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पंजाब में ड्रग और सामाजिक-आर्थिक सर्वे: 28 हजार कर्मी पहुंचेंगे 65 लाख परिवारों तक, पहचान रहेगी गोपनीय
Thu, 02 Apr 2026 08:10 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 02 Apr 2026 08:10 AM IST
सार
यह सर्वे पहले 11 गांवों में ट्रायल के तौर पर किया गया था जो सफल रहा। अब इसे एक अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। इस कार्य को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने इस पहल के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
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सर्वे
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
पंजाब में ड्रग और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण शुरू हो गया है। राज्य के करीब 28 हजार कर्मचारी इस अभियान में जुटे हैं और लगभग 65 लाख परिवारों से जानकारी एकत्र करेंगे।
सर्वे का उद्देश्य यह जानना है कि नशे की लत से कितने लोग प्रभावित हैं, कब से प्रभावित हैं और उनके परिवारों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति कैसी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सर्वे के दौरान एकत्र की जाने वाली जानकारी में किसी भी व्यक्ति की पहचान उजागर न हो। उन्होंने कहा कि यह सर्वे सरकार के ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान को मजबूती देगा और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए नीतिगत बदलाव करने में मदद करेगा।
सरकार के अनुसार इस सर्वे से नशे के दायरे और उसके प्रभाव की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। इसमें यह भी पता लगाया जाएगा कि कौन-कौन से मादक पदार्थ अधिक प्रचलन में हैं और उनका समाज पर क्या असर पड़ रहा है। साथ ही रोजगार, गरीबी और शिक्षा जैसे सामाजिक-आर्थिक कारकों पर इसके प्रभाव का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
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यह सर्वे पहले 11 गांवों में ट्रायल के तौर पर किया गया था जो सफल रहा। अब इसे एक अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। इस कार्य को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने इस पहल के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है जो अन्य विभागों के साथ मिलकर घर-घर जाकर सर्वे करेगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से नशे के खिलाफ रणनीति अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बन सकेगी।
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सर्वे का उद्देश्य यह जानना है कि नशे की लत से कितने लोग प्रभावित हैं, कब से प्रभावित हैं और उनके परिवारों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति कैसी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सर्वे के दौरान एकत्र की जाने वाली जानकारी में किसी भी व्यक्ति की पहचान उजागर न हो। उन्होंने कहा कि यह सर्वे सरकार के ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान को मजबूती देगा और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए नीतिगत बदलाव करने में मदद करेगा।
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सरकार के अनुसार इस सर्वे से नशे के दायरे और उसके प्रभाव की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। इसमें यह भी पता लगाया जाएगा कि कौन-कौन से मादक पदार्थ अधिक प्रचलन में हैं और उनका समाज पर क्या असर पड़ रहा है। साथ ही रोजगार, गरीबी और शिक्षा जैसे सामाजिक-आर्थिक कारकों पर इसके प्रभाव का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
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यह सर्वे पहले 11 गांवों में ट्रायल के तौर पर किया गया था जो सफल रहा। अब इसे एक अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। इस कार्य को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने इस पहल के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है जो अन्य विभागों के साथ मिलकर घर-घर जाकर सर्वे करेगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से नशे के खिलाफ रणनीति अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बन सकेगी।