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एमडी डाक्टर होने के बावजूद मरीजों के नही हो रहे डायलसिस
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डॉक्टर, मशीन मौजूद और डायलिसिस बंद
सिविल सर्जन और एसएमओ सुविधा देने पर झाड़ रहे पल्ला, मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
मोगा। सिविल अस्पताल में दो एमडी डॉटरों की तैनाती के बावजूद मरीज डायलिसिस की सुविधा से वांछित है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों में अधिक दाम देकर डायलिसिस करानी पड़ रही है। खास बात यह है कि सिविल अस्पताल में सरकार की ओर से डायलिसिस की सुविधा बिलकुल मुफ्त दी जाती है।
गांव मानूके गिल निवासी सुखमंदर सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि सिविल अस्पताल में सोमवार की सुबह अपनी माता अमरजीत कौर (55) का डायलिसिस कराने के लिए एमडी डॉक्टर के पास पहुंचे। एमडी डॉक्टर ने उन्हें एसएमओ के पास भेज दिया गया। इसके बाद उसे एपडीमोलोजिस्ट और वहां से सिविल सर्जन कार्यालय में भेज दिया गया। करीब एक घंटा चक्कर काटने के बाद सिविल सर्जन ने उन्हें जवाब दिया कि डॉक्टर तो हैं, निचले अधिकारियों की लापरवाही से सिविल अस्पताल में डायलिसिस नही हो रहे है। सुखमंदर सिंह ने बताया कि उसकी माता अमरजीत कौर की दोनों किडनियां खराब है। वह करीब चार माह से वह सिविल अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, उन्हें डायलिसिस की सुविधा नही मिल रही है। मजबूरी में उन्हें निजी अस्पताल से दो हजार रुपये देकर एक बार डायलिसिस करानी पड़ती है। सुखमंदर के अनुसार सप्ताह में दो बार उसकी माता का डायलिसिस होता है। हर बार उन्हें कोई न कोई बहाना बताकर सिविल अस्पताल से वापस भेज दिया जाता है।
उल्लेखनीय है कि 10 अगस्त 2018 को सिविल अस्पताल से एमडी मेडिसन डॉक्टर इशान शर्मा का तबादला हो गया था। इससे सिविल अस्पताल में डायलिसि बंद हो गई थी। दिसंबर 2018 में सरकार ने सिविल अस्पताल में दो एमडी डॉक्टरों को तैनात किया गया। इसके बावजूद डायलिसिस की सुविधा शुरू नही हो सकी।
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अधिकारियों की लापरवाही आ रही आड़े: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉक्टर अरविंदर पाल सिंह गिर का कहना है कि अस्पताल स्तर के अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं, यही कारण है कि मरीजों को सरकारी सुविधाओं में अड़चनें झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद दखल देकर जल्द से जल्द डायलिसिस की सुविधा को बहाल करवाएंगे।
एमडी डॉक्टरों को नही मिली है ट्रेनिंग: एसएमओ
सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. राजेश अत्री का कहना है कि उनके पास दो एमडी डॉक्टर तो आ गए है। दोनों को ही डायलिसिस की ट्रेनिंग नही मिली है। जल्द ही वह दोनों में से एक डा़टर को चंडीगढ़ ट्रेनिंग के लिए भेज रहें हैं, ताकि मरीजों को सिविल अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा जल्द मुहैया कराई जा सके।
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सिविल सर्जन और एसएमओ सुविधा देने पर झाड़ रहे पल्ला, मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
मोगा। सिविल अस्पताल में दो एमडी डॉटरों की तैनाती के बावजूद मरीज डायलिसिस की सुविधा से वांछित है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों में अधिक दाम देकर डायलिसिस करानी पड़ रही है। खास बात यह है कि सिविल अस्पताल में सरकार की ओर से डायलिसिस की सुविधा बिलकुल मुफ्त दी जाती है।
गांव मानूके गिल निवासी सुखमंदर सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि सिविल अस्पताल में सोमवार की सुबह अपनी माता अमरजीत कौर (55) का डायलिसिस कराने के लिए एमडी डॉक्टर के पास पहुंचे। एमडी डॉक्टर ने उन्हें एसएमओ के पास भेज दिया गया। इसके बाद उसे एपडीमोलोजिस्ट और वहां से सिविल सर्जन कार्यालय में भेज दिया गया। करीब एक घंटा चक्कर काटने के बाद सिविल सर्जन ने उन्हें जवाब दिया कि डॉक्टर तो हैं, निचले अधिकारियों की लापरवाही से सिविल अस्पताल में डायलिसिस नही हो रहे है। सुखमंदर सिंह ने बताया कि उसकी माता अमरजीत कौर की दोनों किडनियां खराब है। वह करीब चार माह से वह सिविल अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, उन्हें डायलिसिस की सुविधा नही मिल रही है। मजबूरी में उन्हें निजी अस्पताल से दो हजार रुपये देकर एक बार डायलिसिस करानी पड़ती है। सुखमंदर के अनुसार सप्ताह में दो बार उसकी माता का डायलिसिस होता है। हर बार उन्हें कोई न कोई बहाना बताकर सिविल अस्पताल से वापस भेज दिया जाता है।
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उल्लेखनीय है कि 10 अगस्त 2018 को सिविल अस्पताल से एमडी मेडिसन डॉक्टर इशान शर्मा का तबादला हो गया था। इससे सिविल अस्पताल में डायलिसि बंद हो गई थी। दिसंबर 2018 में सरकार ने सिविल अस्पताल में दो एमडी डॉक्टरों को तैनात किया गया। इसके बावजूद डायलिसिस की सुविधा शुरू नही हो सकी।
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अधिकारियों की लापरवाही आ रही आड़े: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉक्टर अरविंदर पाल सिंह गिर का कहना है कि अस्पताल स्तर के अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं, यही कारण है कि मरीजों को सरकारी सुविधाओं में अड़चनें झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद दखल देकर जल्द से जल्द डायलिसिस की सुविधा को बहाल करवाएंगे।
एमडी डॉक्टरों को नही मिली है ट्रेनिंग: एसएमओ
सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. राजेश अत्री का कहना है कि उनके पास दो एमडी डॉक्टर तो आ गए है। दोनों को ही डायलिसिस की ट्रेनिंग नही मिली है। जल्द ही वह दोनों में से एक डा़टर को चंडीगढ़ ट्रेनिंग के लिए भेज रहें हैं, ताकि मरीजों को सिविल अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा जल्द मुहैया कराई जा सके।