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तीन मुद्दों पर होगी गुरदासपुर की जंग: मेडिकल कॉलेज, सैनिक स्कूल और कूड़ा पर सजेगा 2027 का रण
Wed, 23 Sep 2026 01:59 PM IST
Nivedita
मनन सैनी, संवाद, गुरदासपुर
मनन सैनी, संवाद, गुरदासपुर
Published by: Nivedita
Updated Wed, 23 Sep 2026 01:59 PM IST
सार
गुरदासपुर में मेडिकल कॉलेज की मांग दशकों पुरानी है। 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मेडिकल कॉलेज और सैनिक स्कूल की घोषणा की थी। सैनिक स्कूल गांव डल्ला गोरियां में प्रस्तावित था।
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गुरदासपुर विधानसभा सीट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गुरदासपुर सीट पर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। लोग पुराने वादों और मौजूदा समस्याओं पर विचार कर रहे हैं।
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पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है जबकि गुरदासपुर में कांग्रेस के विधायक हैं और नगर काउंसिल पर भी कांग्रेस का कब्जा है। जनता मेडिकल कॉलेज, सैनिक स्कूल और कचरा प्रबंधन जैसे तीन प्रमुख मुद्दों पर जवाब मांग रही है।
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गुरदासपुर में मेडिकल कॉलेज की मांग दशकों पुरानी है। 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मेडिकल कॉलेज और सैनिक स्कूल की घोषणा की थी। सैनिक स्कूल गांव डल्ला गोरियां में प्रस्तावित था। हालांकि, लोकसभा उपचुनाव की आचार संहिता के कारण दोनों परियोजनाओं की कागजी कार्रवाई अटक गई। बाद में मोहाली, कपूरथला, होशियारपुर और मालेरकोटला में मेडिकल कॉलेज घोषित हुए पर गुरदासपुर को कुछ नहीं मिला।
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2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद भी दिसंबर 2023 की रैली में कोई घोषणा नहीं हुई। विधायक बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा द्वारा आगे बढ़ाया गया सैनिक स्कूल का काम भी अधर में लटक गया। शहर में कूड़े की समस्या भी बड़े स्तर पर पहुंच गई है। नगर काउंसिल पर कूड़ा प्रबंधन में विफलता के आरोप हैं जिससे यह एक बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है। विधायक पाहड़ा ने यह मामला विधानसभा में भी उठाया पर कोई हल नहीं निकला।
कांग्रेस विधायक पाहड़ा का सियासी कद
इन समस्याओं के बावजूद बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा का सियासी कद कमजोर नहीं हुआ है। कांग्रेस की सरकार न होने के बावजूद उन्होंने नगर काउंसिल गुरदासपुर का उपचुनाव जीता। इसके बाद, बिना सरकार के सहारे, नगर काउंसिल का मुख्य चुनाव भी जीता। कांग्रेस के सिर प्रधानगी का ताज सजा। यह दर्शाता है कि सत्ता विरोधी माहौल में भी जनता का भरोसा उन पर कायम रहा है। 2022 के चुनाव में पाहड़ा ने 43,743 वोट लेकर 7,335 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2017 के मुकाबले उनकी वोट करीब 23,966 घटी थी।
आम आदमी पार्टी के रमन बहल की सक्रियता
आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज रमन बहल 2022 का चुनाव हारने के बावजूद मैदान में डटे रहे। उनके प्रयासों से पुराने सिविल अस्पताल की इमारत में शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुला। बहल उस समय पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष थे। उन्होंने शहर के गंदे नाले को पक्का करवाने का काम भी करवाया। इन कार्यों के चलते उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन मिला। 2022 में बहल को 29,500 वोट मिले थे, जो 2017 के 6,949 वोटों से काफी अधिक थे। यह पार्टी के वोट आधार में तेजी से वृद्धि को दर्शाता है।
नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप
विधायक बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा ने मेडिकल कॉलेज और सैनिक स्कूल के लिए भारी प्रयास किए। उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर इस दिशा में कुछ न करने का आरोप लगाया। पाहड़ा ने कूड़ा डंप करने का मुद्दा विधानसभा में भी उठाया पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। वे फिलहाल अपने स्तर पर कूड़ा उठवाकर नई जगह प्रबंध करने में जुटे हैं। उन्होंने गैंगस्टरों और नशे की घर पहुंच सेवा को सबसे बड़ी समस्या बताया।
रमन बहल ने पुराना अस्पताल दोबारा शुरू करवाने और गंदे नालों को सुंदर बनाने जैसे वादे पूरे करने का दावा किया। उन्होंने कांग्रेसी विधायक पर जनता की भलाई की परियोजनाओं में जानबूझकर रोड़े अटकाने का आरोप लगाया और कूड़े के मुद्दे पर कांग्रेस-नियंत्रित नगर काउंसिल को जिम्मेदार ठहराया।