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पंजाब से ग्राउंड रिपोर्ट: कच्चे घर जमींदोज... महीनों की मेहनत घंटों में बर्बाद, गांव छोड़ने को मजबूर हुए लोग
Wed, 03 Sep 2025 03:04 PM IST
शाहरुख खान
पंकज शर्मा, अमर उजाला, अमृतसर
पंकज शर्मा, अमर उजाला, अमृतसर
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 03 Sep 2025 03:04 PM IST
सार
पंजाब के अमृतसर में रावी दरिया में आई बाढ़ से हालात बिगड़ रहे हैं। कच्चे घर जमींदोज हो गए हैं। लोग गांव छोड़ने को मजबूर हो गए। फसलें और पशु भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
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बाढ़ के पानी में गांव घोनेवाल की सड़क बह गई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
अमृतसर जिले की अजनाला तहसील का सीमांत गांव घोनेवाल इन दिनों रावी दरिया में आई बाढ़ के चलते बुरी तरह प्रभावित है। गांव के लोग जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। जलभराव ने जहां कच्चे घरों को जमींदोज कर दिया है। फसलें और पशु भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
हालात इतने भयावह हैं कि गलियों और घरों में तीन-तीन फीट तक पानी भर चुका है। लोग गांव छोड़ने को मजबूर हैं। गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को पहले चरण में बाहर निकाला गया है।
अब भी कई परिवार ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। प्रशासन, सेना और एनजीओ लगातार बचाव व राहत कार्यों में जुटे हैं लेकिन गांववासियों की मुश्किलें फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रही।
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रावी दरिया की बाढ़ ने घोनेवाल गांव को चारों तरफ से घेर लिया है। लोग अपने जीवन, घर और रोजी-रोटी की लड़ाई लड़ रहे हैं। सवाल यह है कि कब तक यह लोग सिर्फ राहत सामग्री पर जिंदा रहेंगे? कब उन्हें उनके नुकसान का वास्तविक मुआवजा मिलेगा?
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हालात इतने भयावह हैं कि गलियों और घरों में तीन-तीन फीट तक पानी भर चुका है। लोग गांव छोड़ने को मजबूर हैं। गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को पहले चरण में बाहर निकाला गया है।
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अब भी कई परिवार ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। प्रशासन, सेना और एनजीओ लगातार बचाव व राहत कार्यों में जुटे हैं लेकिन गांववासियों की मुश्किलें फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रही।
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रावी दरिया की बाढ़ ने घोनेवाल गांव को चारों तरफ से घेर लिया है। लोग अपने जीवन, घर और रोजी-रोटी की लड़ाई लड़ रहे हैं। सवाल यह है कि कब तक यह लोग सिर्फ राहत सामग्री पर जिंदा रहेंगे? कब उन्हें उनके नुकसान का वास्तविक मुआवजा मिलेगा?
गांव की कुल जन संख्या 1411 है। 293 घर है। पुरुष 747 और महिलाएं 666 है। जीरो से 6 साल तक के बच्चों की संख्या 184 है। लोग खेतीबाड़ी व मजदूरी का काम करते हैं। घोनेवाल अमृतसर से 55 किलोमीटर और अजनाला से 30 किलोमीटर दूर है।
महीनों की मेहनत घंटों में बर्बाद
बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा। गांव के कई वृक्ष जलभराव में गिर गए। सबसे बड़ा झटका किसानों को लगा है। धान की पूरी फसल बाढ़ के पानी में डूब चुकी है। किसान हरमिंदर सिंह, सुखदेव सिंह और शीतल सिंह बताते हैं कि उनकी महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गई। उनका कहना है कि इस बार के नुकसान से उबर पाना बेहद मुश्किल होगा।
बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा। गांव के कई वृक्ष जलभराव में गिर गए। सबसे बड़ा झटका किसानों को लगा है। धान की पूरी फसल बाढ़ के पानी में डूब चुकी है। किसान हरमिंदर सिंह, सुखदेव सिंह और शीतल सिंह बताते हैं कि उनकी महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गई। उनका कहना है कि इस बार के नुकसान से उबर पाना बेहद मुश्किल होगा।
गांववासियों ने बताया कि जिला प्रशासन, सेना, एनडीआरएफ की टीमें और अलग-अलग एनजीओ लगातार राहत कार्य कर रहे हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। उन्हें खाने-पीने का सामान, कपड़े और जरूरी दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं लेकिन गांव में जलभराव इतना ज्यादा है कि हर जगह समय पर मदद नहीं पहुंच पा रही। ऐसे हालात के मुकाबले यह मदद नाकाफी लग रही है।
बीमारियां फैलने का खतरा
गांव के कई हिस्सों में पानी जमा होने से सांव और जहरीले जानवर निकलने लगे हैं। इससे लोगों में दहशत का माहौल है। इसके अलावा दस्त, उल्टी और छाती के रोग जैसी बीमारियां फैलने की सूचनाएं मिल रही हैं। गांव का स्कूल और पशु चिकित्सालय भी जलभराव से प्रभावित है। पशु बीमार पड़ रहे हैं और उनके इलाज की सुविधा भी बाधित हो चुकी है।
गांव के कई हिस्सों में पानी जमा होने से सांव और जहरीले जानवर निकलने लगे हैं। इससे लोगों में दहशत का माहौल है। इसके अलावा दस्त, उल्टी और छाती के रोग जैसी बीमारियां फैलने की सूचनाएं मिल रही हैं। गांव का स्कूल और पशु चिकित्सालय भी जलभराव से प्रभावित है। पशु बीमार पड़ रहे हैं और उनके इलाज की सुविधा भी बाधित हो चुकी है।
वहीं, बाढ़ के बीच कुछ अपराधी तत्व सक्रिय हो गए हैं। अब तक चोरी की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गांववासियों का कहना है कि पहले पुलिस नियमित गश्त करती थी लेकिन अब पुलिस के न पहुंच पाने से असामाजिक तत्वों का हौसला बढ़ गया है।
फसल का मुआवजा घोषित करे सरकार
गांववासियों का कहना है कि उनका भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। घर गिर गए, फसलें चौपट हो गईं और पशु बीमार पड़ गए। लोग केंद्र और राज्य सरकार से राहत और मुआवजा की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द धान की फसल का मुआवजा घोषित करे और घरों की मरम्मत व पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद मुहैया कराए।
गांववासियों का कहना है कि उनका भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। घर गिर गए, फसलें चौपट हो गईं और पशु बीमार पड़ गए। लोग केंद्र और राज्य सरकार से राहत और मुआवजा की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द धान की फसल का मुआवजा घोषित करे और घरों की मरम्मत व पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद मुहैया कराए।
जीवन का सबसे कठिन दौर
गांव के बुजुर्ग बलविंदर सिंह कहते हैं कि हमने जिंदगी में कई बार बाढ़ देखी लेकिन इस बार हालात बेहद खतरनाक हैं। न घर सुरक्षित है, न फसल बची है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। हम उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार हमारा सहारा बने। जब तक पानी पूरी तरह नहीं उतरता और सरकार राहत पैकेज का ऐलान नहीं करती, तब तक उनकी जिंदगी पटरी पर लौटना मुश्किल है।
गांव के बुजुर्ग बलविंदर सिंह कहते हैं कि हमने जिंदगी में कई बार बाढ़ देखी लेकिन इस बार हालात बेहद खतरनाक हैं। न घर सुरक्षित है, न फसल बची है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। हम उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार हमारा सहारा बने। जब तक पानी पूरी तरह नहीं उतरता और सरकार राहत पैकेज का ऐलान नहीं करती, तब तक उनकी जिंदगी पटरी पर लौटना मुश्किल है।