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पीजीटी भर्ती में हाईकोर्ट का फैसला: भर्ती विज्ञापन नहीं बदल सकता सेवा नियम, एचपीएससी को निर्देश

Sat, 08 Aug 2026 10:49 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 08 Aug 2026 10:49 AM IST
सार

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने नरेश कुमारी व अन्य की चार याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) को छह सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं के मामलों पर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया।

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High Court ruling on PGT recruitment advertisement cannot alter service rules HPSC directed.
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक (पीजीटी) भर्ती में आयु सीमा में छूट को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि भर्ती विज्ञापन की कोई भी शर्त वैधानिक सेवा नियमों से ऊपर नहीं हो सकती। 

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अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भर्ती विज्ञापन और सेवा नियमों में टकराव हो तो वैधानिक नियमों को ही प्राथमिकता मिलेगी। साथ ही कहा कि कार्यपालिका या प्रशासनिक निर्देश न तो वैधानिक नियमों में संशोधन कर सकते हैं और न ही उनके दायरे को सीमित कर सकते हैं।
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जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने नरेश कुमारी व अन्य की चार याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) को छह सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं के मामलों पर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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मामला 23 जुलाई 2024 को जारी पीजीटी भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है। विज्ञापन में आयु सीमा में छूट केवल उन अभ्यर्थियों तक सीमित कर दी गई थी, जिन्होंने समकक्ष पद पर कार्य किया हो। याचिकाकर्ताओं ने इसे हरियाणा स्टेट एजुकेशन स्कूल कैडर (ग्रुप-बी) सर्विस रूल्स, 2012 के विपरीत बताते हुए चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि जहां भर्ती विज्ञापन और वैधानिक सेवा नियमों में असंगति हो, वहां सेवा नियम ही प्रभावी होंगे। प्रशासनिक या कार्यपालिका के निर्देश केवल नियमों की पूर्ति कर सकते हैं, उनका स्थान नहीं ले सकते। अदालत ने चारों याचिकाएं स्वीकार करते हुए केवल समकक्ष पद का अनुभव न होने के आधार पर याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी रद्द करने के आदेश निरस्त कर दिए। 

साथ ही राज्य सरकार और एचपीएससी को निर्देश दिया कि सेवा नियमों के नियम-5 के अनुसार आयु सीमा में छूट का लाभ देते हुए मामलों पर पुनर्विचार किया जाए, बशर्ते संबंधित अभ्यर्थियों ने पहले नियमित नियुक्ति के लिए इस एकमुश्त छूट का लाभ न लिया हो।


हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिस याचिकाकर्ता का साक्षात्कार नहीं लिया गया था, उसे साक्षात्कार का अवसर दिया जाए। यदि पुनर्विचार के बाद अभ्यर्थी पात्रता और मेरिट में सफल पाए जाते हैं तो उन्हें नियुक्ति के साथ सभी परिणामी काल्पनिक लाभ दिए जाएं, जबकि वास्तविक वेतन कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से देय होगा। पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

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