107 साल बाद भी भगत सिंह के गांव तक नहीं पहुंची सड़क

अमर उजाला Updated Sat, 28 Sep 2013 01:51 PM IST
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bhagat singh's birth place after 107 years

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107 साल...एक शताब्दी से ज्यादा का वक्त। लेकिन भगत सिंह वो नाम है जो आज भी हिंदुस्तान के जेहन में बसता है और शताब्दियों तक बसता रहेगा।
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आज हिंदुस्तान भगत सिंह की 107वीं जयंती मना रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि शहीदों की शहादत और पर्यटन के तौर पर पंजाब के खटकड़कलां को विश्व नक्शे पर देखने की चाह रखने वाले शहीद भगत सिंह के पैतृक गांव के लोग खोखले सरकारी दावों से आहत हैं।
आजादी मिले लंबा अरसा बीत गया। 66 साल, कितनीं सरकारें.. न जाने कितने ही वादे। लेकिन सब पर धूल लग गई। भगत सिंह का गांव आज जिस हालत में है उसे देख कर यही सवाल मन में उठता है कि क्या उनकी कुर्बानी की बस इतनी ही कद्र है?
आज स्थिति यह है कि भगत सिंह के गांव तक जाने के लिए कोई पक्की सड़क तक नहीं है। अगर कोई उस गांव तक जाना भी चाहे तो या तो उसके पास अपना साधन हो या किसी बस वाले की दया आने का इंतजार।  

गांव में म्यूजिम खुला पर रास्ता नहीं
ऐतिहासिक गांव में पक्के तौर पर कोई बस ही नहीं जाती। भले ही केंद्र सरकार द्वारा यहां पर करीब 16 करोड़ 80 लाख रुपए खर्च करके अत्याधुनिक म्यूजियम का निर्माण करवाया जा रहा है, लेकिन लोग पूछते हैं कि जब यहां पर बसें ही खड़ी नहीं होंगी तो पर्यटक यहां कैसे आएंगे। इससे पहले मौजूदा म्यूजियम के पास करीब 30 लाख रुपए की लागत से बनाया गया रेस्तरां भी इसी कारण बंद हो गया।

यहां आने वाले पर्यटक और रहवासी आहत हैं। हर पल मन में एक टीस ले कर जी रहे हैं। जी रहे हैं उस भरोसे से जो कभी सरकार ने उन्हें दिए थे। इन दिनों भगत सिंह का नाम यहां के लोगों के दिलों अलावा उन प्रार्थना की अर्जियों में दर्ज हैं जो वे सालों से सरकार को लिख रहे हैं।
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