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बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ एक्शन: बच्चों ने भीख मांगी तो अभिभावकों पर गिरेगी गाज, क्या है मान सरकार का मिशन?

Fri, 18 Jul 2025 08:01 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Fri, 18 Jul 2025 08:01 PM IST
सार

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बच्चों के भीख मांगने पर अभिभावकों पर गाज गिरेगी। मान सरकार जीवनज्योति-2 प्रोजेक्ट के तहत कार्रवाई अमल में लाएगी।

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Parents declare unfit if their children beg in Punjab Jeevanjyoti-2 Project
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मान सरकार ने बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अब पंजाब में बच्चों के भीख मांगने पर सरकार अभिभावकों को अनफिट घोषित करेगी। जीवनज्योति-2 प्रोजेक्ट के तहत मान सरकार ने मात्र दो दिन में राज्य में 18 जगहों पर छापे मारकर 41 बच्चों को बचाया है।

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महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि राज्य में सरकार ने सितंबर 2024 में जीवनज्योति मिशन की शुरुआत की थी। इसके लिए एक समर्पित बचाव दलों ने राज्य भर में भीख मांगते पाए गए बच्चों की पहचान करने और उन्हें बचाने के लिए जिलास्तरीय समितियां बनाई थीं। 9 महीने में विभिन्न जिलों में 753 बचाव अभियानों (छापों) से 367 बच्चों को बचाया गया। इनमें से 350 बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाया गया। 17 बच्चे जिनके माता-पिता की पहचान नहीं हो सकी, उनको बाल गृहों में रखा गया। बचाए गए 150 बच्चे दूसरे राज्यों के थे और उन्हें सुरक्षित उनके परिवारों के पास वापस भेज दिया गया।
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वहीं 183 बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाया गया और 6 साल से कम उम्र के 13 बच्चों को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में दाखिल करवाया गया। अत्यंत गरीब परिवारों के 30 बच्चों को प्रायोजन योजना में नामांकित किया गया जिन्हें उनकी शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए 4 हजार प्रति माह दिए जा रहे हैं। 16 बच्चों को राज्य की पेंशन योजना के तहत लाया गया, जिन्हें 1,500 प्रति माह दिए जा रहे हैं।
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मंत्री बलजीत कौर ने कहा कि आप सरकार न केवल ऐसे बच्चों को बचा रही है, बल्कि निरंतर निगरानी भी सुनिश्चित कर रही है। हर तीन महीने में जिलास्तरीय बाल संरक्षण टीम यह सत्यापित करते हैं कि क्या ये बच्चे स्कूल जा रहे हैं या कहीं वे फिर से सड़कों पर तो नहीं आ गए? इन प्रयासों के बावजूद 57 बच्चे उन स्कूलों या घरों से फिर लापता पाए गए जहां उन्हें भेजा गया था।


बठिंडा में केस दर्ज, एक गांव से 20 बच्चों को बचाया
मंत्री बलजीत कौर ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति अपरिचित बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर करता पाया जाता है, तो कानून के तहत उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला उपायुक्त (डीसी) के आदेश पर डीएनए परीक्षण कराए जाएंगे और 15-20 दिन की रिपोर्ट अवधि के दौरान ये बच्चे बाल गृह में सरकारी संरक्षण में रहेंगे। यदि डीएनए रिपोर्ट से पुष्टि होती है कि उसके साथ आए व्यक्ति उसके माता-पिता नहीं हैं, तो बाल तस्करी और बाल संरक्षण कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में बठिंडा में एक प्राथमिकी भी दर्ज की जा चुकी है, जहां भीख मांगने के लिए शोषण किए जाने के संदेह में 20 बच्चों को गांवों से बचाया गया है। योजना के तहत हाल में बचाए गए 17 बच्चे दिव्यांग और शारीरिक शोषण के भी शिकार पाए गए।

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