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दलजीत सिंह का अंतिम संस्कार आज: मां और बहन की दलील पर हाईकोर्ट ने बदला आदेश, पैतृक गांव में दी जाएगी विदाई
Thu, 05 Nov 2026 09:17 AM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, मानसा
संवाद न्यूज एजेंसी, मानसा
Published by: Nivedita
Updated Thu, 05 Nov 2026 09:17 AM IST
सार
उच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम संस्कार में किसी राजनीतिक दल, नेता या संगठन को शामिल होने अथवा व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं होगी। अंतिम रस्में केवल श्मशानघाट में परिवार की इच्छा के अनुसार होंगी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मानसा में दलजीत सिंह का अंतिम संस्कार आज उनके पैतृक गांव भामे कलां, जिला मानसा में होगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मृतक की पत्नी परमजीत कौर और बहन अमरजीत कौर की सहमति के बाद अपने पहले के आदेश में संशोधन कर दिया।
न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ ने परिवार की भावनाओं और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया। इससे पहले तीन नवंबर को अदालत ने आदेश दिया था कि पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में दोबारा पोस्टमार्टम के बाद दलजीत सिंह का अंतिम संस्कार सेक्टर-25 के श्मशानघाट में कराया जाए। इसके लिए पंजाब और चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशकों को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे।
बुधवार को मृतक की पत्नी परमजीत कौर और बहन अमरजीत कौर अदालत में मौजूद थीं। पत्नी और मां की ओर से अंतिम संस्कार पैतृक गांव में कराने की मांग की गई थी। परिवार की परंपराओं और मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा गया कि सभी अंतिम रस्में गांव में ही होनी चाहिए। अदालत ने दोनों महिलाओं की इच्छा सुनने के बाद उन्हें बच्चों के हित, परिवार की गरिमा और घटना के मानसिक प्रभाव के बारे में भी समझाया। इसके बाद दोनों ने गांव में अंतिम संस्कार कराने पर सहमति जताई। पंजाब सरकार ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
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पीजीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि दोबारा पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों का बोर्ड गठित कर दिया गया है और प्रक्रिया बुधवार को ही पूरी की जाएगी। इसके बाद शव पीजीआई की मोर्चरी में रखा जाएगा। चंडीगढ़ पुलिस मोर्चरी में सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पुलिस की संयुक्त टीम शव को सीधे चंडीगढ़ से गांव भामे कलां ले जाएगी। पंजाब के डीजीपी को अंतिम संस्कार स्थल और रास्ते में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम संस्कार में किसी राजनीतिक दल, नेता या संगठन को शामिल होने अथवा व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं होगी। अंतिम रस्में केवल श्मशानघाट में परिवार की इच्छा के अनुसार होंगी। किसी भी तरह की बाधा या अव्यवस्था पैदा करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले में अगली सुनवाई पांच नवंबर को दोपहर 1:45 बजे होगी।
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न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ ने परिवार की भावनाओं और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया। इससे पहले तीन नवंबर को अदालत ने आदेश दिया था कि पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में दोबारा पोस्टमार्टम के बाद दलजीत सिंह का अंतिम संस्कार सेक्टर-25 के श्मशानघाट में कराया जाए। इसके लिए पंजाब और चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशकों को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे।
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बुधवार को मृतक की पत्नी परमजीत कौर और बहन अमरजीत कौर अदालत में मौजूद थीं। पत्नी और मां की ओर से अंतिम संस्कार पैतृक गांव में कराने की मांग की गई थी। परिवार की परंपराओं और मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा गया कि सभी अंतिम रस्में गांव में ही होनी चाहिए। अदालत ने दोनों महिलाओं की इच्छा सुनने के बाद उन्हें बच्चों के हित, परिवार की गरिमा और घटना के मानसिक प्रभाव के बारे में भी समझाया। इसके बाद दोनों ने गांव में अंतिम संस्कार कराने पर सहमति जताई। पंजाब सरकार ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
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पीजीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि दोबारा पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों का बोर्ड गठित कर दिया गया है और प्रक्रिया बुधवार को ही पूरी की जाएगी। इसके बाद शव पीजीआई की मोर्चरी में रखा जाएगा। चंडीगढ़ पुलिस मोर्चरी में सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पुलिस की संयुक्त टीम शव को सीधे चंडीगढ़ से गांव भामे कलां ले जाएगी। पंजाब के डीजीपी को अंतिम संस्कार स्थल और रास्ते में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम संस्कार में किसी राजनीतिक दल, नेता या संगठन को शामिल होने अथवा व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं होगी। अंतिम रस्में केवल श्मशानघाट में परिवार की इच्छा के अनुसार होंगी। किसी भी तरह की बाधा या अव्यवस्था पैदा करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले में अगली सुनवाई पांच नवंबर को दोपहर 1:45 बजे होगी।