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पंजाब कांग्रेस: दो चरणों की कवायद भी खत्म नहीं कर सकी गुटबाजी, खुलकर सामने आई थी खेमेबाजी

Sun, 06 Sep 2026 02:52 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 06 Sep 2026 02:52 PM IST
सार

पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी दो चरणों की कवायद भी खत्म नहीं कर सकी। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने एक सप्ताह नेताओं से संवाद किया। सभाओं में चन्नी समर्थकों के विरोध से खेमेबाजी खुलकर सामने आई थी।

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Punjab Congress Factionalism Persists: Bhupesh Baghel Two-Phase Effort Fails to End Internal Rift
Punjab Congress - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म कराने के लिए हाईकमान ने भूपेश बघेल को प्रभारी बनाकर भेजा था। बघेल ने भी संगठन को साधने के लिए दो चरणों में कवायद की। पहले चरण में करीब एक सप्ताह पंजाब में रहकर उन्होंने अलग-अलग खेमों के नेताओं से मुलाकात कर उनके बीच की नाराजगी समझने और संवाद का रास्ता निकालने का प्रयास किया। 
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दूसरे चरण में उन्होंने ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान के तहत जिलों का दौरा कर कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी में जुटाने की कोशिश की। बघेल की दोनों चरणों की कवायद पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म नहीं कर पाई हालांकि, इस पूरी कवायद के दौरान जिस तरह गुटबाजी बघेल की जनसभा में मंचों तक पहुंची, उससे साफ हो गया कि कांग्रेस के भीतर की खाई आसानी से भरने वाली नहीं है।
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करीब एक महीने से ज्यादा समय तक पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के बीच अंदरूनी कलह व मतभेद को दूर करने के लिए बघेल ने नेताओं से वन-टू-वन संवाद किया। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा, गुरप्रीत सिंह कंगर समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। 

 

चन्नी खेमे के नेताओं के साथ हुई बैठकों में प्रदेश नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आया। इस धड़े की ओर से राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग भी उठाई गई। बघेल ने दोनों पक्षों की बात सुनी और नेताओं के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश की लेकिन बैठकों के बाद भी वड़िंग और चन्नी खेमे के बीच अविश्वास की स्थिति बनी रही। इसके बाद बघेल ने हाईकमान के आदेश पर संगठन की असली स्थिति बूथ स्तर पर परखने का फैसला किया।
 
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सभाओं में गुटबाजी और गरमाई
31 जुलाई से शुरू हुए ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान के तहत बघेल ने करीब 18 जिलों का दौरा किया। फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, संगरूर, बरनाला, मानसा, बठिंडा, मुक्तसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, मोगा, फरीदकोट, लुधियाना, मालेरकोटला, खन्ना, एसबीएस नगर और रोपड़ समेत विभिन्न जिलों में उन्होंने कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ बैठकें कीं।
 

दरअसल जिन कार्यक्रमों का मकसद बूथ स्तर पर कांग्रेस को एकजुट करना था, उनमें ही गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी। पटियाला और संगरूर में चन्नी समर्थकों ने चन्नी के पक्ष में नारेबाजी की। लुधियाना में विरोध और नारेबाजी ने माहौल को तनावपूर्ण किया। मालेरकोटला और खन्ना में भी दोनों खेमों के समर्थकों के बीच खींचतान देखने को मिली। कुछ जगहों पर मामला धक्का-मुक्की तक पहुंचा और कुर्सियां चलने की नौबत तक आ गई। 
 

हाईकमान को सौंपी थी रिपोर्ट
लगातार जिलों के दौरे और नेताओं से बातचीत के बाद बघेल ने पंजाब कांग्रेस के हालात पर हाईकमान को अपनी रिपोर्ट दी थी। इसमें संगठन की जमीनी स्थिति, नेताओं के बीच मतभेद और गुटों की गतिविधियों से नेतृत्व को अवगत कराया गया।
 

इसके बावजूद हाईकमान लंबे समय से पंजाब के विवाद पर अंतिम फैसला टालता रहा। अब बघेल को हटाकर सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है। बघेल की विदाई को केवल संगठनात्मक फेरबदल के बजाय पंजाब कांग्रेस के सभी गुटों को हाईकमान के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
 
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