{"_id":"6886e9abeb029251380551a5","slug":"punjab-civil-medical-services-association-demand-to-deploy-security-personnel-in-hospitals-2025-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"हमें सुरक्षा चाहिए: डॉक्टर बोले-भय के माहौल में नहीं कर सकते काम, आज स्वास्थ्य सचिव के साथ बैठक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हमें सुरक्षा चाहिए: डॉक्टर बोले-भय के माहौल में नहीं कर सकते काम, आज स्वास्थ्य सचिव के साथ बैठक
Mon, 28 Jul 2025 08:38 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 28 Jul 2025 08:38 AM IST
सार
पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के प्रधान अखिल सरीन ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में राज्य की विभिन्न अस्पतालों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं, जो ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की जान को खतरे में डाल सकती हैं।
विज्ञापन
Doctors
- फोटो : istock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने राज्य सरकार से मांग की है कि सभी अस्पतालों में 24 घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात करने की उनकी मांग को जल्दी पूरा किया जाना चाहिए क्योंकि डॉक्टर भय के माहौल में काम नहीं कर सकते हैं। अस्पतालों में हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं जिस कारण डॉक्टरों में काफी रोष है।
एसोसिएशन ने इस मांग को पूरा करने के लिए सरकार को 19 अगस्त तक का समय दिया है। सोमवार को एसोसिएशन के पदाधिकारियों की स्वास्थ्य सचिव के साथ बैठक भी होने जा रही है। एसोसिएशन के प्रधान अखिल सरीन ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में राज्य की विभिन्न अस्पतालों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं, जो ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की जान को खतरे में डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में उपमंडल अस्पताल तलवंडी साबो में एक घटना सामने आई, जहां एक मरीज ने ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी पर हमला किया और उसे धारदार हथियार से गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसी तरह की घटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करतारपुर में पिछले महीने हुई, जब एक मरीज ने आपातकालीन वार्ड में गोलीबारी की।
विज्ञापन
इसके अलावा उपमंडल अस्पताल सुल्तानपुर लोधी में दो गुटों के बीच टकराव के बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों को हिंसक भीड़ से बचने के लिए भागकर खुद को कमरें में बंद करना पड़ा। इसी तरह की घटनाएं कपूरथाला, डेराबस्सी, होशियारपुर, भोलाथ, गुरदासपुर, जगरांव और जीरा के अस्पतालों में भी सामने आईं हैं। सरीन ने स्वास्थ्य मंत्री से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि सुरक्षाकर्मी तैनात करने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी तरह की प्रक्रिया पूरी भी कर ली थी। स्वास्थ्य विभाग ने वित्त विभाग को इसका प्रस्ताव भी भेज दिया था, लेकिन वित्त विभाग ने हिंसा की सभी घटनाओं और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर जानकारी मांगी है। इस तरह सुरक्षाकर्मी तैनात करने का यह प्रस्ताव लटक गया। इस प्रस्ताव को प्रमुखता के आधार पर लागू करने के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी करने की जरूरत है।
विज्ञापन
एसोसिएशन ने इस मांग को पूरा करने के लिए सरकार को 19 अगस्त तक का समय दिया है। सोमवार को एसोसिएशन के पदाधिकारियों की स्वास्थ्य सचिव के साथ बैठक भी होने जा रही है। एसोसिएशन के प्रधान अखिल सरीन ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में राज्य की विभिन्न अस्पतालों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं, जो ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की जान को खतरे में डाल सकती हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हाल ही में उपमंडल अस्पताल तलवंडी साबो में एक घटना सामने आई, जहां एक मरीज ने ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी पर हमला किया और उसे धारदार हथियार से गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसी तरह की घटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करतारपुर में पिछले महीने हुई, जब एक मरीज ने आपातकालीन वार्ड में गोलीबारी की।
विज्ञापन
इसके अलावा उपमंडल अस्पताल सुल्तानपुर लोधी में दो गुटों के बीच टकराव के बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों को हिंसक भीड़ से बचने के लिए भागकर खुद को कमरें में बंद करना पड़ा। इसी तरह की घटनाएं कपूरथाला, डेराबस्सी, होशियारपुर, भोलाथ, गुरदासपुर, जगरांव और जीरा के अस्पतालों में भी सामने आईं हैं। सरीन ने स्वास्थ्य मंत्री से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि सुरक्षाकर्मी तैनात करने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी तरह की प्रक्रिया पूरी भी कर ली थी। स्वास्थ्य विभाग ने वित्त विभाग को इसका प्रस्ताव भी भेज दिया था, लेकिन वित्त विभाग ने हिंसा की सभी घटनाओं और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर जानकारी मांगी है। इस तरह सुरक्षाकर्मी तैनात करने का यह प्रस्ताव लटक गया। इस प्रस्ताव को प्रमुखता के आधार पर लागू करने के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी करने की जरूरत है।