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पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट कांड: यूपी से गरीबी मिटाने आए थे पंजाब, उजड़ गए पांच परिवार; एंबुलेंस तक के पैसे नहीं

Sat, 31 May 2025 05:19 PM IST
निवेदिता वर्मा जगदीश जोशी, संवाद, मुक्तसर
जगदीश जोशी, संवाद, मुक्तसर Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 31 May 2025 05:19 PM IST
सार

लंबी हलके के गांव सिंघेवाला के खेतों में आप कार्यकर्ता तरसेम सिंह की पटाखा फैक्टरी में जोरदार धमाका हुआ था। जिसके बाद भगदड़ मच गई और दो मंजिला इमारत गिरने से मलबे के नीचे दब कर पांच मजदूरों की मौत हो गई थी।

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Muktsar Fireworks factory blast case  families devastated
सिविल अस्पताल में पहुंचे मृतकों के परिजन - फोटो : संवाद

विस्तार

लंबी विधान सभा हलके के गांव सिंघेवाला में आप कार्यकर्ता तरसेम सिंह की पटाखा फैक्टरी में ब्लास्ट में पांच मजदूरों की घटना ने सभी को झंझोड़कर रख दिया है। यह घटना यूपी से मजदूरी करने आने वाले युवाओं के परिवारों के दिलों पर ऐसे गहरे घाव छोड़ गई है, जो वर्षों तक नहीं भर पाएंगे। 

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शनिवार को अपने पांचों बच्चों के शवों को लेने के लिए यूपी के अलीगढ़ जिले से आए परिजन गिद्दड़बाहा सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के समय मोर्चरी के बाहर खड़े फूट-फूटकर विलाप करते नजर आ रहे थे। इस दौरान परिजन लेबर ठेकेदार तथा फैक्टरी मालिक को इस घटना के लिए पूरी तरह से जिम्मेवार ठहरा रहे थे। वहीं एंबुलेंस का खर्चा न उठा पाने के कारण मृतकों के परिजन दिन भर बिलखते रहे और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। 
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अच्छी कमाई की बात कहकर लाया था ठेकेदार

सिविल अस्पताल गिद्दड़बाहा में मौजूद मृतक शेलेंद्र सिंह पुत्र सुनहरी लाल के भाई पुष्पिंदर, मृतक राहुल के पिता कृष्ण, मृतक अखिलेश के जीजा व मृतक नीरज व दानवीर की माताओं व अन्य परिजनों ने बताया कि ठेकेदार राजकुमार भी अलीगढ़ का ही रहने वाला है। कुछ माह पहले उसने बताया कि पंजाब में एक फैक्टरी खुली है। वहां मजदूरों को अच्छा मेहनताना मिलता है। अगर उनके परिवार के युवा फैक्टरी में काम करेंगे तो उनकी जिंदगी बन जाएगी। अपने बच्चों का उज्जवल भविष्य देखते हुए उन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को ठेकेदार के कहने पर पंजाब भेज दिया। मगर उन्हें क्या पता था कि यहां उनकी जिंदगी बननी तो दूर, जिंदगियां वीरान हो जाएंगी और सभी के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ेगा। 

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उन्होंने बताया कि ठेकेदार के कहने पर उनके परिवार के कई सदस्य दो माह पहले तो कई एक माह पहले चले गए। जबकि ठेकेदार राजकुमार गत 20 मई को खुद अलीगढ़ जाकर करीब पंद्रह से बीस लोगों को पंजाब लेकर आया था। उन्हें तो इस बात की भनक नहीं थी कि उनके बच्चे पटाखा फैक्टरी में कार्य करते हैं। उनकी मौत के लिए ठेकेदार व फैक्टरी मालिक कसूरवार हैं। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

शवों को ले जाने के भी पैसे नहीं 

भावुक परिजन तो इतने बेबस नजर आ रहे थे कि रोते-बिलखते यह कह रहे थे कि यूपी से आजीविका कमाने परिवार के बच्चे पंजाब आए और अब उनके शवों को वापिस यूपी ले जा पाने में भी वे लोग असमर्थ हैं क्योंकि अलीगढ़ से गिद्दड़बाहा तक का खर्चा उठाकर वे बड़ी मुश्किल से आए हैं और शव ले जाने के लिए एंबुलेंस का खर्चा वे लोग वहन नहीं कर सकते। 



उन्होंने प्रशासन व सरकार से मृतकों के शवों को यूपी पहुंचवाने में मदद की गुहार लगाई। देर शाम प्रशासन शवों को यूपी पहुंचवाने को आगे आया। बताते हैं कि पहले सिविल सर्जन डा. चंद्र शेखर ने समाजसेवी संस्थाओं के स्टेट कोआर्डिनेटर डा. नरेश परुथी से एनजीओ की एंबुलेंस के जरिए शवों को अलीगढ़ तक पहुंचवाने को कहा था। मगर उन्होंने यह कहकर असमर्थता जाहिर कर दी कि उनकी एनजीओ की एंबुलेंस सिर्फ सौ से दो सौ किलोमीटर के दायरे तक जा सकती है। अलीगढ़ करीब पांच सौ किलोमीटर के दायरे में है। डा. परुथी ने लंबी के एसएमओ को यह बात कह हाथ खड़े कर दिए। एडीसी गुरप्रीत सिंह थिंद ने बताया कि एसडीएम की ड्यूटी लगा दी है। वह शवों को यूपी पहुंचवाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम करवा रहे हैं। 

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