रोम में पंजाब की बेटी ने रोशन किया नाम: मेडिकल में टॉप कर पंजाबन गुरजीत कौर ने इटली के राष्ट्रपति से लिया सम्मान
पंजाब के लिए गर्व करने वाली खबर है। कपूरथला की बेटी ने इटली के राष्ट्रपति के हाथों सम्मान हासिल किया है। गुरजीत कौर 13 साल से पढ़ाई में लगातार टॉप कर रही हैं। रोम में आयोजित सम्मान समारोह में 25 टॉपर विद्यार्थियों में यह सम्मान हासिल करने वालीं वे एकमात्र पंजाबी रही हैं। कपूरथला के समीपवर्ती गांव सुन्नड़्वाल की मूल निवासी गुरजीत कौर पर आज हर किसी को नाज है।
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विस्तार
इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मेट्टारोला ने ‘पंजाबन’ गुरजीत कौर को टॉप करने के लिए सम्मानित किया है। रोम स्थित राष्ट्रपति हाउस में गत दिवस आयोजित सम्मान समारोह में सम्मानित होने वाले 25 टॉपर विद्यार्थियों में कपूरथला के समीपतर्वी गांव सुन्नड़वाल की मूल निवासी गुरजीत कौर एकमात्र पंजाबी थीं। यहीं नहीं, गुरजीत कौर 13 साल से लगातार हर कक्षा में टॉप करती आ रही हैं। इटली के राष्ट्रपति के हाथों शैक्षणिक स्तर का उच्चतम सम्मान हासिल करके गुरजीत कौर गदगद हैं, वहीं, गांव सुन्नड़वाल में उसके दादा-दादी व पूरा गांववासी भी मान महसूस कर रहे हैं।
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पहली बार किसी भारतीय को ऐसा सम्मान
इटली के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी भारतीय को किसी शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रपति की ओर से पुरस्कृत किया गया है। गुरजीत कौर अपनी प्रारंभिक पढ़ाई मुकम्मल करने के बाद इटली के रोम शहर स्थित कतोलीको यूनिवर्सिटी में मेडिकल की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। उनके पिता जसवंत सिंह व माता मनजीत कौर दक्षिणी इटली की पूलिया स्टेट में एक खेती फार्म में काम करते हैं। गुरजीत कौर के गांव सुन्नड़वाल में खुशी का आलम हैं। अपनी पोती की उपलब्धि पर दादा संतोख सिंह व दादी जीत कौर फख्र महसूस कर रहे हैं।
छह साल की उम्र में चली गईं थी विदेश
उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। भावुक दादी जीत कौर कहती हैं कि जब मेरे घर पोतियों ने जन्म लिया था, तो मुझे फिक्र रहता थी कि मेरे बेटों के कोई बेटा नहीं है, लेकिन इस बेटी ने तो बेटों से बढ़कर काम किया है। कभी सोचा नहीं थी कि एक दिन पोती पूरी दुनिया में गांव का नाम रोशन कर देगी।
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दादा संतोख सिंह ने कहा कि लगातार बधाई देने वालों के फ़ोन आ रहे हैं। जब भी गुरजीत गांव आती है, तब भी पढ़ती ही रहती थी, लेकिन आज उन्हें पता चला कि शिक्षा कितनी मूल्यवान है। दादा ने बताया कि गुरजीत कौर छह साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ 1996 में विदेश चली गई। उसने प्राइमरी की पहली दो कक्षाएं काला संघिया के एक निजी स्कूल से पास कीं।
कैंसर की डॉक्टर बनकर गांव आउंगी: गुरजीत कौर
गुरजीत कौर ने इटली से फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि उनको पंजाब की दो कक्षाओं का इटली में बहुत फ़ायदा मिला, क्योंकि पंजाब में अध्यापक बच्चों को मेहनत करने और पढ़ाई पर एकाग्रता के लिए प्रेरित करते हैं। इससे प्रेरणा लेकर अपनी पढ़ाई पर फोकस किया। शुरुआती दौर में इटालियन व अंग्रेजी भाषा सीखने में बेहद मुश्किल आई, पर छोटी उम्र की होने के कारण जल्द ही विदेशी भाषाओं पर पकड़ बना ली।
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भारतीयों की करती हैं मदद
उन्होंने कहा कि हर मुश्किल घड़ी में माता-पिता ने बहुत साथ दिया और इटली के टीचरों ने भी उसे बेहद प्रोत्साहित किया। गुरजीत ने कहा कि वह पंजाब की सेहत सहूलियतों को लेकर फिक्रमंद रहती हैं। वह अब मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं। डॉक्टर बनना सपना है और कैंसर की डॉक्टर बनकर ही वे गांव सुन्नड़वाल आएंगी। यहां इटली में भारतीयों को कागजी कार्रवाई मुकम्मल करने के लिए बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे भारतीयों की वे यहां मदद करती हैं।
मंत्री राणा ने सरपंच को दी बधाई
गांव सुन्नड़वाल के सरपंच तिरलोचन सिंह गोशी, पंच तारा सिंह, क्लब प्रधान बलदेव देबी आदि ने कहा कि गुरजीत कौर ने गांव का नाम चमकाया है। गुरजीत कौर गांव आएंगी, तो पंचायत सम्मान करेगी। सरपंच ने बताया कि गुरजीत की इस उपलब्धि के लिए कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने उन्हें बधाई दी है।