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Moga: मोगा सिविल अस्पताल में महिला की मौत के बाद हंगामा, परिवार ने शव रख सड़क पर लगाया जाम
Thu, 05 Jun 2025 12:52 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 05 Jun 2025 12:52 PM IST
सार
तीन जून को ज्योति का हर्निया का ऑपरेशन मोगा सिविल अस्पताल में किया गया था। ऑपरेशन के बाद से ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसे तेज दर्द होने लगा। जब डॉक्टरों को इस बारे में बताया, तो उन्होंने केवल दर्द की इंजेक्शन देकर कहा मरीज के हाथ-पैर बांध दो।
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मोगा सिविल अस्पताल के बाहर प्रदर्शन
- फोटो : संवाद
विस्तार
मोगा सिविल अस्पताल में एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। मृतका की पहचान 30 वर्षीय ज्योति के रूप में हुई है, जिसकी 3 जून को हर्निया की सर्जरी हुई थी। सर्जरी के बाद से ही उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा न होने के कारण उसे 4 जून की रात एक प्राइवेट अस्पताल में रेफर किया गया। लेकिन एंबुलेंस में ले जाते समय रास्ते में ही ज्योति की मौत हो गई।
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गुस्साए परिजनों ने वीरवार सुबह अस्पताल के मुख्य गेट के सामने सड़क पर शव रख कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने डॉक्टर पर लापरवाही और गलत ऑपरेशन का आरोप लगाया तथा मांग की कि दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और मृतका के दो मासूम बच्चों को न्याय दिलाया जाए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और हालात को शांत करने की कोशिश की। फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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परिवार वालों का कहना है कि 3 जून को ज्योति का हर्निया का ऑपरेशन मोगा सिविल अस्पताल में किया गया था। ऑपरेशन के बाद से ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसे तेज दर्द होने लगा। जब डॉक्टरों को इस बारे में बताया, तो उन्होंने केवल दर्द की इंजेक्शन देकर कहा मरीज के हाथ-पैर बांध दो। स्थिति लगातार बिगड़ती गई, लेकिन समय पर कोई सही इलाज नहीं किया गया। जब ज्योति की हालत बेहद गंभीर हो गई, तब उसे रेफर किया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उसकी मौत हो गई।
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सरकार एक तरफ दावा करती है कि सरकारी अस्पतालों में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। डॉक्टरों की लापरवाही के कारण एक गरीब महिला की जान चली गई। यदि अस्पताल में उचित सुविधाएं नहीं थीं, तो पहले ही हमें बता देते, हम ऑपरेशन नहीं करवाते। मृतका के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। हमारे मांग है कि लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर को तत्काल बर्खास्त किया जाए। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए। जब तक अस्पताल प्रशासन की ओर से हमें लिखित रूप में आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक हमारा धरना जारी रहेगा।
मोगा एसएमओ डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि 3 जून को ज्योति नाम की एक महिला की हर्निया की सर्जरी की गई थी। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत सामान्य थी, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें थोड़ी तकलीफ होने लगी। अस्पताल की ओर से जो भी आवश्यक इलाज था, वह किया गया। जब मरीज की हालत और बिगड़ने लगी, तो उन्हें रेफर कर दिया गया। रेफर करने के दौरान, एंबुलेंस में ले जाते समय मरीज की मृत्यु हो गई। एसएमओ ने कहा कि परिवार की और से जो आरोप लगाया गया, लिखित में शिकायत दे तो हम उस पर जांच करेंगे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के असली कारण का पता चल पाएगा।