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घल्लूघारे में जख्मी श्री गुरुग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप के संगत कर सकेंगी दर्शन

Wed, 02 Jun 2021 11:16 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 11:16 PM IST
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Wounded in Ghallughare will be able to have darshan with the holy form of Sri Guru Granth Sahib
जून 1984 में सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर सेना के बर्बरतापूर्वक हमले में जख्मी हुए श्री हरिमंदिर साहिब में सुशोभित श्री गुरुग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप के संगत को दर्शन करवाए जाएंगे। यह फैसला शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की प्रधान बीबी जागीर कौर की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कार्यकारिणी कमेटी की बैठक में लिया गया। गोली लगने से जख्नी श्री गुरुग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप को श्री अकाल तख्त साहिब के निकट स्थित गुरुद्वारा शहीद बाबा गुरबख्श सिंह में 3 से 5 जून तक संगत के दर्शनों के लिए सुशोभित किया जाएगा। साथ ही पावन स्वरूप में लगी गोली को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
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बैठक के बाद बीबी जागीर कौर ने पत्रकारों को बताया कि जून 1984 के घल्लूघारेे को सिख कौम कभी नहीं भूल सकती। यह वह रिसता जख्म है, जो 37 साल के बाद भी पीड़ा दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस घल्लूघारे के साथ जुड़ीं मौजूद निशानियों को संगत दर्शन के लिए रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी कौम पर हुए जुल्मों को याद रख सके। कमेटी ने फैसला किया है कि केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के आदेश पर इस दौरान सेना के हमले में श्री दरबार साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब के जिन सुनहरी पत्रों पर गोलियां लगी थीं, उनको भी जल्द ही श्री अकाल तख्त साहिब स्थित भोरा साहिब में संगत के दर्शनों के लिए रखा जाएगा।
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बीबी जागीर कौर ने बताया कि इसके साथ ही छेवीं पातशाही के ऐतिहासिक अकालसर कुएं के भी दर्शन करवाने का प्रबंध किया जाएगा। कुछ ही दिनों में जून 1984 से संबंधित बनाई जा रही गैलरी की भी शुरुआत की होगी। इसमें गिराए गए श्री अकाल तख्त साहिब का माडल लगाया जाएगा। सेना की गोलियों की गवाह खजाना ड्योढ़ी को भी संभालने का काम बहुत जल्द शुरू किया जाएगा और शहीद किए गए सिंह और सिंहनियों तथा भुजंगियों का ब्योरा इकट्ठा करने का प्रयास किया जाएगा।
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उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जून 1984 के घल्लूघारे के दौरान समय की केंद्र की हुकूमत ने जहां सिख कौम के सर्वोच्च स्थान श्री अकाल तख्त साहिब को गिराया, वहीं पूरी दुनिया के पवित्र स्थान सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब को भी टैंकों का निशाना बनाया। जकरिया खान और अब्दाली जैसे विदेशी हमलावरों ने भी सिखों और श्री दरबार साहिब को अपना निशाना बनाया था, लेकिन जून 84 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सेना का हमला करवाकर और भी दर्द दिया है। इस अवसर पर एसजीपीसी के सीनियर उप प्रधान सुरजीत सिंह भिट्टेवड्ड, जूनियर उप प्रधान बाबा बूटा सिंह, महासचिव एडवोकेट भगवंत सिंह सियालका, मुख्य सचिव एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, कार्यकारिणी सदस्य नवतेज सिंह काउनी, बलदेव सिंह चुंघा और सतविंदर सिंह टोहड़ा भी उपस्थित थे।
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