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मोगा में ईडी रेड: 29 घंटे बाद भी विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा के घर जांच जारी, समर्थक धरने पर बैठे

Thu, 05 Nov 2026 07:40 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा Published by: Nivedita Updated Thu, 05 Nov 2026 07:40 AM IST
सार

ईडी की चंडीगढ़ इकाई की कार्रवाई सरकारी जमीन के अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में कथित धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में हुई। मामला राष्ट्रीय राजमार्ग-754ए के निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के फर्जी इंतकाल और मुआवजे के गलत वितरण से संबंधित है।

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ED raid in Moga Investigation continues at residence of MLA Dr. Amandeep Kaur Arora
मोगा में आप विधायक के घर ईडी की रेड - फोटो : संवाद

विस्तार

आम आदमी पार्टी की मोगा विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा के आवास पर 29 घंटे से ईडी की रेड जारी है। मंगलवार रात करीब 3 बजे ईडी की टीम ने मोगा में दस्तक दी थी। विधायक के दोनों घरों सहित कुल सात ठिकानों पर ईडी की टीमों ने दबिश दी। 
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ईडी की चंडीगढ़ इकाई की यह कार्रवाई सरकारी जमीन के अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में कथित धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में हुई। मामला राष्ट्रीय राजमार्ग-754ए के निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के फर्जी इंतकाल और मुआवजे के गलत वितरण से संबंधित है। ईडी ने पंजाब पुलिस की जून 2024 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था।
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वहीं ईडी के विरोध में बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता विधायक के घर के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं।  

बुधवार को ईडी की टीम खन्ना के गांव लिबड़ा स्थित डाॅ. अमनदीप काैर के ननिहाल भी पहुंची। यहां परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई। उनके मोबाइल फोन, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की गई। मोगा में विधायक के परिजनों, सहयोगियों और उनके पति डॉ. राकेश अरोड़ा से जुड़े नशामुक्ति अस्पताल की तलाशी ली गई।
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एक करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आरोप
पुलिस ने 16 जून 2024 को धर्मकोट थाने में दर्ज प्राथमिकी में पटवारी नवदीप सिंह और निजी लाभार्थी दिलखुश को नामजद किया था। शिकायत के अनुसार, दिलखुश को 1,00,65,724 रुपये का मुआवजा दिया गया, जबकि जांच में संबंधित जमीन पंजाब सरकार की पाई गई। आरोप है कि फर्जी इंतकाल तैयार कर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। मोहाली की फोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला ने म्यूटेशन दस्तावेज पर तत्कालीन तहसीलदार के हस्ताक्षर फर्जी होने की पुष्टि की थी।

मूल एफआईआर में विधायक का नाम नहीं
मामले की मूल प्राथमिकी में विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा और उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम नहीं है। विधायक के करीबी सहयोगियों ने कहा कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया। स्थानीय आप नेताओं ने भी इसे राजनीति से प्रेरित करार दिया।  
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