पंजाब के स्कूलों में सीखने के परिणाम: शिक्षक उपलब्धता में पहले से सुधार, बरनाला ओवरऑल रैंकिंग में सबसे आगे
मोहाली की पिछली बार ओवरऑल रैंकिंग 358 थी, जो इस बार बढ़कर 373 हो गई है। इस तरह जिले में काफी सुधार हुआ है। वहीं रूपनगर की रैंकिंग 351 से बढ़कर 368 और गुरदासपुर की रैंकिंग की 347 से 363 हो गई है।
विस्तार
पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी काफी करने की आवश्यकता है, लेकिन स्कूलों में सीखने के परिणाम और गुणवत्ता, शिक्षक उपलब्धता व बुनियादी ढांचे में पहले से सुधार हुआ है।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की जिलों के लिए प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (पीजीआई-डी) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। बरनाला जिला ओवरऑल रैंकिंग में सबसे आगे है। वहीं मोहाली, रूपनगर व गुरदासपुर ने भी एक कदम छलांग लगाई है, जबकि पिछली रैंकिंग में ये जिले सबसे पीछे थे।
पंजाब सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए बड़े स्तर पर काम करने का दावा कर रही है, इसलिए यह रिपोर्ट सरकार के लिए अच्छी खबर लेकर आई है। बरनाला जिला अब रैंकिंग में सुधार के साथ एक कदम आगे बढ़ गया है और प्रदेश भर में टॉप पर है। वर्ष 2022-23 में बरनाला जिले की ओवरऑल रैंकिंग 407 थी, जो वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट में बढ़कर 424 हो गई है। इसी तरह पिछली रैंकिंग में मोहाली, रूपनगर, गुरदासपुर और कपूरथला सबसे पीछे थे। मोहाली, रूपनगर और गुरदासपुर ने एक रैकिंग में सुधार किया है, जबकि कपूरथला अभी सबसे आखिर में है।
मोहाली की पिछली बार ओवरऑल रैंकिंग 358 थी, जो इस बार बढ़कर 373 हो गई है। इस तरह जिले में काफी सुधार हुआ है। वहीं रूपनगर की रैंकिंग 351 से बढ़कर 368 और गुरदासपुर की रैंकिंग की 347 से 363 हो गई है। कपूरथला की रैंकिंग में 344 से बढ़कर 359 मामूली सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी जिला सबसे पीछे बना हुआ है।
जालंधर रैंकिंग पहले के मुकाबले हुई कम
जालंधर की रैंकिंग पहले के मुकाबले कम हुई है। यह 367 से कम होकर 362 हो गई है, जबकि बाकी सभी जिलों में पिछली रैंकिंग के मुकाबले सुधार हुआ है। यह रिपोर्ट 74 संकेतकों में कुल 600 अंकों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इन्हें 6 श्रेणियों में बांटा गया है, जैसे- परिणाम, प्रभावी कक्षा संचालन, बुनियादी ढांचा सुविधाएं और छात्र अधिकार, स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग और शासन प्रक्रिया शामिल हैं।
इन श्रेणियों को आगे 11 डोमेन में विभाजित किया गया है, जैसे सीखने के परिणाम और गुणवत्ता, पहुंच परिणाम, शिक्षक उपलब्धता, व्यावसायिक विकास परिणाम, सीखने का प्रबंधन, सीखने की समृद्धि गतिविधियां, बुनियादी ढांचा, सुविधाएं, छात्र अधिकार, स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग, फंड उपयोग, उपस्थिति निगरानी प्रणाली और स्कूल नेतृत्व विकास शामिल हैं। इन सभी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए स्कोर दिया गया है, जिसके आधार पर यह रैंकिंग तैयार की गई है।
स्कूलों में प्रदर्शन में सुधार करना मकसद
इस रैंकिंग का मकसद जिलों का ध्यान स्कूली शिक्षा में उन क्षेत्रों की तरफ दिलाना हैं, जहां अधिक काम करने की जरूरत है। इससे जिलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी। जो जिले उच्चतम ग्रेड तक पहुंच जाएंगे, वहां सुविधाएं अधिक होने के साथ समस्याएं कम होंगी।