले की तरह हानिकारक रसायनों से युक्त अनुपचारित पानी का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी।