आठ साल की बच्ची को अमानवीय सजा: एक चोटी बनाकर पहुंची थी स्कूल, हाथों पर पैर रखकर चलवाया
बच्ची के पिता के अनुसार, पूरे घटनाक्रम के बाद उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1198 पर कॉल किया था। इसके बाद पुलिस भी स्कूल पहुंची। पिता का दावा है कि स्कूल प्रबंधन ने अपनी गलती मानी
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जालंधर के एक निजी स्कूल में बालों की दो चोटियों के बजाय एक चोटी बनाकर आने पर तीसरी कक्षा की आठ वर्षीय छात्रा को कथित तौर पर अमानवीय सजा देने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि शिक्षिका ने बच्ची के हाथ जमीन पर रखवाकर उन पर पैर रखकर चलवाया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। बच्ची के पिता ने दो शिक्षिकाओं के खिलाफ शिकायत दी थी, लेकिन बाद में स्कूल प्रबंधन के माफी मांगने पर उन्होंने शिकायत वापस ले ली।
चाइल्ड हेल्पलाइन पर कॉल के बाद स्कूल पहुंची पुलिस
बच्ची के पिता के अनुसार, पूरे घटनाक्रम के बाद उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1198 पर कॉल किया था। इसके बाद पुलिस भी स्कूल पहुंची। पिता का दावा है कि स्कूल प्रबंधन ने अपनी गलती मानी और गिड़गिड़ाने के बाद उन्होंने अपनी शिकायत वापस ले ली। पिता ने कहा कि वे किसी तरह की उलझन में नहीं पड़ना चाहते, क्योंकि इससे उनके कामकाज पर असर पड़ता है।
दो दिन तक डरी रही बच्ची
परिजनों के मुताबिक, बच्ची स्कूल में दो चोटियां बनाकर आने के नियम के बावजूद एक चोटी बनाकर पहुंची थी। इसी बात पर शिक्षिका ने उसे कथित तौर पर सजा दी। परिजनों का आरोप है कि बच्ची को घटना के बारे में घर में किसी को न बताने के लिए भी डराया गया। घटना के बाद बच्ची दो दिन तक डरी-सहमी रही और ठीक से सो भी नहीं पाई। बाद में उसने रोते हुए परिवार को आपबीती सुनाई। पिता का कहना है कि नियम का उल्लंघन होने पर स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को सूचित कर सकता था, लेकिन बच्ची को इस तरह की सजा देना उचित नहीं था।
शिकायत के बाद शिक्षिका से नहीं मिलने देने का आरोप
परिवार ने स्कूल प्रबंधन पर शिकायत के बाद आरोपी शिक्षिका से मुलाकात नहीं कराने और वीडियो बनाने से रोकने का आरोप भी लगाया। परिजनों का दावा है कि स्कूल में स्थायी प्रिंसिपल भी नहीं है। उनका आरोप है कि विरोध करने पर स्कूल प्रशासन ने बच्ची की बात पर सवाल उठाए। मामले में स्कूल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।