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ट्रंप सरकार का आप्रवासियों को बड़ा झटका: वर्क परमिट की वैधता 5 साल से घटाकर 18 महीने, पंजाबियों की बढ़ेगी चिंता
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-कनाडा–अमेरिका की कड़ी होती नीतियों से आप्रवासियों की मुश्किलें बढ़ीं
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कंवरपाल
हलवारा। अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय आप्रवासियों के लिए ट्रंप सरकार ने एक और बड़ा फैसला लागू कर दिया है। यूएससीआईएस ने रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज़ (ईएडी) यानी वर्क परमिट की अधिकतम वैधता 5 वर्ष से घटाकर मात्र 18 महीने कर दी है। नया नियम 5 दिसंबर 2025 से दाखिल या लंबित होने वाले सभी प्रारंभिक और नवीकरण आवेदनों पर लागू होगा।
नई नीति से भारतीय समुदाय में भारी चिंता है। पहले जहां वर्क परमिट पांच वर्ष तक मान्य रहता था, वहीं अब हर 18 महीने में इसे नवीनीकृत कराना होगा। इससे आप्रवासियों को 2500-3000 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त खर्च बार-बार उठाना पड़ेगा।अमेरिका में रहने वाले दविंदर सिंह और बिंदर सिंह का कहना है कि सरकार ग्रीन कार्ड देने में पहले ही बेहद सख्त है। अब 5 साल बाद पड़ने वाला खर्च हर 18 महीने में झेलना पड़ेगा, जिससे बोझ और बढ़ेगा।
ग्रीन कार्ड और शरणार्थियों के लिए बढ़ी मुश्किलें
यह बदलाव मुख्य रूप से रोजगार-आधारित, परिवार-आधारित, और लंबित शरण आवेदनकर्ताओं को प्रभावित करेगा। हजारों-लाखों शरणार्थी, जो ग्रीन कार्ड का सपना देख रहे हैं, इस फैसले को लेकर खासे चिंतित हैं।
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यूएससीआईएस ने तर्क दिया है कि कम वैधता अवधि से विदेशी नागरिकों की सुरक्षा जांच अधिक बार की जा सकेगी और शरण व ग्रीन कार्ड मामलों की पुन:स्क्रीनिंग आसान होगी।
नियोक्ताओं पर भी बढ़ेगा बोझ
नियम में कटौती के साथ हाल ही में खत्म हुई 540 दिन की ऑटोमैटिक एक्सटेंशन व्यवस्था के कारण वर्क परमिट रिन्यूअल में देरी होने पर कार्य प्राधिकरण में अंतराल का जोखिम भी बढ़ जाएगा। इससे कंपनियों को स्टाफिंग अस्थिरता, बार-बार दस्तावेज़ सत्यापन और बढ़ती अनुपालन लागत का सामना करना पड़ेगा।
एच-वन बी वीजा धारकों को राहत
ट्रंप प्रशासन ने इस नीति से एच-वन बी वीजा धारकों को बाहर रखा है। उनके पास पहले से ही रोजगार प्राधिकरण का अधिकार है और उन्हें अलग से ईएडी की आवश्यकता नहीं होती।
अमेरिका और कनाडा दोनों देशों की कड़ी होती आप्रवासन नीतियां भारतीयों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। नई नीति ने विशेषकर पंजाब से अमेरिका जाने वाले युवाओं में बेचैनी बढ़ा दी है।
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कंवरपाल
हलवारा। अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय आप्रवासियों के लिए ट्रंप सरकार ने एक और बड़ा फैसला लागू कर दिया है। यूएससीआईएस ने रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज़ (ईएडी) यानी वर्क परमिट की अधिकतम वैधता 5 वर्ष से घटाकर मात्र 18 महीने कर दी है। नया नियम 5 दिसंबर 2025 से दाखिल या लंबित होने वाले सभी प्रारंभिक और नवीकरण आवेदनों पर लागू होगा।
नई नीति से भारतीय समुदाय में भारी चिंता है। पहले जहां वर्क परमिट पांच वर्ष तक मान्य रहता था, वहीं अब हर 18 महीने में इसे नवीनीकृत कराना होगा। इससे आप्रवासियों को 2500-3000 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त खर्च बार-बार उठाना पड़ेगा।अमेरिका में रहने वाले दविंदर सिंह और बिंदर सिंह का कहना है कि सरकार ग्रीन कार्ड देने में पहले ही बेहद सख्त है। अब 5 साल बाद पड़ने वाला खर्च हर 18 महीने में झेलना पड़ेगा, जिससे बोझ और बढ़ेगा।
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ग्रीन कार्ड और शरणार्थियों के लिए बढ़ी मुश्किलें
यह बदलाव मुख्य रूप से रोजगार-आधारित, परिवार-आधारित, और लंबित शरण आवेदनकर्ताओं को प्रभावित करेगा। हजारों-लाखों शरणार्थी, जो ग्रीन कार्ड का सपना देख रहे हैं, इस फैसले को लेकर खासे चिंतित हैं।
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यूएससीआईएस ने तर्क दिया है कि कम वैधता अवधि से विदेशी नागरिकों की सुरक्षा जांच अधिक बार की जा सकेगी और शरण व ग्रीन कार्ड मामलों की पुन:स्क्रीनिंग आसान होगी।
नियोक्ताओं पर भी बढ़ेगा बोझ
नियम में कटौती के साथ हाल ही में खत्म हुई 540 दिन की ऑटोमैटिक एक्सटेंशन व्यवस्था के कारण वर्क परमिट रिन्यूअल में देरी होने पर कार्य प्राधिकरण में अंतराल का जोखिम भी बढ़ जाएगा। इससे कंपनियों को स्टाफिंग अस्थिरता, बार-बार दस्तावेज़ सत्यापन और बढ़ती अनुपालन लागत का सामना करना पड़ेगा।
एच-वन बी वीजा धारकों को राहत
ट्रंप प्रशासन ने इस नीति से एच-वन बी वीजा धारकों को बाहर रखा है। उनके पास पहले से ही रोजगार प्राधिकरण का अधिकार है और उन्हें अलग से ईएडी की आवश्यकता नहीं होती।
अमेरिका और कनाडा दोनों देशों की कड़ी होती आप्रवासन नीतियां भारतीयों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। नई नीति ने विशेषकर पंजाब से अमेरिका जाने वाले युवाओं में बेचैनी बढ़ा दी है।