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Amritsar News: गर्म विचारधारा वालों को श्री अकाल तख्त का जत्थेदार बनाने के लिए एसजीपीसी को मिल रहे प्रस्ताव

Sat, 24 May 2025 09:01 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 24 May 2025 09:01 PM IST
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SGPC is getting proposals to make extremist people the Jathedar of Sri Akal Takht
-सोशल मीडिया पर चर्चा तेज, पक्ष व विपक्ष में लोग खुल कर आ रहे सामने
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-एसजीपीसी की ओर से मांगे जा रहे जत्थेदार की नियुक्त के लिए सुझाव
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पंकज शर्मा
अमृतसर। जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार पद से हटाए जाने के बाद तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार की जिम्मेदारी तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह संभाल रहे हैं। अब सिख कौम में अकाल तख्त का स्थायी जत्थेदार नियुक्त करने के लिए आवाज उठने लगी है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की नियुक्ति के लिए दुनिया भर के सिख संगठनों से जत्थेदार के नामों का प्रस्ताव मांग रही है। बहुत सारे संगठनों के सुझाव मिले हैं। इनमें कई नाम गर्म विचारधारा वालों के भी हैं। हालांकि, अभी तक एसजीपीसी ने किसी भी व्यक्ति को जत्थेदार नियुक्त करने का फैसला नहीं लिया है।

उधर, सोशल मीडिया पर एसजीपीसी के सूत्रों के हवाले से चर्चा शुरू हो गई है कि अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार लगाने लिए बब्बर खालसा के सरगर्म कार्यकर्ता रह चुके बलवंत सिंह राजोआणा और जगतार सिंह हवाला का नाम का नाम भी प्रस्तावित किया है। चर्चा यह भी है कि अकाली दल की पहली पसंद बलवंत सिंह राजोआणा है। इस पर पार्टी के अंदर भी चर्चा हो रही है। अकाली दल कई बार बलवंत सिंह राजोआणा का उपयोग चुनाव व अपने राजनीतिक हितों के लिए कर चुका है।
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सूत्रों का यह भी कहना है कि गर्म विचारधारा वाले दमदमी टकसाल के मेहता ग्रुप के अकाली दल बादल से दूर होने की भरपाई अकाली दल अब गर्म विचारधारा वाले अन्य संगठनों को अपने साथ जोड़ कर करना चाहता है, ताकि पंथक क्षेत्र में कम हो रहे वोट बैंक को बचाया जा सके। इससे पहले दमदमी टकसाल को कमजोर करने के लिए टकसाल के विरोधी भाई रणजीत सिंह ढडरियांवाले को एक कथित सुनियोजित समझौते के तहत अकाल तख्त से माफी दिलवाई जा चुकी है।
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उधर, जत्थेदार जगतार सिंह हवारा भी जेल में है। उसे सरबत खालसा के दौरान अकाल तख्त का जत्थेदार घोषित किया था। उसकी जगह ध्यान सिंह मंड को कार्यवाहक जत्थेदार नियुक्त किया गया था। हवारा का नाम इसलिए दूसरे नंबर पर रखा जा रहा है क्योंकि हवारा किसी भी वक्त अकाली दल की लाइन से दूर जाकर अपने फैसला कर सकता है। इसलिए राजोआणा का नाम पहले नाम पर रखा जा रहा है।
इस मामले को लेकर एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी का कहना है कि अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की नियुक्ति सिख संगठनों और सिख कौम की भावनाओं के अनुसार ही होगी इस के लिए संगत से सुझाव मांगे की अभी प्रक्रिया चल रही है।



पहले भी गर्म विचारधारा वाले रहे चुके हैं जत्थेदार
अकाली दल की हमेशा नीति रही है कि जब वह पंथक संकट में घिर जाता है और केंद्र पर दबाव बनाने की जरूरत पड़ती है, तो फिर वह गर्म विचारधारा वाले व्यक्ति को जत्थेदार बनाता है। इससे पहले भी भाई रणजीत सिंह और भाई जसबीर सिंह रोडे को जत्थेदार नियुक्त किया जा चुका है। बाद में उनको पद से हटाने के लिए एक मिनट की भी देरी नहीं लगाई गई। बलवंत सिंह राजोआणा और जगतार सिंह हवारा बब्बर खालसा इंटरनेशनल के कार्यकर्ता थे। यह दोनों पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के कांड में शामिल थे। दोनों ही इस वक्त जेल में है।
संवाद
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