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शानन परियोजना पर हिमाचल का फिर दावा: गवर्नर से मुलाकात के बाद बोले CM सुक्खू, पंजाब का कोई अधिकार नहीं
Fri, 26 Jun 2026 11:18 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 26 Jun 2026 11:18 AM IST
सार
हिमाल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
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गवर्नर गुुलाब चंद कटारिया से मिले हिमाचल के सीएम सुखविंदर सुक्खू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शानन जलविद्युत परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश ने एक बार फिर अपना दावा दोहराया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
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उन्होंने कहा कि मंडी रियासत कभी भी संयुक्त पंजाब का हिस्सा नहीं रही। ऐसे में शानन परियोजना पर पंजाब या किसी अन्य राज्य का दावा कानूनी रूप से निराधार है।
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पंजाब लोकभवन में हुई मुलाकात
पंजाब लोकभवन में हुई मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि शानन जलविद्युत परियोजना मंडी जिले में स्थित है और यह पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 की धारा 2(एन) में परिभाषित हस्तांतरित क्षेत्रों का हिस्सा कभी नहीं रही। इसलिए इस परियोजना पर उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होते और इस आधार पर किसी भी तरह का अधिकार नहीं जताया जा सकता।मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना की 99 वर्ष की लीज दो मार्च 2024 को समाप्त हो चुकी है। लीज खत्म होने के साथ उससे जुड़े सभी अधिकार स्वत: समाप्त हो गए। ऐसे में समाप्त हो चुकी लीज के आधार पर परियोजना के संचालन, प्रबंधन या कब्जे का कोई भी दावा अब विधिक रूप से टिक नहीं सकता।
सुक्खू ने कहा कि तत्कालीन मंडी रियासत ने वर्ष 1948 में भारतीय संघ में विलय किया था जबकि वर्ष 1951 में हिमाचल प्रदेश को भाग-सी राज्य का दर्जा मिला। इसलिए परियोजना पर किसी अन्य राज्य के अधिकार का दावा ऐतिहासिक तथ्यों से भी मेल नहीं खाता।
बीबीएमबी से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश की बीबीएमबी परियोजनाओं और उनसे मिलने वाले लाभ में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी को मान्यता दे चुका है। इसके बावजूद राज्य पिछले एक दशक से अधिक समय से 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़े वित्तीय बकायों की प्रतीक्षा कर रहा है।शानन परियोजना को लेकर पंजाब और हिमाचल के बीच विवाद पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। इस बीच केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) अभी भी परियोजना का संचालन कर रहा है जबकि हिमाचल सरकार का कहना है कि लीज समाप्त होने के बाद संचालन और नियंत्रण का अधिकार उसे मिलना चाहिए।
तीन राज्यों के दावे में उलझी शानन परियोजना
शानन जलविद्युत परियोजना हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदरनगर में उहल नदी पर स्थित है। वर्ष 1925 में मंडी रियासत के तत्कालीन राजा जोगिंदर सेन बहादुर और अविभाजित पंजाब के तत्कालीन मुख्य अभियंता के बीच 99 वर्ष की लीज पर समझौता हुआ था। यह लीज दो मार्च 2024 को समाप्त हो गई। हिमाचल का कहना है कि इसके साथ ही पंजाब के सभी अधिकार खत्म हो गए। दूसरी ओर पंजाब सरकार का दावा है कि परियोजना आधिकारिक रूप से उसे आवंटित की गई थी इसलिए संचालन जारी रहेगा। हरियाणा ने भी सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अविभाजित पंजाब का हिस्सा होने के आधार पर इसमें अपनी हिस्सेदारी का दावा किया है। हालांकि हिमाचल ने इस दावे को भी खारिज किया है। करीब 200 करोड़ रुपये सालाना आय वाली इस परियोजना के मालिकाना हक पर अंतिम फैसला अब सर्वोच्च न्यायालय को करना है।राज्यपाल के सामने ये मुद्दे भी रखे
चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश के वैध 7.19 फीसदी हिस्से के दावे को दोहराया। कहा, पिछले पांच दशकों से पंजाब और हरियाणा शहर की भूमि, परिसंपत्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं जबकि हिमाचल अपने वैध अधिकार से अब तक वंचित है।
चंडीगढ़ में अतिरिक्त हिमाचल सदन के निर्माण की जरूरत पर भी जोर दिया। बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन से चर्चा के बाद सेक्टर-52 में 4.736 एकड़ भूमि इसके लिए चिह्नित की जा चुकी है।