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आतंकी बाज सिंह जेल से रिहा
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Tue, 05 Jan 2016 03:15 PM IST
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पंजाब सरकार के जेल विभाग ने आखिर सोमवार शाम को जेल की सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आतंकवादी बाज सिंह निवासी गांव भुल्लर लोपोके को रिहा कर दिया गया।
शाम के समय बाज सिंह की पत्नी और बेटा जेल के बाहर से उसे लेने के लिए आए थे। बाज सिंह के रिहाई के निर्देश करीब पांच दिन पहले ही जारी हो गए थे। लेकिन सजा दौरान अदालत की ओर किए गए जुर्माने को अदा न करने और जेल की कुछ औपचारिकताएं के चलते उसे रिहा नहीं किया गया था।
बाज सिंह खालिस्तान कमांडो फोर्स का सदस्य रहा है और इसे पुलिस ने पहले 1993 और फिर उसके बाद 1997 में गिरफ्तार किया था। बाज सिंह गोलियां चलाने आदि जैसे केसों में शामिल था।
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इसके खिलाफ भी टाडा एक्ट में केस दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में जब कोर्ट में केस चला तो टाडा एक्ट के तहत कोई भी एक्टीविटी साबित न हो पाई। इस तहत उसे अदालत ने टाडा एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया था। 1993 में की गई हत्या के मामले में बाज सिंह को सजा सुनाई गई थी। बाज सिंह अपनी सजा पूरी कर चुका था, लेकिन अभी उसे रिहा नहीं किया गया था।
बापू सूरत सिंह की ओर से सिख कैदियों की रिहाई के लिए की गई भूख हड़ताल वाली लिस्ट में बाज सिंह का नाम भी है।
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शाम के समय बाज सिंह की पत्नी और बेटा जेल के बाहर से उसे लेने के लिए आए थे। बाज सिंह के रिहाई के निर्देश करीब पांच दिन पहले ही जारी हो गए थे। लेकिन सजा दौरान अदालत की ओर किए गए जुर्माने को अदा न करने और जेल की कुछ औपचारिकताएं के चलते उसे रिहा नहीं किया गया था।
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बाज सिंह खालिस्तान कमांडो फोर्स का सदस्य रहा है और इसे पुलिस ने पहले 1993 और फिर उसके बाद 1997 में गिरफ्तार किया था। बाज सिंह गोलियां चलाने आदि जैसे केसों में शामिल था।
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इसके खिलाफ भी टाडा एक्ट में केस दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में जब कोर्ट में केस चला तो टाडा एक्ट के तहत कोई भी एक्टीविटी साबित न हो पाई। इस तहत उसे अदालत ने टाडा एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया था। 1993 में की गई हत्या के मामले में बाज सिंह को सजा सुनाई गई थी। बाज सिंह अपनी सजा पूरी कर चुका था, लेकिन अभी उसे रिहा नहीं किया गया था।
बापू सूरत सिंह की ओर से सिख कैदियों की रिहाई के लिए की गई भूख हड़ताल वाली लिस्ट में बाज सिंह का नाम भी है।