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मिशन 2027: रूठे नेताओं को मनाने के लिए सुखबीर ने जोड़े हाथ... आप, कांग्रेस और भाजपा का क्या है प्लान?
Fri, 08 Aug 2025 03:05 PM IST
अंकेश ठाकुर
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Fri, 08 Aug 2025 03:05 PM IST
सार
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। तमाम राजनीतिक दलों ने चुनाव को लेकर कमर कस ली है। सभी दलों के आगे चुनौतियां कम नहीं हैं। शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल पार्टी के नाराज नेताओं को मनाने के लिए हाथ जोड़ रहे हैं।
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शिअद प्रधान सुखबीर बादल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में सभी सियासी दलों ने मिशन 2027 के लिए कमर कस ली है। सभी दल अपने-अपने संगठनात्मक ढांचों को मजबूती देते हुए कार्यकर्ताओं की फौज को सक्रिय करने में जुट गए हैं। पंजाब में साल 2027 के शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।
दरअसल, आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए सत्ता में वापसी और अन्य दलों के लिए अपने प्रदर्शन को सुधारते हुए सत्ता हासिल करने की बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती को पार कर अपना लक्ष्य पाने के लिए सभी दलों का बड़ा भरोसा अपने कार्यकर्ताओं पर है। लिहाजा दलों ने अपने-अपने कार्यकर्ताओं को एक्शन मोड में आने के लिए निर्देशित कर दिया है।
वर्ष 2022 के चुनाव परिणाम में कुल 117 सीटों में से आप ने 92, कांग्रेस ने 18, शिअद ने 3, भाजपा ने 2 व आजाद व बसपा ने 1-1 सीट जीती थीं। इन आकंड़ों को देखें तो स्पष्ट है कि कांग्रेस, शिअद व भाजपा ने अपना-अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। पिछले चुनाव में खराब प्रदर्शन की एक बड़ी वजह यह भी थी कि इन दलों का संगठनात्मक ढांचा जमीनी स्तर पर बहुत ज्यादा मजबूत नहीं था। लिहाजा सियासी दल पिछली बार की कमजोरियों का आकलन करते हुए इस बार पुरानी गलतियों को दोहराना नहीं चाहते।
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दरअसल, आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए सत्ता में वापसी और अन्य दलों के लिए अपने प्रदर्शन को सुधारते हुए सत्ता हासिल करने की बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती को पार कर अपना लक्ष्य पाने के लिए सभी दलों का बड़ा भरोसा अपने कार्यकर्ताओं पर है। लिहाजा दलों ने अपने-अपने कार्यकर्ताओं को एक्शन मोड में आने के लिए निर्देशित कर दिया है।
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वर्ष 2022 के चुनाव परिणाम में कुल 117 सीटों में से आप ने 92, कांग्रेस ने 18, शिअद ने 3, भाजपा ने 2 व आजाद व बसपा ने 1-1 सीट जीती थीं। इन आकंड़ों को देखें तो स्पष्ट है कि कांग्रेस, शिअद व भाजपा ने अपना-अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। पिछले चुनाव में खराब प्रदर्शन की एक बड़ी वजह यह भी थी कि इन दलों का संगठनात्मक ढांचा जमीनी स्तर पर बहुत ज्यादा मजबूत नहीं था। लिहाजा सियासी दल पिछली बार की कमजोरियों का आकलन करते हुए इस बार पुरानी गलतियों को दोहराना नहीं चाहते।
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