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आधुनिक सेना: बॉर्डर पर नाइट विजन चश्मों से दुश्मनों पर नजर... तीन डिग्री तापमान में जंगलों में स्पेशल ट्रेनिंग
Sun, 05 Jan 2025 11:28 AM IST
शाहरुख खान
सूरज प्रकाश, अमर उजाला, पठानकोट
सूरज प्रकाश, अमर उजाला, पठानकोट
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 05 Jan 2025 11:28 AM IST
सार
बॉर्डर पर सेना के जवान नाइट विजन चश्मों से पांच किलोमीटर तक दुश्मनों की हरकत पर नजर रख सकेंगे। रात को तीन डिग्री तापमान में सेना के जवान पठानकोट के जंगलों में स्पेशल ट्रेनिंग कर रहे हैं। 20-20 के ग्रुप बनाकर अभ्यास कर रहे हैं।
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जंगलों में रात को तीन डिग्री तापमान में विशेष अभ्यास
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सेना के जवान अब बॉर्डर पर नाइट विजन चश्मों से पांच किलोमीटर तक दुश्मनों की हरकत पर नजर रख सकेंगे। इसके लिए पठानकोट के मामून कैंट के साथ लगते जंगलों में रात को 3 डिग्री तापमान में विशेष अभ्यास चल रहा है।
इस अभ्यास को शारीरिक सहनशक्ति, सामरिक कौशल और अगली पीढ़ी के हथियारों के इस्तेमाल पर केंद्रित किया गया है। यहां जवानों को रात की ड्यूटी के समय आने वाली मुश्किल चुनौतियों से निपटने में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
कम दृश्यता में नाइट विजन चश्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक सप्ताह से चल रहे अभ्यास में जवानों के कंपीटिशन भी करवाया जा रहा है। रोज रात को मामून कैंट के जंगलों में 20-20 के ग्रुप में जवान अभ्यास कर रहे हैं।
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यहां जवानों को टास्क भी दिए जा रहे हैं, जिसे उन्हें निर्धारित समय में पूरा करना होता है। उच्च अधिकारियों ने बताया कि कड़ाके की ठंड में कई बार ट्रेनिंग का समय आगे बढ़ा दिया जाता है, तो जवान कहते हैं कि हम तैयार हैं और टास्क पूरा करके रहेंगे। ड्रोन व नाइट विजन कैमरों से जवानों के अभ्यास की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी की जा रही है।
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इस अभ्यास को शारीरिक सहनशक्ति, सामरिक कौशल और अगली पीढ़ी के हथियारों के इस्तेमाल पर केंद्रित किया गया है। यहां जवानों को रात की ड्यूटी के समय आने वाली मुश्किल चुनौतियों से निपटने में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
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कम दृश्यता में नाइट विजन चश्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक सप्ताह से चल रहे अभ्यास में जवानों के कंपीटिशन भी करवाया जा रहा है। रोज रात को मामून कैंट के जंगलों में 20-20 के ग्रुप में जवान अभ्यास कर रहे हैं।
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यहां जवानों को टास्क भी दिए जा रहे हैं, जिसे उन्हें निर्धारित समय में पूरा करना होता है। उच्च अधिकारियों ने बताया कि कड़ाके की ठंड में कई बार ट्रेनिंग का समय आगे बढ़ा दिया जाता है, तो जवान कहते हैं कि हम तैयार हैं और टास्क पूरा करके रहेंगे। ड्रोन व नाइट विजन कैमरों से जवानों के अभ्यास की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी की जा रही है।
अब मैनुअल नहीं, डिजिटली नोट होगा डाटा
पहले रात की ड्यूटी से संबंधित डाटा मैनुअल रखना पड़ता था, लेकिन अब यह डिजिटली ऑटोमेटिक नोट हो रहा है। नाइट विजन कैमरों की मदद से बॉर्डर व घने जंगलों में दुश्मन की किसी भी हरकत पर अब नजर रखना आसान हो जाएगा। सेना के उच्च अधिकारियों का कहना है कि यह अभ्यास जवानों में काफी हद तक बदलाव ला रहा है। अभी यह ट्रेनिंंग सिर्फ मामून क्षेत्र में ही हो रही है। बाद में इसे और जगह भी शुरू किया जाएगा।
पहले रात की ड्यूटी से संबंधित डाटा मैनुअल रखना पड़ता था, लेकिन अब यह डिजिटली ऑटोमेटिक नोट हो रहा है। नाइट विजन कैमरों की मदद से बॉर्डर व घने जंगलों में दुश्मन की किसी भी हरकत पर अब नजर रखना आसान हो जाएगा। सेना के उच्च अधिकारियों का कहना है कि यह अभ्यास जवानों में काफी हद तक बदलाव ला रहा है। अभी यह ट्रेनिंंग सिर्फ मामून क्षेत्र में ही हो रही है। बाद में इसे और जगह भी शुरू किया जाएगा।