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पंजाब सरकार बताए कि एसपीसीए अमृतसर की दुर्गति का जिम्मेदार कौन : प्रो. चावला
Sat, 13 Jul 2024 07:06 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
Updated Sat, 13 Jul 2024 07:06 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि अमृतसर की एसपीसीए अर्थात पशुओं के लिए क्रूरता रोकने वाली और बीमार पशुओं का उपचार करने के लिए बनी संस्था आज बुरी तरह बीमार है। वहां के स्टाफ पर सरकार की अनदेखी से क्रूरता हो रही है। टूटी फूटी इमारत, गंदा वातावरण, लगभग 48 कुत्तों की दिन-रात की चीखें और आर्थिक साधनों का अभाव आज एसपीसीए की हालत बन गई है।
डिप्टी कमिश्नर अमृतसर इस संस्था के प्रमुख हैं। शायद उन्होंने भी और इस संबंध के महकमे के मंत्री ने भी कभी हाथी गेट में बनी इस संस्था की हालत अपनी आंखों से नहीं देखी होगी। प्रो. चावला ने कहा कि 2010 में बनाई कमेटी के सदस्य ही यहां अपनी मनमानी कर रहे हैं। सरकारी सदस्य तो बहुत कम आते हैं, लेकिन जो निजी सदस्य बनाए गए हैं जिन्हेें पंद्रह साल बाद भी बदला नहीं गया वही यहां पर अपनी सत्ता चला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नगर निगम की जमीन पर बनी यह बिल्डिंग नगर निगम के नियंत्रण में ही चलती है। निगम की डाॅक्टर ही यहां काम कर रही हैं और पंजाब सरकार के पशुओं के डाॅक्टर इलाज के लिए तैनात हैं, पर इसकी दीवारों के अंदर कभी कोई अधिकारी नहीं गए और बेचारे कर्मचारी जैसे तैसे अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। पंजाब सरकार से अपील है कि इस विभाग के उच्चाधिकारी को अमृतसर भेजें और यह देखें कि यहां पशुओं के लिए क्रूरता रोकने की बात कही जाती है, पर यहां के कर्मचारी कितने अस्वस्थ और पीड़ादायक वातावरण में रहते हैं।
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अमृतसर। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि अमृतसर की एसपीसीए अर्थात पशुओं के लिए क्रूरता रोकने वाली और बीमार पशुओं का उपचार करने के लिए बनी संस्था आज बुरी तरह बीमार है। वहां के स्टाफ पर सरकार की अनदेखी से क्रूरता हो रही है। टूटी फूटी इमारत, गंदा वातावरण, लगभग 48 कुत्तों की दिन-रात की चीखें और आर्थिक साधनों का अभाव आज एसपीसीए की हालत बन गई है।
डिप्टी कमिश्नर अमृतसर इस संस्था के प्रमुख हैं। शायद उन्होंने भी और इस संबंध के महकमे के मंत्री ने भी कभी हाथी गेट में बनी इस संस्था की हालत अपनी आंखों से नहीं देखी होगी। प्रो. चावला ने कहा कि 2010 में बनाई कमेटी के सदस्य ही यहां अपनी मनमानी कर रहे हैं। सरकारी सदस्य तो बहुत कम आते हैं, लेकिन जो निजी सदस्य बनाए गए हैं जिन्हेें पंद्रह साल बाद भी बदला नहीं गया वही यहां पर अपनी सत्ता चला रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि नगर निगम की जमीन पर बनी यह बिल्डिंग नगर निगम के नियंत्रण में ही चलती है। निगम की डाॅक्टर ही यहां काम कर रही हैं और पंजाब सरकार के पशुओं के डाॅक्टर इलाज के लिए तैनात हैं, पर इसकी दीवारों के अंदर कभी कोई अधिकारी नहीं गए और बेचारे कर्मचारी जैसे तैसे अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। पंजाब सरकार से अपील है कि इस विभाग के उच्चाधिकारी को अमृतसर भेजें और यह देखें कि यहां पशुओं के लिए क्रूरता रोकने की बात कही जाती है, पर यहां के कर्मचारी कितने अस्वस्थ और पीड़ादायक वातावरण में रहते हैं।
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