सुखबीर बादल का इस्तीफा मंजूर: वर्किंग कमेटी ने लिया फैसला, एक मार्च को प्रधान पद के लिए होगा चुनाव
शिअद की कार्यसमिति की बैठक शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुई। बैठक में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल के इस्तीफे को मंजूर कर लिया गया है। सूत्रों का दावा है कि अन्य नेताओं के इस्तीफे भी मंजूर किए गए हैं।
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आखिरकार 30 साल बाद शिरोमणि अकाली दल की कमान बादल परिवार के हाथ से छूट गई। शिअद की शुक्रवार को चंडीगढ़ में पार्टी कार्यालय में हुई कार्य समिति की बैठक में सुखबीर बादल द्वारा अध्यक्ष पद से दिए गए इस्तीफे को मंजूर कर लिया गया। तीन दशकों तक अकाली दल की कमान बादल परिवार के हाथों में रही। सत्ता के समय प्रदेश में हुई बेअदबी की घटनाओं और अन्य गलतियों की वजह से ही बादल परिवार आज इस स्थिति पर पहुंच गया है।
अकाली दल की कार्य समिति की बैठक कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ की अध्यक्षता में हुई, जोकि देर शाम 6 बजे तक चली। पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने जानकारी देते हुए बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब से सुनाई गई धार्मिक सजा को पूरा करते हुए पूर्व प्रधान सुखबीर बादल के इस्तीफे को मंजूर कर लिया गया है। इसी के साथ नई कमेटी गठित किए जाने और अकाली दल के नए प्रधान का चुनाव 1 मार्च को कराए जाने का निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि 16 नवंबर 2024 को सुखबीर बादल ने इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद तनखाइया करार सुखबीर बादल को श्री अकाल तख्त साहिब पर धार्मिक सजा सुनाई गई थी। धार्मिक सजा पूरी करने के बाद जब अकाल तख्त के निर्देश यानी सुखबीर के इस्तीफे को मंजूर किए जाने में देरी की जा रही थी, तब बीते दिनों अकाल तख्त ने सख्ती से उनके आदेशों का पालन करने के लिए कहा था, जिसके बाद कार्य समिति की बैठक बुलाई गई।
राणिके मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त
डॉ. चीमा ने कहा कि नए संगठनात्मक गठन के लिए 20 जनवरी से 20 फरवरी तक सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। 25 लाख नए सदस्य बनाए जाएंगे। चीमा ने कहा कि पार्टी के टकसाली नेता व पूर्व मंत्री गुलजार सिंह राणिके को 1 मार्च को होने वाले चुनाव के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है। कार्यकारी अध्यक्ष भूंदड़ ने डॉ. दलजीत सिंह चीमा को चुनाव प्रक्रिया के कोऑर्डिनेशन के लिए सचिव नियुक्त किया है।
पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल को हटाने के भी हुए थे प्रयास
पार्टी के सीनियर लीडरों की मानें तो पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल को भी पार्टी प्रधान पद से हटाने के प्रयास हुए थे। वर्ष 1999 में तत्कालीन एसजीपीसी प्रधान गुरचरण सिंह टोहड़ा ने उन्हें पार्टी का पद छोड़ने को कहा था। हालांकि पार्टी में उस वक्त प्रकाश सिंह बादल का पूरी तरह से दबदबा था। जिस वजह से बादल तो प्रधान बने रहे, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां बनीं कि टोहड़ा को एसजीपीसी का प्रधान पद छोड़ना पड़ गया।
ये नेता इन क्षेत्रों की संभालेंगे जिम्मेदारी
1 मार्च को प्रधान पद के नए चेहरे और उससे पहले सदस्यता अभियान के लिए कार्यकारी अध्यक्ष भूंदड़ ने कई नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी है। डॉ. चीमा ने बताया कि एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी को जम्मू-कश्मीर और होशियारपुर, किरपाल सिंह बडुंगर को मालवा क्षेत्र, मनप्रीत सिंह अयाली को राजस्थान, संत सिंह उमैदपुर को हिमाचल प्रदेश, इकबाल सिंह झूंदा को मलेरकोटला, परमजीत सिंह सरना को दिल्ली, मंजीत सिंह जीके को उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड और रघुजीत सिंह विर्क को हरियाणा की जिम्मेदारी दी गई है।
पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद से ही वरिष्ठ नेताओं ने सुखबीर बादल पर निशाना साधना शुरू कर दिया। पार्टी प्रधान को बदलने की मांग उठने ली। सुखबीर प्रधानगी छोड़ने को राजी नहीं हुए तो कई वरिष्ठ नेताओं ने शिअद का साथ छोड़ अलग पार्टी तक बना ली। प्रेम सिंह चंदूमाजरा, गुरप्रताप वडाला और बीबी जागीर कौर समेत कई नेताओं ने सुधार लहर को शिअद के बराबर खड़ा कर दिया। बेअदबी के मामलों को लगातार उठाकर सुखबीर पर इस्तीफे के लिए दबाव डाला।