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खर्च बचाने की कवायद: पंजाब में अब AI सर्वे के बाद होगा सड़कों का निर्माण, 200 करोड़ बचाने का लक्ष्य
Tue, 10 Dec 2024 08:07 AM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 10 Dec 2024 08:07 AM IST
सार
एआई सर्वे में विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि सही मायने में कौन सी व कितने मिलोमीटर सड़क को रिपेयर की जरुरत है। इसी तरह बीएंडआर विभाग के पास भी आधी ग्रामीण लिंक सड़कें हैं, जिनका रिपेयर का काम अब एआई की मदद से ही किया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
पंजाब पर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। इस समय प्रदेश पर 3.74 लाख करोड़ से ऊपर का कर्ज है, जिसे कम करना राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार ने विभागों की फिजूलखर्ची की धर-पकड़ शुरू कर दी है।
सरकार की तरफ से अब आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) सर्वे के बाद ही सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। सरकार की तरफ से तीन विभागों से इसकी शुरुआत की जा रही है, जिसमें मंडी बोर्ड, स्थानीय निकाय व लोक निर्माण विभाग का बीएंडआर शामिल है। पहले चरण में सरकार का लक्ष्य 200 करोड़ रुपये बचाने का है, जिसके बाद ही बाकी संबंधित विभागों में इसे लागू करके आगे की रुपपेखा तैयार की जाएगी।
मंडी बोर्ड की तरफ से 13,000 मिलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया जाना है, जिसके लिए एआई सर्वे शुरू हो गया है। इस सर्वे के आधार पर ही सड़कों का निर्माण किया जाएगा। कमेटियों व अन्य स्थानीय इकाइयों की तरफ से उन सड़कों का प्रस्ताव भी रिपेयर करने के लिए भेज दिया जाता है, जो पहले से ठीक होती है।
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बोर्ड ने पिछले साल भी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रिपेयर से पहले सड़कों का एआई सर्वे कराया था। सर्वे में करीब 7 करोड़ का रिपेयर वर्क ऐसा सामने आया था, जो जरुरी नहीं था। सर्वे में सड़कों की हालत ठीक पाई गई थी। इसी तरह कई बार ऐसी सड़कों के प्रस्ताव भी भेज दिए जाते हैं, जिसका कुछ हिस्सा खराब और कुछ ठीक होता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले साल ही ग्रामीण सड़कों का निर्माण एआई तकनीक से करने के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि उच्च गुणवत्ता यकीनी बनाने के साथ-साथ संबंधित प्रोजेक्ट को आवंटित एक-एक पैसे का उचित तरीके से खर्च सुनिश्चित किया जाए। जिसके बाद ही विभाग ने इन सड़कों का एआई सर्वे कराने का फैसला लिया था। मंडी बोर्ड व बीएंडआर ने कुल 5,382 सड़कों की रिपेयर का काम पूरा करना है, जिसके लिए लोन भी लिया जाना है।
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सरकार की तरफ से अब आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) सर्वे के बाद ही सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। सरकार की तरफ से तीन विभागों से इसकी शुरुआत की जा रही है, जिसमें मंडी बोर्ड, स्थानीय निकाय व लोक निर्माण विभाग का बीएंडआर शामिल है। पहले चरण में सरकार का लक्ष्य 200 करोड़ रुपये बचाने का है, जिसके बाद ही बाकी संबंधित विभागों में इसे लागू करके आगे की रुपपेखा तैयार की जाएगी।
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मंडी बोर्ड की तरफ से 13,000 मिलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया जाना है, जिसके लिए एआई सर्वे शुरू हो गया है। इस सर्वे के आधार पर ही सड़कों का निर्माण किया जाएगा। कमेटियों व अन्य स्थानीय इकाइयों की तरफ से उन सड़कों का प्रस्ताव भी रिपेयर करने के लिए भेज दिया जाता है, जो पहले से ठीक होती है।
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बोर्ड ने पिछले साल भी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रिपेयर से पहले सड़कों का एआई सर्वे कराया था। सर्वे में करीब 7 करोड़ का रिपेयर वर्क ऐसा सामने आया था, जो जरुरी नहीं था। सर्वे में सड़कों की हालत ठीक पाई गई थी। इसी तरह कई बार ऐसी सड़कों के प्रस्ताव भी भेज दिए जाते हैं, जिसका कुछ हिस्सा खराब और कुछ ठीक होता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले साल ही ग्रामीण सड़कों का निर्माण एआई तकनीक से करने के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि उच्च गुणवत्ता यकीनी बनाने के साथ-साथ संबंधित प्रोजेक्ट को आवंटित एक-एक पैसे का उचित तरीके से खर्च सुनिश्चित किया जाए। जिसके बाद ही विभाग ने इन सड़कों का एआई सर्वे कराने का फैसला लिया था। मंडी बोर्ड व बीएंडआर ने कुल 5,382 सड़कों की रिपेयर का काम पूरा करना है, जिसके लिए लोन भी लिया जाना है।