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किडनी कांड में छह लोग दोषी करार
अमर उजाला, अमृतसर
Updated Sat, 02 Nov 2013 09:51 PM IST
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अमृतसर मे बहुचर्चित किडनी कांड में अदालत ने छह लोगों को दोषी करार दिया है। इनमें पांच डाक्टर और एक पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर शामिल हैं।
शनिवार को जिला व अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जीएस बख्शी की अदालत 8 नवंबर को सभी दोषियों को सजा सुनाएगी। शनिवार को अदालती आदेश के बाद सभी दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
दोषियों के नाम हैं- मेडिकल कालेज अमृतसर के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. ओपी महाजन, मेडिकल कालेज अमृतसर के फोरेंसिक विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. जगदीश गार्गी, डॉ. अरजिंदर सिंह, डॉ. एचएस भूटानी, डॉ. एसकेएस ग्रोवर और हरियाणा पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर सुरेश कुमार शर्मा।
2002 में उजागर हुआ था कांड
इस मामले में पुलिस इंस्पेक्टर को छोड़कर बाकी सभी लोग किडनी ट्रांसप्लांट आथोराइजेशन कमेटी के सदस्य थे। यह सदस्य ही किडनी दान करने वाले लोगों के दस्तावेजों की जांच के बाद ऑपरेशन की अनुमति देते थे।
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यह मामला नवंबर 2002 में तत्कालीन एसपी सिटी-1 कुंवर विजय प्रताप ने उजागर करते हुए उक्त छह लोगों के खिलाफ थाना कोतवाली में केस दर्ज किया था।
शिकायत एक नाबालिग लड़के बगीचा सिंह के बयान पर दर्ज हुई थी। बगीचा का ऑपरेशन किडनी में पत्थरी का रोग बताकर किया गया था लेकिन बाद में उसे स्वास्थ्य संबंधी दूसरी परेशानियां होने लगीं तो उसने अपनी जांच कराई। जांच में यह सामने आया कि उसकी एक किडनी निकाली जा चुकी है।
बगीचा सिंह ने इसकी शिकायत पुलिस को देकर डाक्टरों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। कुछ समय बाद बगीचा की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। लेकिन यह केस सरकार बनाम आरोपी डाक्टरों के बीच जारी रहा।
मजदूरों को बनाते थे निशाना
इस कांड में दोषी डाक्टर बाहरी राज्यों से मजदूरी करने आए लोगों को अपना शिकार बनाते थे। बगीचा सिंह के मामले के बाद कुछ अन्य मामले भी पुलिस ने दर्ज किए।
इन मामलों में मजदूरों ने किडनी निकाले जाने के खुलासे किए थे। पुलिस तहकीकात के दौरान कुछ वकीलों और न्यूरो सर्जन डाक्टरों के भी नाम सामने आए थे, जिन पर अदालत में केस अभी विचाराधीन हैं।
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शनिवार को जिला व अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जीएस बख्शी की अदालत 8 नवंबर को सभी दोषियों को सजा सुनाएगी। शनिवार को अदालती आदेश के बाद सभी दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
दोषियों के नाम हैं- मेडिकल कालेज अमृतसर के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. ओपी महाजन, मेडिकल कालेज अमृतसर के फोरेंसिक विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. जगदीश गार्गी, डॉ. अरजिंदर सिंह, डॉ. एचएस भूटानी, डॉ. एसकेएस ग्रोवर और हरियाणा पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर सुरेश कुमार शर्मा।
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2002 में उजागर हुआ था कांड
इस मामले में पुलिस इंस्पेक्टर को छोड़कर बाकी सभी लोग किडनी ट्रांसप्लांट आथोराइजेशन कमेटी के सदस्य थे। यह सदस्य ही किडनी दान करने वाले लोगों के दस्तावेजों की जांच के बाद ऑपरेशन की अनुमति देते थे।
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यह मामला नवंबर 2002 में तत्कालीन एसपी सिटी-1 कुंवर विजय प्रताप ने उजागर करते हुए उक्त छह लोगों के खिलाफ थाना कोतवाली में केस दर्ज किया था।
शिकायत एक नाबालिग लड़के बगीचा सिंह के बयान पर दर्ज हुई थी। बगीचा का ऑपरेशन किडनी में पत्थरी का रोग बताकर किया गया था लेकिन बाद में उसे स्वास्थ्य संबंधी दूसरी परेशानियां होने लगीं तो उसने अपनी जांच कराई। जांच में यह सामने आया कि उसकी एक किडनी निकाली जा चुकी है।
बगीचा सिंह ने इसकी शिकायत पुलिस को देकर डाक्टरों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। कुछ समय बाद बगीचा की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। लेकिन यह केस सरकार बनाम आरोपी डाक्टरों के बीच जारी रहा।
मजदूरों को बनाते थे निशाना
इस कांड में दोषी डाक्टर बाहरी राज्यों से मजदूरी करने आए लोगों को अपना शिकार बनाते थे। बगीचा सिंह के मामले के बाद कुछ अन्य मामले भी पुलिस ने दर्ज किए।
इन मामलों में मजदूरों ने किडनी निकाले जाने के खुलासे किए थे। पुलिस तहकीकात के दौरान कुछ वकीलों और न्यूरो सर्जन डाक्टरों के भी नाम सामने आए थे, जिन पर अदालत में केस अभी विचाराधीन हैं।