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आलुओं की बंपर पैदावार बन रही किसानो के लिए परेशानी
Updated Wed, 27 Dec 2017 10:01 PM IST
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आलू की बंपर पैदावार, नहीं मिल रहे खरीदार
कोल्ड स्टोर फुल, लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान
परेशान किसानों ने सड़क पर ही फेंक दिया आलू
नरिंदर वैद्य
जालंधर।
प्रदेश में हो रही आलूं की बंपर पैदावार किसानों के लिए मुसीबत का कारण बन गई है। प्रदेश में इस कदर आलू की पैदावार हुई है कि किसानों को फसल का खरीददार ही नही मिल रहा है। कोल्ड स्टोर पहले से ही आलू की फसल से फुल चल रहे हैं। किसान आल की फसल को सड़कों पर फेंकने को मजबूर हो गए हैं।
बुधवार को किसानों ने लम्मा पिंड चौक से जंडूसिंघा रोड कंगनीवाल के निकट आलू को सड़क पर फेंक दिया। किसानों की हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें आलू बीजने की लागत भी वसूल नहीं हो रही है। प्रदेश में पुराने आलू से पहले ही कोल्ड स्टोर भरे पड़े हैं। उस पर नए आलू की बंपर पैदावार के कारण मार्किट में किसानों को आलू का दाम लागत से भी कम मिल रहा है। थोक आलू विक्रेता भारत भूषण का कहना है कि पंजाब के साथ-साथ यूपी, बंगाल, गुजरात के गोदामों में आलू के ढेर लगे हैं, जिनका कोई खरीदार नही है। अकेले जालंधर में ही कम से कम 2 से 2.5 लाख बोरी पुराने आलू की पड़ी होगी। पुराना आलू 1 से 2 रुपये किलो बिक रहा है तो भला नए आलू को कोई 10 रुपये में क्यों खरीदेगा। किसानों का नया आलू 2 से 3 रुपये किलो तक बिक रहा है, इससे तो उनकी लागत भी पूरी नही हो सकती।
खेती के जानकार जसविंदर सिंह संघा का कहना है कि आलू की फसल लंबे समय से ही किसानों के लिए परेशानी का सबब रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि सरकार की आलू एक्सपोर्ट करने की कोई ठोस नीति नही है। देश में आलू की पैदावार भारी मात्रा में हो रही है। आलू की खपत बढ़ नहीं रही है। उन्होंने किसानों को बचाना है तो आलू के एक्सपोर्ट व इसकी खपत के बारे में गंभीरता से सोचना होगा, तभी इस समस्या का हल निकल सकता है, नहीं तो हर साल इसी तरह आलू सड़कों पर ही बिखरेगा।
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कोल्ड स्टोर फुल, लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान
परेशान किसानों ने सड़क पर ही फेंक दिया आलू
नरिंदर वैद्य
जालंधर।
प्रदेश में हो रही आलूं की बंपर पैदावार किसानों के लिए मुसीबत का कारण बन गई है। प्रदेश में इस कदर आलू की पैदावार हुई है कि किसानों को फसल का खरीददार ही नही मिल रहा है। कोल्ड स्टोर पहले से ही आलू की फसल से फुल चल रहे हैं। किसान आल की फसल को सड़कों पर फेंकने को मजबूर हो गए हैं।
बुधवार को किसानों ने लम्मा पिंड चौक से जंडूसिंघा रोड कंगनीवाल के निकट आलू को सड़क पर फेंक दिया। किसानों की हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें आलू बीजने की लागत भी वसूल नहीं हो रही है। प्रदेश में पुराने आलू से पहले ही कोल्ड स्टोर भरे पड़े हैं। उस पर नए आलू की बंपर पैदावार के कारण मार्किट में किसानों को आलू का दाम लागत से भी कम मिल रहा है। थोक आलू विक्रेता भारत भूषण का कहना है कि पंजाब के साथ-साथ यूपी, बंगाल, गुजरात के गोदामों में आलू के ढेर लगे हैं, जिनका कोई खरीदार नही है। अकेले जालंधर में ही कम से कम 2 से 2.5 लाख बोरी पुराने आलू की पड़ी होगी। पुराना आलू 1 से 2 रुपये किलो बिक रहा है तो भला नए आलू को कोई 10 रुपये में क्यों खरीदेगा। किसानों का नया आलू 2 से 3 रुपये किलो तक बिक रहा है, इससे तो उनकी लागत भी पूरी नही हो सकती।
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खेती के जानकार जसविंदर सिंह संघा का कहना है कि आलू की फसल लंबे समय से ही किसानों के लिए परेशानी का सबब रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि सरकार की आलू एक्सपोर्ट करने की कोई ठोस नीति नही है। देश में आलू की पैदावार भारी मात्रा में हो रही है। आलू की खपत बढ़ नहीं रही है। उन्होंने किसानों को बचाना है तो आलू के एक्सपोर्ट व इसकी खपत के बारे में गंभीरता से सोचना होगा, तभी इस समस्या का हल निकल सकता है, नहीं तो हर साल इसी तरह आलू सड़कों पर ही बिखरेगा।
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