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यूक्रेन में फंसे बच्चों का बुरा हाल: पैसा खत्म, खाने-पीने के पड़े लाले, भीषण ठंड में फर्श पर बिता रहे रात

Sat, 26 Feb 2022 10:49 PM IST
Nivedita verma निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 26 Feb 2022 10:49 PM IST
सार

यूक्रेन के खारकीव में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही चाहत ने अपनी मां प्रभजोत कौर से वीडियो कॉल करते हुए वहां के हालात की जानकारी दी। चाहत ने उन्हें बताया कि वह मेट्रो स्टेशन में रहने को मजबूर है। खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका है।

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Many Youth of Amritsar Stuck in Ukraine due to war with russia
डीसी कांप्लेक्स में पहुंचे लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद भारत से वहां पढ़ने गए बच्चों का बुरा हाल हो गया है। बच्चों के पास खाने के लिए पैसा नहीं बचा है और पीने के पानी के लिए भी वे इधर-उधर भटक रहे हैं। यूक्रेन में भीषण ठंड के बीच बच्चों को ठंडे फर्श पर रात बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है। 

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यूक्रेन में रुक-रुककर बम धमाके हो रहे हैं और वे बंकर के अंदर छुपकर अपनी जान बचाने की मशक्कत कर रहे हैं। यूक्रेन में एमबीबीएस की शिक्षा हासिल करने गईं पुतलीघर की यशिता ने यूक्रेन से लौटने के बाद डीसी आफिस कांप्लेक्स में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। वहां फंसे बच्चों के परिजन शनिवार को डीसी गुरप्रीत सिंह खैहरा के पास गुहार लगाने पहुंचे थे। 
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डीसी दफ्तर कांप्लेक्स में पहुंची यशिता ने बताया कि यूक्रेन में बच्चों की हालत बद से बदतर हो रही है। उनके पास पैसा खत्म हो चुका है। खाने-पीने के लिए भी उन्हें वहां परेशानी हो रही है। भीषण ठंड में वे लोग वहां बिना कंबल के रात बिताने को मजबूर हैं। वहां फंसे बच्चे अपने परिजनों को वीडियो भेज-भेजकर अपने सुरक्षित होने का भरोसा तो दे रहे हैं, लेकिन सभी की सांसें अटकी हुई हैं। 
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यूक्रेन के खारकीव में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही चाहत ने अपनी मां प्रभजोत कौर से वीडियो कॉल करते हुए वहां के हालात की जानकारी दी। चाहत ने उन्हें बताया कि वह मेट्रो स्टेशन में रहने को मजबूर है। खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका है। पीने वाले पानी के टैंकर भी खत्म हो चुके हैं और टैंकरों को भरने के लिए कोई नहीं आ रहा है। यूक्रेन की सरकार उन्हें बार-बार यही कह रही है कि बॉर्डर पर चले जाएं, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर है। वहां तो हालात ऐसे हैं कि कुछ मीटर चलना भी संभव नहीं। 

उन्होंने बताया कि वहां अब कोई टैक्सी या ट्रेन नहीं है। बसों में ईंधन नहीं, उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह बच्चों को सही सलामत भारत लेकर आए। डा. वीना बेदी ने बताया कि उनका बेटा उदित बेदी खारकीव में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। उसकी 24 फरवरी की भारत के लिए फ्लाइट थी और इसके लिए वह एयरपोर्ट भी पहुंच गए थे, लेकिन इस बीच सभी फ्लाइट्स के रद्द किए जाने की घोषणा कर दी गई। उनके बेटे के साथ 12-13 अन्य लोग भी हैं। खाने पीने का बंदोबस्त भी नहीं है। अगर वह उन्हें पैसे भी भेजते हैं तो वहां एटीएम नहीं चल रहे। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि सरकार उनके बच्चों को सुरक्षित भारत लाए जाने की व्यवस्था करें।


प्रोमिला रानी ने बताया कि उनका बेटा अनमोल भी यूक्रेन में एमबीबीएस के तीसरे साल का छात्र है। दो दिनों से उसके साथ बात नहीं हुई। पहले अनमोल ने बताया था कि वे लोग वहां बहुत परेशान हैं। इसके अलावा डीसी आफिस कांप्लेक्स में पहुंचे प्रमोद शर्मा ने बताया कि उनका बेटा सुशांत शर्मा, परमपाल सिंह ने बताया कि उनकी बहन रमनीक कौर, मनोज कुमार ने बताया कि उनका बेटा सुशांत, अरमान ने बताया कि उनका भाई अमनदीप सिंह भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। 

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