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नकोदर कांड: गायब रिपोर्ट के राज खंगालेगी विशेष कमेटी, 40 साल पहले बेअदबी के बाद फायरिंग में गई थी चार की जान

Wed, 15 Apr 2026 08:03 AM IST
Nivedita मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 15 Apr 2026 08:03 AM IST
सार

नकोदर में फरवरी 1986 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पांच स्वरूपों की बेअदबी हुई थी। पवित्र ग्रंथ के अपमानित स्वरूपों को लेने जा रहे ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के चार सदस्यों को गोली मार दी गई थी। इस मामले की अब जांच होगी।

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Nakodar Incident Special Committee Unearth Secrets of Missing Report Four died in Firing 40 Years Ago
पंजाब विधानसभा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी और इसका विरोध कर रहे सिख युवकों की मौत का बहुचर्चित मामला 40 साल बाद अचानक सुर्खियों में आ गया है। 
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विधानसभा में सोमवार को जब श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े एक संशोधन विधेयक को पारित करवाया जा रहा था तो सीएम भगवंत सिंह मान समेत आप सरकार के कई मंत्रियों व विधायकों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए तत्कालीन शिरोमणि अकाली दल की सरकार को निशाने पर लिया।

सदन में नकोदर कांड की गायब हुई महत्वपूर्ण एक्शन टेकन रिपोर्ट (कार्रवाई रिपोर्ट) पर चिंता व्यक्त करते हुए इस मामले की गहन जांच की मांग बुलंद की गई। चूंकि मामला बहुत संवेदनशील और श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़ा है इसलिए कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने भी इसका विरोध नहीं किया।
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अंतत: सदन में सर्वसम्मति के बाद विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने इस मामले की जांच विशेष (सिलेक्ट) कमेटी को सौंप दी गई। अब यह कमेटी गायब हुई एक्शन टेकन रिपोर्ट के राज को खंगालेगी।
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साका नकोदर के नाम से हुआ चर्चित

दो फरवरी 1986 को नकोदर के मोहल्ला गुरु नानक पुरा स्थित गुरुद्वारा अर्जन साहिब में कुछ अज्ञात शरारती तत्वों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पांच स्वरूपों की बेअदबी की। 4 फरवरी को रविंदर सिंह (लितरा गांव), हरमिंदर सिंह (चलूपुर गांव), बलधीर सिंह (रामगढ़ गांव) और झिलमन सिंह (गोरसियां गांव) पवित्र ग्रंथ के अपमानित स्वरूपों को लेने के लिए गुरुद्वारा परिसर की ओर जा रहे थे तभी पंजाब पुलिस ने उन पर गोलियां चला दीं। ये सभी ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएसएफ) के सदस्य थे। इस घटना को साका नकोदर के नाम से जाना जाता है। पंजाबी में साका किसी घटना या त्रासदी में असाधारण बलिदान को कहा जाता है।

चारों का पोस्टमार्टम 4-5 फरवरी 1986 की दरमियानी रात को किया गया और उनके परिवारों को अंतिम संस्कार देखने की भी अनुमति नहीं दी गई। उस वक्त शिअद नेता सुरजीत सिंह बरनाला सीएम थे।

दूसरी रिपोर्ट में थे अहम सबूत

फरवरी 1986 में चार युवकों की हत्याओं के बाद तत्कालीन वित्त मंत्री बलवंत सिंह ने न्यायिक जांच की घोषणा की थी। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस गुरनाम सिंह आयोग जांच की और 31 अक्तूबर को पंजाब सरकार को न्यायिक जांच रिपोर्ट सौंप दी। जांच रिपोर्ट का पहला हिस्सा 5 मार्च 2001 को पंजाब विधानसभा में पेश किया गया था जब प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री थे लेकिन दूसरा हिस्सा अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गया।

इस रिपोर्ट में महत्वपूर्ण सबूत, फाइलें, पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों व गवाहों के शपथपत्र शामिल थे। पीड़ितों का परिवार लगातार इंसाफ की मांग करता रहा। दबाव बढ़ा तो विधानसभा के स्पीकर ने 13 फरवरी 2019 को एक खुलासे में बताया कि न्यायिक जांच रिपोर्ट 5 मार्च को राज्य विधानसभा में बिना किसी कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट) के पेश की गई थी और इसके दूसरे हिस्से के गायब होने से पहले यह विधानसभा पुस्तकालय में उपलब्ध थी।

रिपोर्ट ढूंढ़ने के नहीं हुए प्रयास

जांच आयोग की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई रिपोर्ट ही गायब हो गई। हैरत की बात यह कि आज तक पूर्व सरकारों ने इस रिपोर्ट को ढूंढने की गंभीर कोशिश नहीं की। इससे पूर्व सरकारों की मंशा पता चलती है। विशेष कमेटी इस पूरे मामले की जांच कर दूसरी रिपोर्ट गायब होने के राज पता करेगी। - हरपाल सिंह चीमा, वित्त मंत्री, पंजाब

नहीं मिला इंसाफ

इस दर्दनाक घटना में आज तक पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है जबकि पीड़ित परिवारों ने कई बार इंसाफ की गुहार लगाई। आयोग की दूसरी रिपोर्ट सामने आती तो जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कड़ी जरूर कार्रवाई होती। - इंदरजीत कौर मान, विधायक, नकोदर
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