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कांग्रेस चाहती तो 1971 में मिल जाता करतारपुर साहिब: कालिया

Sat, 05 Jan 2019 09:30 PM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Sat, 05 Jan 2019 09:30 PM IST
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कांग्रेस चाहती तो 1971 में मिल जाता करतारपुर साहिब: कालिया
कांग्रेस चाहती तो 1971 में मिल जाता करतारपुर साहिब: कालिया
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बोले, कैप्टन अमरिंदर हैं झांसें के राजा जिन्होंने इतिहास को तोड़ मरोड़ कर किया पेश
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब आगमन पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा दिये बयान का जवाब देते हुए भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया ने कहा ने कहा कि कैप्टन ने दोषारोपण करते समय आइना नहीं देखा क्या? कालिया ने कहा कि 1969 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने सार्वजनिक तौर पर वादा किया था कि भारत की भूमि का कोई टुकड़ा पाकिस्तान को देकर करतारपुर साहिब से बदल लिया जाएगा, लेकिन यह सिर्फ घोषणा ही रह गई और यथार्थ में कुछ भी नहीं हुआ। कालिया ने कहा कि अगर कांग्रेस इस कार्य के लिए सचमुच संजीदा होती तो 1971 में भारत-पाक के युद्ध के बाद शिमला समझौते के समय ही यह शर्त लगाई जा सकती थी कि भारतीय सेना की ओर से पाकिस्तान की कब्जे में ली गई भूमि और 93 हजार युद्ध बंदियों को तभी छोड़ा जाएगा जब करतारपुर साहिब का भारत में विलय हो, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कालिया ने कहा कि अगर करतारपुर साहिब कॉरिडोर का मुद्दा जनरल बाजवा और नवजोत सिंह सिद्धू तक ही सिमित रहता तो कभी भी पंजाबियों का सपना पूरा न होता। इसका सारा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को ही जाता है, जिनके प्रयासों से करतारपुर साहिब कॉरिडोर का सपना पूरा हुआ है। कालिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि कैप्टन अमरिंदर सिंह झांसे के राजा है, जिन्होंने जनता के सामने इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया।
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