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पंजाब में महंगाई का झटका: 4.45 फीसदी पहुंची ओवरऑल महंगाई दर, गांवों में 5.08% फीसदी; राष्ट्रीय दर से अब भी कम

Tue, 15 Sep 2026 12:06 PM IST
Nivedita राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 15 Sep 2026 12:06 PM IST
सार

अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बिमल अंजुम के अनुसार हाल में आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। अमेरिका और ईरान के बीच संकट के कारण पेट्रोल के दाम बढ़ने से घरेलू सामान की कीमतों पर भी असर पड़ा है। डेयरी उत्पादों के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं।

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Punjab Overall inflation rate hits 4.45% reaching 5.08% in rural areas still lower than national rate
पंजाब में बढ़ी महंगाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में त्योहारी सीजन से पहले महंगाई ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र महंगाई की मार से ज्यादा प्रभावित हैं। 
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केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर बढ़कर 5.08 फीसदी हो गई। शहरी क्षेत्रों में यह 3.72 प्रतिशत रही। राज्य की ओवरऑल महंगाई दर 4.45 फीसदी दर्ज की गई है।

जुलाई 2026 में पंजाब की महंगाई दर 4.21 फीसदी थी। वहीं अगस्त 2025 में यह सिर्फ 3.51 प्रतिशत थी। इस तरह एक साल में महंगाई दर में स्पष्ट वृद्धि हुई है। हालांकि पंजाब की महंगाई दर अभी राष्ट्रीय दर से कम है। अगस्त में देश की महंगाई दर 4.82 फीसदी दर्ज की गई।
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अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बिमल अंजुम के अनुसार हाल में आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। अमेरिका और ईरान के बीच संकट के कारण पेट्रोल के दाम बढ़ने से घरेलू सामान की कीमतों पर भी असर पड़ा है। डेयरी उत्पादों के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं। इसका असर भी महंगाई दर पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि पंजाब के साथ अन्य राज्यों में भी महंगाई बढ़ रही है।
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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक भी बढ़ा
पंजाब में अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बढ़कर 109.67 हो गया जबकि जुलाई में यह 108.87 था। देश में भी सीपीआई 107.95 से बढ़कर 108.74 हो गया। तेलंगाना में यह सबसे अधिक 110.30 रहा। सीपीआई से समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव का पता चलता है। इसमें खाद्य सामग्री किराया कपड़े शिक्षा इलाज परिवहन बिजली और पानी जैसी सेवाएं शामिल हैं।


बढ़ता कर्ज भी चुनौती
पंजाब पर वर्ष 2024-25 में 3.79 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था। वर्ष 2026-27 तक इसके बढ़कर 4.47 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा वेतन पेंशन और कर्ज की अदायगी में खर्च हो रहा है। इससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
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