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Punjab By Election: उपचुनाव से शिअद का किनारा, क्या SGPC चुनाव से बचेगा शिअद के राजनीतिक वजूद?, बागी गुट हावी
Thu, 24 Oct 2024 04:14 PM IST
अंकेश ठाकुर
विशाल पाठक, चंडीगढ़
विशाल पाठक, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Thu, 24 Oct 2024 04:14 PM IST
सार
Punjab By Election: चार विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव से शिअद ने किनारा कर लिया है। पार्टी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। वहीं अब पार्टी के पास अपना राजनीतिक वजूद बचाने के लिए एसजीपीसी चुनाव अहम हो गया है। हालांकि यहां भी शिअद का बागी गुट पार्टी पर हावी है।
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एसजीपीसी सदस्यों की बैठक। फाइल फोटो
- फोटो : X @Akali_Dal_
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विस्तार
पंजाब विधानसभा की चार सीटों पर उपचुनाव लड़ने से शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने इनकार कर दिया है। हालांकि पार्टी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) चुनाव लड़ेगी।
ऐसे में अब एसजीपीसी चुनाव शिअद के राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए अहम बन गया है। शिअद प्रमुख सुखबीर बादल के तनखाइया घोषित होने के बाद से लगातार बागी गुट (सुधार लहर) उन पर और शिअद पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। शिअद का दावा है कि अब राजनीतिक साजिशें रच कर एसजीपीसी पर कब्जे करने की तैयारी की जा रही है।
यहां तक कि पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा की अगुवाई में सिंह साहिबानों के आगे तनखाइया घोषित सुखबीर बादल को राहत देने की फरियाद भी बेअसर हो गई है। जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ज्ञानी रघबीर सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक तनखाइया की तनख्वाह पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि अब सुखबीर बादल गिद्दड़बाहा से उपचुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। दरअसल पंजाब में चार सीटों पर उपचुनाव के साथ शिअद मुख्य रूप से एसजीपीसी चुनाव में पार्टी के प्रमुख सुखबीर बादल के नेतृत्व में अपना राजनीतिक वजूद बचाने के प्रयास में थी, जिसे बड़ा झटका लगा है।
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2011 से एसजीपीसी पर बादल का रहा है प्रभाव
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आखिरी चुनाव 2011 में हुए थे। 2011 से अब तक दो बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। नियमों के मुताबिक हर पांच साल पर एसजीपीसी के चुनाव होने चाहिए थे, लेकिन कई राजनीतिक कारणों से यह चुनाव नहीं कराए गए। 2011 में एसजीपीसी के 170 सदस्य थे, बीते 13 साल में 30 से ज्यादा सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है। प्रदेश में शिअद की सरकार रहते हुए और कई अन्य कारणों से 13 साल से एसजीपीसी के चुनाव नहीं कराए गए। 2022 में आप के प्रदेश में आने के बाद सीएम भगवंत मान सरकार ने फौरन गृह मंत्रालय से एसजीपीसी चुनाव कराने की मांग की थी।
बदल गई परिस्थितियां
आज भी एसजीपीसी के सदस्यों में सुखबीर बादल की पकड़ है, लेकिन प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार आने, केंद्र की भाजपा सरकार के साथ शिअद का गठबंधन टूटने और शिअद सुधार लहर के नाम से बागी गुट तैयार होने से एसजीपीसी चुनाव को लेकर परिस्थितियां एकदम से बदलती नजर आ रही हैं।
प्रदेश की राजनीति में एसजीपीसी का चुनाव बहुत अहम
पंजाब में एसजीपीसी का चुनाव इसलिए भी बहुत अहम है, क्योंकि यह सिख बाहुल्य क्षेत्र के साथ पंथक मुद्दों की यहां अपनी अहमियत है। शिरोमणि अकाली दल का जन्म पंथक मुद्दों और सिख समुदाय के अधिकारों के हनन होने से बचाने के लिए किया गया था। ऐसे में एसजीपीसी चुनाव से अगर शिअद दूरी बना लेता है या इस चुनाव में शिअद अपने वर्चस्व और साख को साबित नहीं कर पाता है तो प्रदेश में शिअद राजनीतिक वजूद भी खत्म हो जाएगा। दरअसल शिरोमणि अकाली दल की सरकार के समय प्रदेश में हुई बेअदबी की घटनाओं का ही यह नतीजा है कि आज शिअद प्रदेश में वोट बैंक की राजनीति में भाजपा से पीछे चली गई है।
शिअद का दावा, एसजीपीसी पर कब्जे की तैयारी
पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि उन्हें एसजीपीसी से जुड़े लोगों से कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं, जोकि यह साबित करता है कि एसजीपीसी पर केंद्र की भाजपा, आरएसएस और आम आदमी पार्टी अपनी ताकतों का इस्तेमाल कर कब्जा करने की तैयारी में है। बागी गुट सुधार लहर की ओर से एसजीपीसी चुनाव के लिए प्रस्तावित किए बीबी जागीर कौर को केंद्र और आप दोनों मिलकर समर्थन दे रही है, ताकि शिअद का वजूद पूरी तरह से खत्म किया जा सके। जत्थेदार की ओर से सुखबीर सिंह बादल के तनखाइया घोषित किए जाने पर दीपावली के बाद फैसले लिए जाने की घोषणा ने प्रदेश में उपचुनाव को लेकर भी शिअद की राह मुश्किल कर दी है।
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ऐसे में अब एसजीपीसी चुनाव शिअद के राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए अहम बन गया है। शिअद प्रमुख सुखबीर बादल के तनखाइया घोषित होने के बाद से लगातार बागी गुट (सुधार लहर) उन पर और शिअद पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। शिअद का दावा है कि अब राजनीतिक साजिशें रच कर एसजीपीसी पर कब्जे करने की तैयारी की जा रही है।
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यहां तक कि पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा की अगुवाई में सिंह साहिबानों के आगे तनखाइया घोषित सुखबीर बादल को राहत देने की फरियाद भी बेअसर हो गई है। जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ज्ञानी रघबीर सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक तनखाइया की तनख्वाह पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि अब सुखबीर बादल गिद्दड़बाहा से उपचुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। दरअसल पंजाब में चार सीटों पर उपचुनाव के साथ शिअद मुख्य रूप से एसजीपीसी चुनाव में पार्टी के प्रमुख सुखबीर बादल के नेतृत्व में अपना राजनीतिक वजूद बचाने के प्रयास में थी, जिसे बड़ा झटका लगा है।
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2011 से एसजीपीसी पर बादल का रहा है प्रभाव
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आखिरी चुनाव 2011 में हुए थे। 2011 से अब तक दो बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। नियमों के मुताबिक हर पांच साल पर एसजीपीसी के चुनाव होने चाहिए थे, लेकिन कई राजनीतिक कारणों से यह चुनाव नहीं कराए गए। 2011 में एसजीपीसी के 170 सदस्य थे, बीते 13 साल में 30 से ज्यादा सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है। प्रदेश में शिअद की सरकार रहते हुए और कई अन्य कारणों से 13 साल से एसजीपीसी के चुनाव नहीं कराए गए। 2022 में आप के प्रदेश में आने के बाद सीएम भगवंत मान सरकार ने फौरन गृह मंत्रालय से एसजीपीसी चुनाव कराने की मांग की थी।
बदल गई परिस्थितियां
आज भी एसजीपीसी के सदस्यों में सुखबीर बादल की पकड़ है, लेकिन प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार आने, केंद्र की भाजपा सरकार के साथ शिअद का गठबंधन टूटने और शिअद सुधार लहर के नाम से बागी गुट तैयार होने से एसजीपीसी चुनाव को लेकर परिस्थितियां एकदम से बदलती नजर आ रही हैं।
प्रदेश की राजनीति में एसजीपीसी का चुनाव बहुत अहम
पंजाब में एसजीपीसी का चुनाव इसलिए भी बहुत अहम है, क्योंकि यह सिख बाहुल्य क्षेत्र के साथ पंथक मुद्दों की यहां अपनी अहमियत है। शिरोमणि अकाली दल का जन्म पंथक मुद्दों और सिख समुदाय के अधिकारों के हनन होने से बचाने के लिए किया गया था। ऐसे में एसजीपीसी चुनाव से अगर शिअद दूरी बना लेता है या इस चुनाव में शिअद अपने वर्चस्व और साख को साबित नहीं कर पाता है तो प्रदेश में शिअद राजनीतिक वजूद भी खत्म हो जाएगा। दरअसल शिरोमणि अकाली दल की सरकार के समय प्रदेश में हुई बेअदबी की घटनाओं का ही यह नतीजा है कि आज शिअद प्रदेश में वोट बैंक की राजनीति में भाजपा से पीछे चली गई है।
शिअद का दावा, एसजीपीसी पर कब्जे की तैयारी
पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि उन्हें एसजीपीसी से जुड़े लोगों से कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं, जोकि यह साबित करता है कि एसजीपीसी पर केंद्र की भाजपा, आरएसएस और आम आदमी पार्टी अपनी ताकतों का इस्तेमाल कर कब्जा करने की तैयारी में है। बागी गुट सुधार लहर की ओर से एसजीपीसी चुनाव के लिए प्रस्तावित किए बीबी जागीर कौर को केंद्र और आप दोनों मिलकर समर्थन दे रही है, ताकि शिअद का वजूद पूरी तरह से खत्म किया जा सके। जत्थेदार की ओर से सुखबीर सिंह बादल के तनखाइया घोषित किए जाने पर दीपावली के बाद फैसले लिए जाने की घोषणा ने प्रदेश में उपचुनाव को लेकर भी शिअद की राह मुश्किल कर दी है।